Tariffs पर India और Brazil मिलकर ऐसा जवाब देंगे, ये बात Donald Trump ने सपने में भी नहीं सोची होगी

By नीरज कुमार दुबे | Jan 23, 2026

भारत और ब्राजील के रिश्तों में इस समय एक नई सक्रियता दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के बीच हुई बातचीत ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देश अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के अगले चरण तक ले जाना चाहते हैं। इसी क्रम में यह भी तय हुआ है कि ब्राजील के राष्ट्रपति शीघ्र ही भारत की राजकीय यात्रा पर आएंगे। यह दौरा ऐसे समय में होने जा रहा है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था एक बार फिर अस्थिरता के दौर से गुजर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला की बातचीत में यह साफ संकेत मिला कि दोनों देश ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज को मजबूत करना चाहते हैं। वार्ता के दौरान व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई और आगे बढ़ने के रास्तों पर भी चर्चा की गई। देखा जाये तो यह केवल द्विपक्षीय संबंधों की बात नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक सोच का हिस्सा है जिसमें उभरती अर्थव्यवस्थाएं मिलकर एकतरफा वैश्विक फैसलों का संतुलित जवाब देना चाहती हैं।

अब सवाल यह है कि भारत और ब्राजील ट्रंप के टैरिफ हथियार का जवाब किस तरह दे रहे हैं? पहला रास्ता है आपसी व्यापार और निवेश को बढ़ाना। यदि अमेरिकी बाजार बाधा बनता है तो भारत और ब्राजील एक दूसरे के लिए वैकल्पिक और भरोसेमंद बाजार बन सकते हैं। दूसरा रास्ता है बहुपक्षीय मंचों पर संयुक्त रुख। विश्व व्यापार संगठन और अन्य वैश्विक संस्थाओं में दोनों देश मिलकर यह सवाल उठा सकते हैं कि एकतरफा टैरिफ नीति अंतरराष्ट्रीय नियमों की भावना के खिलाफ है। तीसरा रास्ता है ग्लोबल साउथ के अन्य देशों को साथ जोड़ना, ताकि यह संघर्ष केवल दो या तीन देशों का न रहकर सामूहिक आवाज बन जाए।

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भारत और ब्राजील की साझेदारी की सामरिक अहमियत भी कम नहीं है। दोनों ही देश अपने अपने क्षेत्रों में प्रभावशाली शक्ति हैं। भारत एशिया में और ब्राजील लैटिन अमेरिका में नेतृत्वकारी भूमिका निभाता है। इन दोनों का साथ आना उत्तर दक्षिण संतुलन को नई दिशा देता है। रक्षा सहयोग से लेकर समुद्री सुरक्षा तक और अंतरिक्ष अनुसंधान से लेकर स्वच्छ ऊर्जा तक, दोनों देशों के पास साझा काम करने के अनेक अवसर हैं।

इस रिश्ते का एक और महत्वपूर्ण पहलू है लोकतांत्रिक मूल्य। भारत और ब्राजील दोनों बड़े लोकतंत्र हैं और बहुलतावाद में विश्वास रखते हैं। ऐसे समय में जब दुनिया में संरक्षणवाद और संकीर्ण राष्ट्रवाद बढ़ रहा है, इन देशों का मिलकर बहुपक्षवाद की वकालत करना वैश्विक राजनीति में संतुलन पैदा करता है। यह संदेश जाता है कि वैश्विक शासन केवल ताकतवर देशों की मर्जी से नहीं चल सकता।

देखा जाये तो ब्राजील के राष्ट्रपति का भारत दौरा प्रतीकात्मक भी है और व्यावहारिक भी। प्रतीकात्मक इसलिए कि यह ग्लोबल साउथ की एकजुटता का संदेश देता है और व्यावहारिक इसलिए कि इससे ठोस समझौते और योजनाएं सामने आ सकती हैं। कृषि उत्पादों का आदान प्रदान, फार्मा और स्वास्थ्य सहयोग, डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप साझेदारी जैसे क्षेत्रों में दोनों देश एक दूसरे की पूरक क्षमताओं का लाभ उठा सकते हैं।

वैश्विक स्तर पर भारत ब्राजील संबंधों का असर संयुक्त राष्ट्र सुधार की मांग से लेकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग तक देखा जा सकता है। दोनों देश लंबे समय से यह कहते आए हैं कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं आज की दुनिया की वास्तविकताओं को सही ढंग से नहीं दर्शातीं। जब भारत और ब्राजील एक स्वर में यह बात कहते हैं तो उसका वजन कई गुना बढ़ जाता है।

इसलिए यह कहा जा सकता है कि ट्रंप की टैरिफ नीति ने अनजाने में भारत और ब्राजील को एक साझा रणनीतिक रास्ते पर ला खड़ा किया है। यह साझेदारी किसी एक देश के खिलाफ नहीं बल्कि एकतरफा दबाव की राजनीति के खिलाफ है। आने वाले समय में यदि भारत और ब्राजील अपने सहयोग को गहराई देते हैं, तो वे न केवल अपने आर्थिक हितों की रक्षा कर पाएंगे बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए एक नई दिशा भी तय करेंगे।

बहरहाल, यह संबंध केवल वर्तमान की जरूरत नहीं बल्कि भविष्य की तैयारी है। एक ऐसा भविष्य जहां वैश्विक फैसले सहयोग से होंगे, दबाव से नहीं। भारत और ब्राजील की बढ़ती नजदीकी इसी उम्मीद का संकेत देती है।

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