टैरिफ पर ट्रंप ने अभी भी नहीं खोले हैं पूरे पत्ते! भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच कई सवाल बाकी

By अभिनय आकाश | Feb 03, 2026

पाकिस्तान वाले जो अमेरिका जाकर कह रहे थे कि चांद ले लो, तारे ले लो, सूरज ले लो हमसे जो मांगोगे वो दे देंगे। बस साथ दे दो। आज यह खबर उनको भी परेशान कर रही होगी। वो तो ये मान रहे थे कि अच्छा हो रहा है अमेरिका और भारत दूर हो रहे हैं। वो अपने करीब आने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन पाकिस्तान की सारी मेहनत पर पलीता लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डियर फ्रेंड डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा ऐलान किया जिसने भारतीय मार्केट को भी बूम बूम कर दिया।  पीएम मोदी चीन की यात्रा पर गए थे। जहां पर कि पुतिन के साथ भी उनकी बातचीत हुई थी और राष्ट्रपति पुतिन का भी भारत में दौरा हुआ था। तो भारत ये स्पष्ट कर चुका है कि वो चाहता है कि मल्टी लेटरल फोरम हो और उसमें किसी एक देश के ऊपर डिपेंडेंसी भारत की ना रहे। ये बिल्कुल स्पष्ट संदेश भारत का है। अमेरिका भी इस बात को भांप गया था कि भारत किसी दबाव में आकर अपने हितों से समझौता नहीं करने वाला है। डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लागू टैरिफ को घटाने का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने  अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट शेयर कर टैरिफ कट और भारत-अमेरिका ट्रेड डील़ पर सहमति बनने का ऐलान किया।

ट्रेड डील की पटकथा कैसे तैयार हुई? 

ट्रम्प ने 2 अप्रैल 2025 को भारत पर 25% टैरिफ का ऐलान किया था। 

27 अगस्त, 2025 को 25% टैरिफ का ऐलान किया।

3 फरवरी 2026 की रात 9:16 बजेः अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पोस्ट के जरिए पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की फोन बातचीत की जानकारी दी।

रात 10:28 बजे पर ट्रम्प ने टैरिफ कटौती और नई ट्रेड डील का ऐलान किया।

रात 11:02 बजे पीएम मोदी ने पुष्टि की।

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भारत-अमेरिका में कितना व्यापार है? 

लगभग 12 लाख करोड़ रुपए का व्यापार है। अमेरिका को निर्यात करीब ₹7.91 लाख करोड़, आयात करीब 4.17 लाख करोड़ है।

भारत ने 1 साल में कितनी डील कीं?

पिछले एक साल में भारत ने 6 देशों से डील की। ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड, ईयू, ईएफटीए ब्लॉक और अमेरिका। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को भी मदर ऑफ ऑल डील की संज्ञा दी गई है। इसके लिए भारत ने कई दशक प्रयास किया।

रूसी तेल पर लगा था 25% और टैरिफ

ट्रंप ने भारत के खिलाफ पहले 25% टैरिफ लगाया था और बाद में पिछले साल अगस्त में रूसी तेल खरीदने के नाम पर और 25% टैरिफ लगा दिया था। इसकी बड़ी चोट भारत के लेदर, टेक्सटाइल्स, जेम्स एंड जूलरी जैसे ज्यादा श्रम की जरूरत वाले सेक्टरों से निर्यात पर पड़ रही थी। दिसंबर में अमेरिका को निर्यात सालभर पहले से 1.83% घटकर 688.6 करोड़ डॉलर रहा। अमेरिका का 50% टैरिफ 27 अगस्त को लागू हुआ था। उसके बाद सितंबर से दिसंबर तक अमेरिका को निर्यात 25.6 बिलियन डॉलर का रहा।

भारत ने स्वाभिमान की जीत कैसे दर्ज की 

भारत पर ही सबसे पहले टेरिफ बढ़ाया गया था। ये 25% फिर कहा गया और बढ़ा देंगे। कंपनियों पर बैन लगाया गया। भारत ने स्वाभिमान की जीत तो दर्ज की है। यह तो आज स्पष्ट हुआ है। भारत की जो अपनी अर्थव्यवस्था है मजबूत है। भारत दुनिया में सबसे तेजी के साथ बढ़ रहा देश है। भारत इस वक्त जो है चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जल्दी तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने जा रहा है। तो दुनिया जानती है कि भारत पर जो है पैसा लगाया जा सकता है। इसके साथ ही बजट में हमने ये देखा कि वित्त मंत्री निमला सीतारमण ने इस बात का खास तौर से ध्यान दिया कि ट्रंप के टेरिफ के कारण भारत के जो जो सेक्टर प्रभावित हो रहे थे उन सब सेक्टर्स को राहत दी गई है। तो ये भी एक बड़ा संदेश था अमेरिका के लिए और उन एफआईआई के लिए जो अपना पैसा लगातार भारत से निकाल रहे थे।  भारत इस बात से चिंतित नहीं है कि ट्रंप क्या टेरिफ लगा रहे हैं बल्कि उसके साथ-साथ भारत अपने दूसरे रास्ते भी तलाश रहा है और यही कारण रहा कि भारत ने इयू के साथ जो डील की है और उसके बाद अमेरिका की जो प्रतिक्रिया आई थी डील के बाद जो अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों की जो प्रतिक्रिया आई थी उससे बिल्कुल स्पष्ट था कि अमेरिका को ये डील देख के जरूर है कि भारत ने इतना बड़ा और अपने हित का इतना बड़ा समझौता कैसे कर लिया। वो भी ऐसे वक्त में जब कि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका नाटो को आंख दिखा रहा है। 

500 अरब डॉलर खरीद का दावा

ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक के ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पाद और अन्य सामान खरीदेगा। हकीकत यह है कि भारत अभी अमेरिका से सालाना 50 अरब डॉलर से भी कम का आयात करता है। इस स्तर तक पहुंचने में 20 साल से अधिक का समय लग सकता है। इसलिए यह आंकड़ा किसी पक्के और तुरंत पूरे होने वाले वादे से ज्यादा एक लंबे समय का लक्ष्य लगता है।

जल्दबाजी के जश्न से पहले जान लें ट्रम्प के दावे में कई पेंच

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पोस्ट कई अहम बिंदुओं पर भ्रम पैदा करती है, जिनका स्पष्ट होना जरूरी है। ऐसे में भारत को अभी जश्न नहीं मनाना चाहिए। ट्रम्प का दावा है कि भारत टैरिफ शून्य कर देगा, लेकिन यह साफ नहीं है कि इसमें कौन से उत्पाद हैं? भारत अनाज, जीएम उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को विदेशी बाजार के लिए खोलने का विरोध करता रहा है।अभी भारत अमेरिका से सालाना 50 अरब डॉलर से कम आयात करता है। ऐसे में 500 अरब डॉलर (45 लाख करोड़ रु.) के लक्ष्य तक पहुंचने में 20 साल लग सकते हैं, जो बताता है कि आंकड़ा केवल लंबी अवधि की इच्छा है, तात्कालिक वादा नहीं। व्यापारिक समझौते बहुत गंभीर विषय होते हैं। जब तक दोनों देशों का संयुक्त बयान और समझौते का मसौदा सामने न आ जाए, तब तक इसे केवल एक राजनीतिक संकेत माना जाना चाहिए, न कि अंतिम समझौता।

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