अब हफ्ते में 5 दिन ही खुलेंगे बैंक? रातों-रात ऐसा क्या हुआ, 3-Day Bank Strike क्यों टाल दी गई

By अभिनय आकाश | Sep 28, 2026

पिछले सात दिनों से पूरे देश के सीने पर एक भारी सस्पेंस लटका हुआ था। एक ही चेतावनी, एक ही डर कि 28, 29 और 30 सितंबर यानी लगातार 72 घंटे तक देश के बैंकों का दिल धड़कना बंद कर देगा! शटर नहीं उठेंगे, तिजोरियों पर ताले लटके रहेंगे और 30 सितंबर की महा-क्लोज़िंग के बीच देश की पूरी वित्तीय व्यवस्था वेंटिलेटर पर आ जाएगी। हमारे पिछले एमआरआई के एपिसोड में भी हमने इस आने वाले तूफ़ान की एक-एक आहट से आपको रूबरू कराया था। लेकिन फिर घड़ी की सुइयां रात के साढ़े नौ बजाती हैं। रविवार की रात जब पूरा देश सोने की तैयारी कर रहा था, ठीक उसी वक्त परदे के पीछे एक ऐसी बाज़ी पलटी जाती है, जिसने सबको सन्न कर दिया! अब देश की जनता और करोड़ों खाताधारकों के मन में सीधा सवाल यह कौंध रहा है कि आखिर रविवार की आधी रात को ऐसी कौन सी बातचीत हुई? बंद कमरों में ऐसा क्या समझौता हुआ कि जो यूनियंस आर-पार की जंग के मूड में थीं, जो कर्मचारी आक्रोश में सड़कों पर उतरने को तैयार थे, उन्होंने आखिरी वक्त में अपने कदम पीछे क्यों खींच लिए? क्या सरकार ने कर्मचारियों की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी मांग यानी '5-डे बैंकिंग' को आखिरकार मंजूरी दे दी है? क्या अब हर शनिवार को देश की सभी बैंक शाखाएं पूरी तरह बंद रहेंगी? या फिर सरकार ने कर्मचारियों की दुखती रग पर हाथ रखकर कोई ऐसा दांव चल दिया, जिसे यूनियनें झेल नहीं पाईं? सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न अगर शनिवार की छुट्टी पर कोई फैसला हुआ ही नहीं, तो फिर ऐन वक्त पर यह हड़ताल वापस क्यों ली गई? क्या यह बैंक कर्मचारियों की कोई बड़ी रणनीतिक बढ़त है, ग्राहकों के हित में लिया गया फैसला है या फिर सरकार और यूनियनों के बीच केवल वक्त हासिल करने की कोई अंदरूनी चाल? आज के एपिसोड में हम बैंक हड़ताल टलने के पीछे की इनसाइड स्टोरी, आधी रात को बने समझौतों और आपके बैंक जाने से जुड़े हर नियम का एमआरआई स्कैन करेंगे।

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मांग को कर्माचरियों और ग्राहकों के नजरिए से समझें


बैंक कर्मचारी से अगर आप पूछिए तो उसका कहना होगा कि बैंक का काम केवल बैंक की शाखा का शटर गिरते ही समाप्त नहीं होता। ग्राहकों से जुड़े काम की रिपोर्टिंग, लक्ष्य और दूसरी जिम्मेदारियां भी होती हैं। यूनियंस का तर्क है 5 दिन के कार्य सप्ताह पर गंभीरता से फैसला होना चाहिए। कर्मचारी बेहद दबाव में काम कर रहे हैं।  अब ग्राहक से पूछिएगा जो सोमवार से शुक्रवार अपनी नौकरी करता है और उसके लिए शनिवार बैंक जाकर काम निपटाने का एक सुविधाजनक दिन हो सकता है। सरकार ने भी इसी बात को अपनी सार्वजनिक अपील में उठाया था कि बचे हुए शनिवार बहुत से ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाएं लेने का मौका है। यह सरकार का पक्ष है। सवाल केवल कर्मचारियों की छुट्टी का नहीं रह जाता। सवाल यह भी है कि अगर बैंक का कार्य सप्ताह बदले तो ग्राहकों की पहुंच कैसे बनी रहेगी? 

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बैठक में क्या तय हुआ 


बातचीत के बाद बैंक यूनियनों ने हड़ताल वापस लेने का ऐलान किया। यूएफबीयू कई बैंक कर्मचारी और अधिकारियों के संगठनों का ग्रुप है। यूएफबीयू ने सात बैंक यूनियन की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया है। जिसमें कहा है कि आईबीए और यूएफबीयू की एक हाई लेवल कमेटी तुरंत बनाई जाएगी। यह कमेटी बाकी शनिवार को छुट्टी देने के मुद्दे पर बात करेगी। कमेटी सभी संभावित विकल्पों पर विचार करेगी। अलग-अलग पक्षों से बात करेगी और ऐसा रास्ता निकालेगी और या निकालने की कोशिश करेगी जो बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ ग्राहकों के लिए भी ठीक हो। बैंक यूनियंस की एक बड़ी मांग थी। यह मांग स्केल फोर और उससे ऊपर के बैंक अधिकारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक इंसेंटिव यानी काम के आधार पर मिलने वाली इंसेंटिव की योजना से जुड़ी है। यूनियनों ने इस योजना को वापस लेने की मांग की थी। इस पर भी बातचीत आगे बढ़ाने की बात हुई है। यूएफबीयू के मुताबिक आईबीए सरकार के सामने इस योजना के बदलाव का प्रस्ताव रखेगा ताकि यूनियनों की मांगों को ध्यान में रखा जा सके। इसके बाद जो मुद्दे बचेंगे उन पर दोनों पक्ष बातचीत करेंगे और जल्द कोई हल निकालने की कोशिश होगी।

हड़ताल इतनी अहम क्यों थी? 


