By रेनू तिवारी | Aug 03, 2026
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को घटी दो अलग-अलग घटनाओं ने पुरानी इमारतों की सुरक्षा और अग्निशमन संबंधी तैयारियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के न्यू उस्मानपुर इलाके में छत गिरने से एक पति-पत्नी की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनका छोटा बेटा खुशकिस्मती से बाल-बाल बच गया। वहीं, दूसरी घटना पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन की है, जहाँ एक चार मंजिला रिहायशी इमारत में आग लगने पर दो महिलाओं और एक तीन साल की बच्ची ने साड़ी का सहारा लेकर नीचे उतरकर अपनी जान बचाई। इन दोनों घटनाओं ने राष्ट्रीय राजधानी के घनी आबादी वाले इलाकों में पुरानी रिहायशी इमारतों की मज़बूती और आग से निपटने की तैयारियों को लेकर फिर से चिंता बढ़ा दी है।
पुलिस के मुताबिक, यह घटना न्यू उस्मानपुर थाना क्षेत्र के जेपी नगर में रात करीब 10 बजे हुई। एक मंज़िला घर की छत का स्लैब अचानक गिर गया, जिससे एक दंपत्ति मलबे के नीचे दब गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे। पीड़ितों को मलबे से निकालकर पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। घटना के समय घर के अंदर मौजूद दंपत्ति का बच्चा सुरक्षित बच गया।
पीड़ितों की पहचान टिंकू और उर्मिला के तौर पर हुई
मृतकों की पहचान 32 वर्षीय टिंकू और उनकी 30 वर्षीय पत्नी उर्मिला के रूप में हुई है। यह हादसा गनवारी एक्सटेंशन में हंसराज डेयरी के पास किराए के मकान में हुआ, जहां यह दंपत्ति रह रहा था।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले टिंकू दिल्ली में हलवाई का काम करते थे। पुलिस ने बताया कि छत का स्लैब गिरने का सही कारण अभी पता नहीं चल पाया है और मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि इमारत एक मंज़िला थी। अगर यह बहुमंज़िला इमारत होती, तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था।
राजौरी गार्डन में आग से तीन लोग (बच्चे समेत) सुरक्षित निकले
एक अन्य घटना में, रविवार शाम राजौरी गार्डन की चार मंज़िला रिहायशी इमारत में आग लगने के बाद तीन लोग (जिनमें तीन साल की बच्ची भी शामिल थी) सुरक्षित बच निकले। दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के एक अधिकारी के मुताबिक, हरि नगर पुलिस स्टेशन इलाके में मौजूद एक बिल्डिंग में आग लगने की खबर शाम करीब 4.10 बजे मिली। मौके पर पांच फायर टेंडर भेजे गए और शाम करीब 4.40 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया।
रहने वालों ने साड़ी का इस्तेमाल करके नीचे उतरकर जान बचाई
फायरफाइटर्स के बिल्डिंग तक पहुँचने से पहले, 62 और 32 साल की दो महिलाओं और एक तीन साल की बच्ची ने साड़ी को रस्सी की तरह इस्तेमाल करके दूसरी मंज़िल से नीचे उतरकर धुएं से भरी बिल्डिंग से सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाबी हासिल की। DFS अधिकारियों ने बताया कि आग बेसमेंट में बने एक शाफ़्ट में लगी थी, जहाँ काफ़ी मात्रा में कचरा जमा था। आग की लपटें और घना धुआँ लगभग 300 वर्ग गज में बनी इस रिहायशी बिल्डिंग की पहली, दूसरी और तीसरी मंज़िल के कुछ हिस्सों तक फैल गया था।