अफगान युद्ध पर 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक खर्च करने के दावे का सच, इस माध्यम से पैसा वापस अमेरिका चला गया

By अभिनय आकाश | Sep 04, 2021

अफगानों के रहनुमा, लोकतंत्र के प्रहरी ‘आतंकवाद के दुश्मन’ जैसे तमगे ओढ़ने वाला अमेरिका पहली फ़ुर्सत में काबुल से रुख़सत हो चुका हैं। अपने इतिहास के सबसे लंबे युद्ध से पीठ दिखाकर अमेरिका वापस लौट चुका है। अमेरिका ने लगातार ये दावे किए कि 20 सालों तक चले युद्ध में अरबों रुपये खर्च करने किए। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस संबोधन में दौरान भी कहा था कि हमने अरबों रुपये खर्च किए। हमने करीब तीन लाख क्षमता वाली अफगान सैन्य बल को प्रशिक्षित किया और हथियार मुहैया कराए। अमेरिका ने अफगानिस्तान में युद्ध पर 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए। प्रतिदिन के हिसाब से देखें तो  ये आंकड़ा 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर बैठता है। बाइडेन ने कहा कि हम इस रकम का अपने देश में विकास कार्यों में इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन आखिर ये पैसा गया कहां? इसका जवाब है इसमें से ज्यादातर राशी वापस अमेरिकी के पास ही चली गई। इसमें से अधिकांश पैसा निजी ठेकेदारों और डिफेंस कंपनियों के माध्यम से वापस अमेरिका के पास ही गया। अमेरिका ने अफगान युद्ध में आउट सोर्ससिंग किया। वो फंडिंग तो कर रही थी लेकिन ज्यादातर कार्य निजी कंपनी के द्वारा ही किया जा रहा था। अमेरिकी निजी कंपनियां सारी चीजों की आपूर्ति कर रहे थे। व्हीकल से लेकर एयरक्रॉफ्ट, एम्युनेशन और यहां तक की अफगान सैनिकों को ट्रेनिंग का काम भी इन्हीं के जिम्मे था। इन कामों के बदले उन्हें पैसे भुगतान किए जा रहे थे। ऐसे में अमेरिकी ने पैसे तो दिए लेकिन वो पैसे घूम फिरकर अमेरिका में ही वापस आ गए। शीर्ष अमेरिकी हथियार डीलरों को 2001 से 2021के बीच सार्वजनिक धन में 2 ट्रिलियन डॉलर मिले।

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 टॉप 5 मिलिट्री कॉन्ट्रैक्टर

लॉकहीड मार्टिन

इस कंपनी के शेयर में दस हजार डॉलर का मूल्य अब 133,559.21 डॉलर है। दुनिया के सबसे बड़े रक्षा ठेकेदार के रूप में जाना जाने वाला, लॉकहीड अपने ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों के लिए जाना जाता है, जिनका व्यापक रूप से अफगान युद्ध में उपयोग किया गया है। कंपनी के लिए बड़ी रकम F-35 स्टील्थ फाइटर (मौजूदा बजट में अकेले 12 बिलियन डॉलर) के अनुबंधों से आई है।

रेथियॉन

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रक्षा ठेकेदार, रेथियॉन में जिसने भी 2001 में 10 हजार निवेश किए आज उसके पास 43,166.92 है। यह कंपनी केविल हथियारों से ही पैसे नहीं अर्जित करती है बल्कि प्रशिक्षण देने का ठेका भी लेती है। रेथियॉन इंटेलिजेंस एंड स्पेस ने 2020 में अफगानिस्तान वायु सेना के पायलटों को प्रशिक्षित करने के लिए अमेरिकी सेना के साथ 145 मिलियन डॉलर के एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।

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जनरल डायनमिक्स

जनरल डायनेमिक्स पर कुल लॉन्ग वॉर रिटर्न 625.37 प्रतिशत से अधिक का लाभांश हासिल किया। 2001 में इसमें 10 हजार निवेश करने वाले ने 2020 में 72,515.58 डॉलर हो गए हैं। जनरल डायनेमिक्स के लिए, अफगान युद्ध विशेष रूप से लाभदायक था क्योंकि मरीन के एलएवी -25 हल्के बख्तरबंद वाहन का व्यापक रूप से उपयोग किया गया था। इसके अतिरिक्त, जीडी ने संचार, आईटी, और साइबर सुरक्षा उत्पादों और सेवाओं को भी प्रदान किया है।

नॉर्थ्रॉप ग्रुमन कॉर्प

1939 की इस कंपनी ने 129,644.84 पर कुल 1,196.14 प्रतिशत से अधिक का लाभांश हासिल किया। 2019 में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने डेटा जारी किया जिसमें दिखाया गया था कि उसने 29.22 अरब डॉलर कमाए। दुनिया के बड़े हथियार निर्माताओं में शामिल यह कंपनी समुद्र, जमीन और हवा में मार करने वाले हथियार बनती है जिसमें ड्रोन, जंगी विमान, चेन गन, मिसाइल डिफेंस सिस्टम आदि बनाती है। इसने अमेरिकी सेना को बड़े पैमाने पर ड्रोन दिए हैं।

बोइंग

अगर किसी ने 2001 में बोइंग स्टॉक में 10 हजार डॉलर का निवेश किया होता, तो आज इसकी कीमत 107,588.47 डॉलर होती। बोइंग अधिकांश वाणिज्यिक एयरलाइनरों के जरिये कमाई करता है। ये कंपनी B-1 बॉम्बर, B-52s, C-17 कार्गो जेट, V-22 ऑस्प्रे वर्टिकल टेकऑफ़ विमान और F-15 और F-18 विमान बनाती है। बी-1 बांबर का इस्तेमाल अफगानिस्तान में धड़ल्ले से हुआ।

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ये आंकड़े ये बताने के लिए काफी हैं कि अफगान की सैन्य कार्रवाई 20 सालों तक क्यों चली। क्योंकि इस युद्ध का सीधा सा मतलब था शुद्ध मुनाफा। पेंटागन की तरफ से अफगान आर्मी की मदद के लगातार दावे किए जा रहे थे। लेकिन वास्तविकता ये है कि अमेरिकन टेक्नलॉजी से य़ूएस ने अफगानिस्तान के लड़ाकों को  लैस कर दिया। सभी के सभी अमेरिकी ठेकेदारों से खरीदे गए। ये एक हथियारों के सौदागरों, राजनेता और व्हाइट हाउस का नेक्सेस है। विकिलिक्स के फाउंडर जूलियस असांजे ने अफगान युद्ध का जिक्र करते हुए आज से दस साल पहले 2011 में ही दावा किया था कि अफगानिस्तान युद्ध की आड़ में हथियारों के सौदागरों को मुनाफा पहुंचाने का ये पूरा खेल है।