हड़ताल 28 से 30 सितंबर तक होनी थी। 30 सितंबर बैंकों के लिए हाफ ईयर क्लोजिंग का दिन होता है। इस दिन बैंक में कई जरूरी काम निपटाए जाते हैं। जैसे खातों का हिसाब मिलाना, पैसों का मिलान करना, जरूरी रकम का इंतजाम करना और ट्रेजरी और मार्केट से जुड़े काम पूरे करना। अगर 28 से 30 सितंबर तक बैंक बंद रहते हैं तो उससे ठीक पहले शनिवार और रविवार सैटरडे संडे भी पड़ रहा था। ऐसे में बैंकिंग सेवाएं लगातार 5 दिन तक प्रभावित हो सकती थी। इसी वजह से वित्त मंत्रालय ने 21 सितंबर को बैंक कर्मचारियों से हड़ताल पर नहीं जाने की अपील की थी। मंत्रालय ने कहा था कि हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी। लोगों को परेशानी होंगी और बैंकों के कामकाज पर भी असर पड़ेगा। मंत्रालय के मुताबिक इसका नुकसान आखिरकार बैंक कर्मचारियों के हितों पर भी पड़ सकता है। इसके बाद 23 सितंबर को वित्त मंत्रालय ने पब्लिक सेक्टर बैंकों और रीजनल रूरल बैंकों को निर्देश दिया था कि 27 सितंबर यानी रविवार को भी बैंक खुले रहेंगे।


रविवार को काम का अतिरिक्त वेतन और अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी


यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) द्वारा देर रात जारी किए गए आधिकारिक सर्कुलर से एक और बड़ी बात सामने आई है। वित्त मंत्रालय के निर्देश पर रविवार, 27 सितंबर को जिन बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने शाखाओं में जाकर काम किया, उनके मुआवजे पर भी सहमति बन गई है। सर्कुलर के मुताबिक, रविवार को काम करने वाले क्लेरिकल और सब-स्टाफ कर्मचारियों को बायपार्टाइट समझौते के तहत दोगुना ओवर-टाइम (Double OT) भत्ता दिया जाएगा, जबकि अधिकारियों को इसके एवज में एक दिन का अतिरिक्त वेतन मिलेगा। गौरतलब है कि यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर की हड़ताल के बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का भी नोटिस दे रखा था। इस समझौते में 5-डे बैंकिंग और पीएलआई (PLI) के अलावा 8 मार्च 2024 से अटके पुराने मुद्दे जैसे एनपीएस से ओपीएस (OPS), पेंशन अपडेशन और नई भर्तियों के समाधान पर भी तेजी से बात करने पर सहमति बनी है।

पांच दिन काम की मांग आखिर आई कहां से? 

यह जो पूरा विवाद है कि पांच दिन काम हो और दो दिन छुट्टी मिले। ये बात आई कहां से? बैंक यूनियनों का कहना है कि पहले बैंक सोमवार से शुक्रवार तक काम करते थे और शनिवार को आधे दिन का काम होता था। साल 2015 में हुए एक समझौते के बाद महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी कर दी गई यानी कि सेकंड सैटरडे लेकिन बाकी शनिवार अभी भी पूरे दिन कामकाजी होते हैं। अब यूएफबीयू चाहता है कि बाकी शनिवार को भी छुट्टी मिले। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यूनियन का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार के दफ्तरों, आरबीआई, LIC, प्राइवेट कंपनियों, स्टॉक मार्केट, मनी मार्केट और विदेशी मुद्रा बाजार में पहले से 5 दिन का काम होता है। अभी तीन दिन की बैंक हड़ताल टल गई है। लेकिन 5 दिन काम और दो दिन छुट्टी की मांग पर आखिरी फैसला अभी नहीं हुआ है।  ना इसे मंजूरी मिली है और ना ही कहा जा सकता है कि विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो गया है। 


हड़ताल टालने के लिए किया गया रेडिमेड उपाय तो नहीं ?


समिति कब बनती है? बैठक कब करती है? ग्राहकों की सुविधा के लिए क्या प्रस्ताव रखती है?  उसके बाद सरकार और संबंधित संस्थाएं इस पर क्या निर्णय लेती हैं? यही तीन कदम बताएंगे कि रविवार रात की बातचीत किसी स्थाई समाधान की शुरुआत थी या केवल हड़ताल को रुकवाने के लिए किया गया एक रेडीमेड उपाय था। इस पूरी कहानी को एक वाक्य में समझें तो बैंक हड़ताल टली है। 5 दिन की बैंकिंग पर अभी कोई फाइनल मुहर नहीं लगी। रविवार रात आईबीए और यूनियंस के बीच बातचीत से एक उच्च स्तरीय समिति बनाने और अंतिम तौर पर जो दूसरे लंबित मुद्दे हैं उन पर चर्चा के लिए केवल सहमति बनी है और इसी के बाद यूनियंस ने प्रस्तावित हड़ताल वापस ले ली है। ग्राहकों को तत्काल राहत मिली है। लेकिन शनिवार की बैंकिंग के अंतिम फैसले पर फाइनल मुहर लगनी बाकी है। 

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