टैरिफ तलवार से अब सिनेमा पर वार, विदेशी फिल्मों पर 100% टैरिफ से बॉलीवुड होगा प्रभावित

By नीरज कुमार दुबे | Sep 30, 2025

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ऐसा फैसला लिया है जिसने भारत समेत पूरी दुनिया की फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। अपने पारंपरिक अंदाज़ में सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा है कि अब अमेरिका के बाहर बनी किसी भी फिल्म पर 100% टैरिफ (कर) लगाया जाएगा। उनका तर्क है कि “अमेरिकी फिल्म उद्योग को अन्य देशों ने चुरा लिया है, ठीक वैसे ही जैसे किसी बच्चे से टॉफी छीन ली जाती है।”

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हम आपको बता दें कि ट्रंप का राजनीतिक आधार अमेरिकी मध्यवर्ग और घरेलू उद्योग जगत है, जो मानता है कि वैश्वीकरण ने उनकी नौकरियाँ छीन लीं। यही सोच फिल्म उद्योग में भी दिखाई देती है। अमेरिकी स्टूडियो लंबे समय से VFX और एनीमेशन का बड़ा हिस्सा भारत जैसे देशों में आउटसोर्स करते रहे हैं। यह भारत के लिए रोज़गार और तकनीकी विकास का बड़ा अवसर था। लेकिन ट्रंप इसे “अमेरिका की कमजोरी” के रूप में देखते हैं।

देखा जाये तो भारत के हितों के विरुद्ध ट्रंप की नीति कोई नई बात नहीं है। पहले भी उन्होंने स्टील, एल्युमिनियम और आईटी सेवाओं पर कठोर रुख अपनाया। अब फिल्म उद्योग को निशाना बनाकर वह भारत को दोहरा नुकसान पहुँचा रहे हैं। ट्रंप के फैसले के बॉलीवुड पर संभावित असर की बात करें तो आपको बता दें कि भारतीय फिल्म उद्योग हर साल 100 से 150 मिलियन डॉलर अमेरिकी बाज़ार से कमाता है। हिंदी और तेलुगु की बड़ी फ़िल्में अकेले 10 मिलियन डॉलर तक की कमाई अमेरिका में करती हैं। यदि 100% टैरिफ लागू होता है तो वहाँ टिकट की कीमत दोगुनी होकर 40 डॉलर तक पहुँच सकती है। इससे सबसे अधिक प्रभावित होंगे भारतीय प्रवासी दर्शक, जो अब तक भारतीय फिल्मों को बड़े पैमाने पर समर्थन देते आए हैं।

इसके अलावा, OTT और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे- नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, डिज़्नी+ हॉटस्टार के लिए भी यह झटका है। अगर भारतीय कंटेंट महँगा होगा, तो उसकी पहुँच कम होगी और प्रोड्यूसर्स को घाटा उठाना पड़ेगा। इससे भारतीय सिनेमा का वैश्विक प्रसार धीमा हो सकता है।

विडंबना यह है कि ट्रंप जिस हॉलीवुड की रक्षा करना चाहते हैं, उसी को उनके फैसले से सबसे बड़ा नुकसान होगा। हम आपको बता दें कि अमेरिकी फ़िल्म उद्योग की 70% कमाई अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से होती है। यदि अन्य देश जवाबी टैरिफ लगाते हैं तो हॉलीवुड का कारोबार ध्वस्त हो सकता है। इसके अलावा, हॉलीवुड की तमाम बड़ी फ़िल्मों— अवेंजर्स: एंडगेम, ड्यून, जंगल बुक, इंटरस्टेलर का पोस्ट-प्रोडक्शन भारत जैसे देशों में हुआ है। अगर यह सहयोग बाधित होता है तो न केवल लागत बढ़ेगी, बल्कि रचनात्मक गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।

माना जा रहा है कि भारतीय एनीमेशन और VFX उद्योग 2026 तक 2.2 बिलियन डॉलर का हो जाएगा। ट्रंप का यह फैसला इस ग्रोथ को रोक सकता है। लेकिन यह भारत के लिए एक अवसर भी है- नए बाजारों और साझेदारियों की तलाश का। यूरोप, एशिया और अफ्रीका में भारतीय कंटेंट के लिए संभावनाएँ हैं। अमेरिका के अतिरिक्त यदि भारत अपनी फिल्मों और सेवाओं को अन्य बाज़ारों तक पहुँचाता है तो वह इस झटके को संतुलित कर सकता है।

देखा जाये तो ट्रंप का यह कदम एक बार फिर साबित करता है कि उनकी नीतियों का केंद्र केवल “अमेरिका फर्स्ट” है, भले ही इससे उनके सहयोगी देशों को नुकसान क्यों न हो। भारत जैसे उभरते साझेदार, जिन्होंने दशकों से अमेरिकी तकनीक, मनोरंजन और व्यापार को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है, इस फैसले से प्रत्यक्ष नुकसान उठाएँगे। बॉलीवुड, जो विश्व का सबसे बड़ा फिल्म उद्योग है, अमेरिकी बाज़ार में अपनी स्थिति खो सकता है। भारतीय दर्शकों के लिए टिकट और स्ट्रीमिंग की कीमतें बढ़ेंगी, और निर्माताओं को नए बाजार तलाशने होंगे।

बहरहाल, ट्रंप के लिए यह राजनीतिक सफलता हो सकती है, किंतु वैश्विक सिनेमा के लिए यह कदम विनाशकारी सिद्ध होगा। सवाल यह है कि क्या दुनिया अमेरिकी राष्ट्रवाद के इस नए रूप के आगे झुक जाएगी, या फिर भारतीय सिनेमा समेत वैश्विक फिल्म उद्योग एकजुट होकर इसका जवाब देगा?

-नीरज कुमार दुबे

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