पंजाब में सरकारी इमारत पर लहराया गया खालिस्तानी झंडा: NIA कोर्ट ने पन्नू के इशारे पर काम करने वाले दो दोषियों को भेजा जेल

By रेनू तिवारी | May 01, 2026

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की एक विशेष अदालत ने देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाले एक गंभीर मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साल 2020 में पंजाब के मोगा स्थित उपायुक्त (DC) कार्यालय पर खालिस्तानी झंडा फहराने के जुर्म में दो आरोपियों को पांच साल छह महीने के कारावास की सजा सुनाई है।एनआईए ने एक बयान में कहा कि मोहाली के एसएएस नगर में स्थित अदालत ने मोगा के निवासी आरोपियों इंदरजीत सिंह और जसपाल सिंह को पांच साल छह महीने की सजा सुनाई और 16-16 हजार रुपये जुर्माना लगाया।

एनआईए ने इससे पहले इन दोनों के साथ गिरफ्तार दो अन्य आरोपियों और अमेरिका में रहने वाले दो फरार आरोपियों पन्नू व उसके सहयोगी राणा सिंह उर्फ हरप्रीत सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। मोहाली की विशेष अदालत ने 2021 में पन्नू और हरप्रीत को इस मामले में भगोड़ा घोषित किया था। इंदरजीत और जसपाल ने 14 अगस्त 2020 को स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले मोगा के उपायुक्त कार्यालय पर खालिस्तानी झंडा फहराया था। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों आरोपी पन्नू के उकसावे पर प्रशासनिक परिसर में घुसे, इमारत पर चढ़े और ‘खालिस्तान’ लिखा हुआ केसरिया-पीला झंडा फहराया।

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एनआईए के अनुसार, उन्होंने राष्ट्रध्वज का भी अपमान किया था। एनआईए की जांच में सामने आया कि हरप्रीत ने इस काम के लिए इंदरजीत और जसपाल को पैसे दिए थे। बताया गया है कि पन्नू ने 10 और 11 अगस्त 2020 के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर पंजाब और हरियाणा के लोगों से खालिस्तानी झंडे फहराने की अपील की थी। एनआईए के अनुसार, पन्नू ने लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने के लिए किसी भी भारतीय युवक को 1,25,000 अमेरिकी डॉलर और किसी भी सरकारी कार्यालय पर झंडा फहराने के लिए 2,500 डॉलर का ईनाम देने की घोषणा की थी।

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