महाराष्ट्र में एमवीए के सत्ता में दो वर्ष पूर, चुनौतियों के बावजूद स्थिर रहा गठबंधन

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 25, 2021

मुंबई। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के 27 नवंबर को सत्ता में दो साल पूरे हो जाएंगे। यह सरकार कोरोना वायरस महामारी के बीच विभिन्न मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद स्थिर रही। ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उसके पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) एवं कांग्रेस का अप्रत्याशित गठबंधन घटक दलों के अलग-अलग वैचारिक झुकाव, मराठा आरक्षण जैसे अनसुलझे पेचीदा मुद्दों और आक्रामक भाजपा के बावजूद स्थिर बना हुआ है।

इसे भी पढ़ें: सलमान खान के खानदान की बहू बनने जा रही हैं शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी सोनाक्षी सिंहा! पहला प्यार से उठा पर्दा

महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि चूंकि अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई, नई बड़ी परियोजनाओं को रोक दिया गया और तटीय सड़क, मुंबई-नागपुर एक्सप्रेस-वे जैसी चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सरकार ने खुद को तब एक मुश्किल स्थिति में फंसा पाया जब उच्चतम न्यायालय ने अलग-अलग मामलों में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मराठा समुदाय के लिए शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए स्थानीय निकायों में आरक्षण को दरकिनार कर दिया। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ठाकरे सरकार पर मराठा आरक्षण के समर्थन में अपना पक्ष रखने में विफल रहने का आरोप लगाया। सरकार ने यह मांग करते हुए गेंद भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के पाले में डालने की कोशिश की कि वह समग्र आरक्षण को 50 प्रतिशत से अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए एक संवैधानिक संशोधन करे। महामारी की दूसरी लहर के बीच तब एक राजनीतिक विवाद शुरू हुआ जब उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास के पास एक वाहन में विस्फोटक पदार्थ रखा मिला।

इसको लेकर रहस्य तब और गहरा गया जब ठाणे के व्यवसायी मनसुख हिरन मृत पाए गए। हिरन ने दावा किया था कि उक्त वाहन उनके पास से चोरी हो गया था। इसके चलते पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की गिरफ्तारी हुई और आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस के आयुक्त के पद से स्थानांतरित कर दिया गया। सिंह ने राज्य के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। राकांपा नेता देशमुख ने आरोपों से इनकार किया लेकिन उन्हें पद छोड़ना पड़ा और उनके खिलाफ सीबीआई जांच शुरू हुई। शुरुआत में सरकार यह नहीं समझ पा रही थी कि वह इस पर कैसे प्रतिक्रिया दे लेकिन उसने सिंह के आरोपों की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया। दूसरी ओर, सिंह के खिलाफ जबरन उगाही के लिए मामला दर्ज किया गया।

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त सिंह को जबरन वसूली के मामलों में भगोड़ा घोषित किया गया और पूर्व गृह मंत्री देशमुख को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किया गया। एमवीए मंत्रियों और नेताओं से जुड़ी संपत्तियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग की छापेमारी के बाद यह आरोप लगाये गए कि भाजपा राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। भाजपा को 2019 के विधानसभा चुनावों में सबसे अधिक सीटें हासिल हुई थीं। मुंबई तट के पास एक क्रूज़ पोत से मादक पदार्थ बरामदगी मामले में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि बाद में राज्य के मंत्री नवाब मलिक ने स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) और इसके मुंबई के क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े पर यह आरोप लगाया कि वे निर्दोषों को फंसा रहे हैं। मलिक के आरोपों को तब और बल मिला जब एक गवाह ने यह आरोप लगाया गया कि आर्यन खान को छोड़ने के बदले पैसे वसूलने का प्रयास किया गया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि राकांपा नेता के आरोप सुर्खियां बने, वहीं विपक्षी भाजपा विमर्श को बदलने को लेकर संघर्ष करती दिखी। कोविड-19 के मामलों में कमी और दूसरी लहर के चरम के दौरान दिल्ली एवं कुछ उत्तरी राज्यों में देखी गई स्थिति से बचने में सरकार की सफलता एमवीए सरकार के लिए एक तरह से ‘प्लस प्वाइंट’ थी।

हालांकि मराठा आरक्षण और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के उलझे मुद्दे बने हुए हैं और सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। अगले साल की शुरुआत में दस नगर निगमों, 27 जिला परिषदों और 300 से अधिक ग्राम पंचायतों के चुनाव होने जा रहे हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एमवीए भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मुकाबला पेश करने में सफल होता है। महाराष्ट्र की राजनीति में अपना दबदबा दोबारा हासिल करने की कोशिश में जुटी कांग्रेस स्थानीय निकाय चुनाव गठबंधन में लड़ने के पक्ष में नहीं है। शिवसेना और राकांपा के बीच स्थानीय स्तर पर मुकाबला मुख्यमंत्री ठाकरे और राकांपा प्रमुख शरद पवार के राजनीतिक कौशल की परीक्षा हो सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि दूसरी ओर गठबंधन का स्थायित्व 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के लिए एक नमूना पेश कर सकता है।

प्रमुख खबरें

बंगाल में BJP की प्रचंड जीत पर गदगद ट्रंप, हैरान हुआ बांग्लादेश!

जिनपिंग से मेरी अच्छी पटती है, Trump ने China पहुंचने से पहले खेला दांव!

हिंदुस्तान में ब्लास्ट होते रहते हैं, कौन सी नई बात है… Punjab Blasts पर Farooq Abdullah का विवादित बयान

3 Idiots Sequel | Vicky Kaushal बनेंगे चौथे इडियट? Aamir Khan की कल्ट क्लासिक के सीक्वल पर बड़ा अपडेट