By अभिनय आकाश | Mar 10, 2026
एक ओर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच पिछड़ा हुआ है। तो दूसरी ओर नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन नेवी को मजबूत करने में लगे हुए हैं। खबर है कि किम जोंग उन की मौजूदगी में नॉर्थ कोरियन नेवी ने एक नए युद्धपोत से स्ट्रेटेजिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण कर लिया है। यह मिसाइल टेस्ट उत्तर कोरिया के नए 5000 टन वजनी युद्धपोत चोए हन क्लास डिस्ट्रॉयर से किया गया है। परीक्षण के बाद इस जहाज को आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पूरे परीक्षण को उत्तर कोरिया की समुद्री ताकत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह परीक्षण उत्तर कोरिया के पश्चिमी तट पर स्थित नमफो शिपयार्ड से किया गया है। इस दौरान किम जोंग उन खुद जहाज पर मौजूद थे और उन्होंने समुद्र से जमीन पर मार करने वाली स्ट्रेटेजिक क्रूज मिसाइल के लॉन्च को देखा।
मिसाइल टेस्ट के दौरान किम जोंग उन ने यह भी संकेत दिए हैं कि उत्तर कोरिया आने वाले सालों में इसी तरह के और भी युद्धपोत बनाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने जहाज निर्माण इंडस्ट्री को निर्देश दिया है कि अगले कुछ सालों में हर साल इस श्रेणी के कम से कम दो युद्धपोत बनाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि उत्तर कोरिया की नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और समुद्र के ऊपर और नीचे दोनों ओर से हमला करने की क्षमता विकसित की जाएगी। चोहन दरअसल एक नई सीरीज का पहला युद्धपोत है जिसे चोहन क्लास डिस्ट्रॉयर कहा जा रहा है। यह नाम उत्तर कोरिया के एक ऐतिहासिक सैन्य नेता चोई हन के नाम पर रखा गया है। इस जहाज को पहली बार अप्रैल 2025 में ल्च किया गया था और अब इसे पूरी तरह से ऑपरेशनल बनाने की दिशा में काम चल रहा है। हालांकि उत्तर कोरिया की नेवी के आधुनिकरण कार्यक्रम को पिछले साल एक बड़ा झटका लगा था।
मई 2025 में जब इसी क्लास के दूसरे युद्धपोथ को लॉन्च किया जा रहा था तब चोंगजन शिपयार्ड में एक हादसा हो गया और जहाज आंशिक रूप से पलट गया। उस समय किम जोंग उन ने इससे गंभीर लापरवाही बताते हुए अधिकारियों की कड़ी आलोचना की। इसके साथ-साथ उन्होंने मिसाइल, परमाणु हथियार और अब नौसेना की ताकत को भी तेजी से बढ़ाया है। वहीं अगर उत्तर कोरिया अपने युद्धपोतों पर परमाणु हथियार ले जाने वाली मिसाइलें तैनात कर देता है तो इससे पूर्वी एशिया में सैन्य संतुलन बदल सकता है। दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका पहले से ही उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर के चिंता में रहते हैं। अगर किम जोंग उन समुद्र में भी परमाणु हमला करने की क्षमता हासिल कर लेते हैं। उसे विकसित कर लेते हैं तो ये क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।