By नीरज कुमार दुबे | Sep 17, 2026
जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ सुरक्षा बलों ने एक साथ दो मोर्चों पर बड़ा प्रहार किया है। उधमपुर में रातभर चले अभियान में दो आतंकियों को मार गिराया गया, जबकि इससे ठीक पहले राजौरी में आतंकियों को रसद, सुरक्षित रास्ता और जमीनी मदद पहुंचाने वाले तीन संदिग्ध मददगारों को गिरफ्तार कर एक आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया गया था। इन कार्रवाइयों से पीर पंजाल क्षेत्र में आतंक के खिलाफ सुरक्षा तंत्र की लगातार कसती पकड़ साफ दिखाई दे रही है।
हम आपको बता दें कि रात करीब नौ बजे मजालता के दूरदराज ब्रत्तल सोन और खुब्बन इलाकों में तलाशी अभियान शुरू हुआ। अभियान शुरू होने के कुछ ही समय बाद जंगल से गोलियों और विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं। सुरक्षा बलों ने संदिग्ध ठिकाने को निशाना बनाकर कार्रवाई की। इसके बाद रातभर इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी रही। गुरुवार सुबह आतंकियों ने घेरा तोड़कर भागने के इरादे से सुरक्षा बलों पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी। जवाब में जवानों ने भीषण कार्रवाई की और मुठभेड़ शुरू हो गई।
कई घंटे चली इस मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए। घटनास्थल से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं। मारे गए आतंकियों की पहचान और उनके संगठन से संबंधों का पता लगाया जा रहा है। सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी और निगरानी अभियान जारी रखा है, ताकि जंगल में छिपे किसी अन्य खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
लेकिन उधमपुर की कार्रवाई को अकेली घटना मानना तस्वीर को अधूरा छोड़ देगा। इसके पीछे पीर पंजाल क्षेत्र में आतंक के पूरे तंत्र पर चल रही लगातार कार्रवाई की बड़ी कड़ी जुड़ी हुई है। 15 सितंबर को राजौरी पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा से कथित रूप से जुड़े आतंक समर्थक नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों जाकिर हुसैन, मोहम्मद आजम और मोहम्मद मुश्ताक, को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, ये लोग आतंकियों को रसद, सुरक्षित आवागमन और अन्य जमीनी सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ मार्गदर्शक के रूप में भी काम कर रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आतंकियों के समूहों को कश्मीर घाटी की ओर पहुंचाने में मदद की थी। पुलिस को संदेह है कि इन लोगों ने कई चर्चित आतंकी हमलों से जुड़े आतंकियों को भी जमीनी सहायता उपलब्ध कराई। इनमें नागरिकों को निशाना बनाने वाला हमला भी शामिल बताया गया है।
सबसे गंभीर खुलासा तब हुआ जब एक आरोपी की निशानदेही पर एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह विस्फोटक आतंकी संगठन के सदस्यों ने सुरक्षित रखने और संभावित लक्षित हमले में इस्तेमाल के लिए आरोपियों को सौंपा था। इस बरामदगी ने जांच एजेंसियों को आतंक के व्यापक नेटवर्क तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण सुराग दिए हैं।
यानी तस्वीर साफ है कि सुरक्षा बल केवल जंगल में छिपे हथियारबंद आतंकियों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि आतंक की उस पूरी जड़ पर चोट कर रहे हैं जो स्थानीय मदद, सुरक्षित ठिकानों, मार्गदर्शकों, रसद और विस्फोटकों के जरिए आतंकियों को सहारा देती है। उधमपुर में दो आतंकियों का खात्मा और राजौरी में तीन संदिग्ध मददगारों की गिरफ्तारी इसी व्यापक कार्रवाई की दो महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। तलाश अभी जारी है और सुरक्षा बलों का अभियान तब तक थमने वाला नहीं है, जब तक इलाके में मौजूद हर संभावित आतंकी खतरे और उसके मददगार तंत्र की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ जाती।