By अभिनय आकाश | Nov 01, 2025
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका जल्द ही अपने परमाणु हथियारों की टेस्टिंग दोबारा शुरू करेग। यह एक ऐसा कदम है जो तीन दशकों से कायम नीति को पलट सकता है। 1992 के बाद से अमेरिका ने कोई भी परमाणु परीक्षण नहीं किया है और अब यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब रूस, चीन और उत्तर कोरिया लगातार अपनी परमाण क्षमता बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर यह परीक्षण हुआ, तो दुनिया फिर से एक नई परमाणु होड़ और अस्थिरता के दौर में प्रवेश कर सकती है।
1974 की सीमा परीक्षण प्रतिबंध संधि ने भूमिगत परीक्षणों को 150 किलोटन से कम क्षमता तक सीमित कर दिया था। 1992 में, संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें भूमिगत परीक्षणों पर तब तक रोक लगा दी गई जब तक कि कोई अन्य देश उन्हें फिर से शुरू न कर दे, जिससे वर्तमान प्रतिबंध लागू हुआ। 1997 में, राष्ट्रपति क्लिंटन ने व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि पर हस्ताक्षर किए, लेकिन सीनेट ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए इसे अनुमोदित करने से इनकार कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं अमेरिका के पास करीब 5,225 परमाणु हथियार हैं, जबकि रूस के पास 5,580। दोनों देशों के पास मिलकर दुनिया के 90% से ज्यादा परमाणु हथियार हैं। नेवादा में टेस्ट साइट को फिर से तैयार करने में 2 से 4 साल लग सकते हैं। 1960 के दशक में जिस Mercury Town में 20,000 लोग परीक्षण कार्यों में लगे रहते थे, अब वहां वह क्षमता नहीं बची है।