By अभिनय आकाश | Sep 17, 2026
अमेरिका चाहे जो मर्जी कर ले कितना भी टेरिफ ठोक दे भारत ना कभी किसी के दबाव में झुका है और ना ही कभी झुकेगा। यह सीधी चेतावनी दी गई है भारत की तरफ से अमेरिका को दिल्ली के कूटनीतिक गलियारों से गूंजी। इस एक हुंकार ने वाशिंगटन से लेकर डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी संसद के होश उड़ाकर रख दिए हैं। जी हां, भारत में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ऐतिहासिक सफलता, प्रधानमंत्री मोदी, व्लादमीर पुतिन, शी जिनपिंग की एकजुटता से अमेरिका की नींद उड़ी हुई है। लगातार डोनाल्ड ट्रंप बेचैन और परेशान नजर आ रहे हैं। कैसे इन देशों की एकता को तोड़ा जाए? कैसे इन देशों को चोट पहुंचाई जाए? इसके लिए दिमाग लड़ा रहे हैं। भारत की बढ़ती वैश्विक धमक और रूस के साथ अटूट दोस्ती से अमेरिका इस कदर बौखलाया कि अब भारत की घेराबंदी करने के लिए बेहद खतरनाक और तानाशाही कदम उठाया। ना सिर्फ भारत बल्कि रूस और चीन को घेरने के लिए भी एक रणनीति बन डाली।
क्या है अमेरिका सेनेट का लिंडसे ग्राहम बिल?कैसे ट्रंप और अमेरिकी संसद भारत को सीधे तौर पर टारगेट करने के लिए बिल के नाम पर खेल कर रहे हैं। कहानी की शुरुआत होती है नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के बाद वाशिंगटन में मची अजीब सी खलबली से। जहां भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को देखकर अमेरिकी सत्ताधारियों के पेट में मरोड़ उठने लगी। जब अमेरिका भारत को रूस से दूर करने में पूरी तरह नाकाम रहा तो उसने आर्थिक ब्लैकमेलिंग और कानून का सहारा लेकर भारत पर शिकंजा कसने की चाल चली। अमेरिका में एक नया विधेयक लाया गया जिसे लिंडसे ग्राहम सेक्शन रशिया एंड ईरान बिल का नाम दिया गया। अमेरिकी सेनेट में इस बिल को 86 के मुकाबले 11 वोटों के विशाल बहुमत से पास भी करा लिया गया। इसके बाद इसे अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में पेश किया गया। जहां 17 सितंबर को इस बिल पर अंतिम वोटिंग होगी। इस बिल का सीधा मकसद यही है कि जो भी देश रूस से भारी भरकम मात्रा में कच्चा तेल खरीदेगा उस पर अमेरिका 100% टेरिफ लगा देगा। सीमा शुल्क यानी टेरिफ ठोक दिया जाएगा। अमेरिका को गलतफहमी थी कि 100% टेरिफ के खौफ से भारत अपने घुटने टेक देगा। रूस से दोस्ती तोड़ देगा। रूस का साथ छोड़ देगा। लेकिन अमेरिका का दोहरा चरित्र और बौखलाहट तब और ज्यादा बेनकाब हो गई और ज्यादा बढ़ गई। जब अमेरिकी सांसदों ने इस बिल में चालाकी से बदलाव करने की मांग शुरू कर दी। अमेरिकी सांसद अब यह मांग कर रहे हैं कि रूस से ज्यादा से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले दुनिया के 10 प्रमुख देशों जिसमें भारत, चीन, तुर्की, अज़र-बैजान शामिल हैं। उनका साफ-साफ लिखकर नाम उसमें शामिल किया जाए।
भारत का दो टूक जवाब
भारत ने साफ-साफ कहा भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले अपने 140 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर करता है और वो आगे भी इसी के मुताबिक काम करेगा। अमेरिका भले ही टेरिफ लगा दे भारत दबाव में नहीं आएगा और रूस से तेल खरीद जारी रखेगा।