5 दिन बैंक बंद! कर्मचारियों के साथ ऐसा क्या हुआ? मेगा हड़ताल पर आ गए सभी, वजह जानकर आप भी चौंक जाएंगे

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अभिनय आकाश । Sep 24 2026 1:23PM

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह और पुरानी पेंशन योजना की मांग को लेकर 28 से 30 सितंबर तक देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। सप्ताहांत के साथ मिलकर यह हड़ताल पांच दिनों तक शाखाओं के कामकाज को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इस दौरान एटीएम, यूपीआई और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह चालू रहेंगी।

अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति थॉमस जैफर्सन ने बैंक्स और फाइनेंशियल स्टैब्लिशमेंट को देश की बॉर्डर पर तैनात आर्मी से भी ज्यादा खतरनाक बताया था। बात सही भी है। सरकारों को अपने प्रशासन, डिप्लोमेसी और युद्ध तक चलाने के लिए बैंक्स और कर्ज की जरूरत पड़ती ही हैं। जैफर्सन का इशारा इस बात पर था कि बैंक सिर्फ पैसे के लेन-देन की जगह नहीं हैं, बल्कि वे पूरे देश की नब्ज और सत्ता की रीढ़ हैं। जब यह रीढ़ कुछ दिनों के लिए भी काम करना बंद कर दे, तो पूरा देश ठहर जाता है। 28 सितंबर से यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) की देशव्यापी हड़ताल इसी हकीकत की याद दिलाती है। फर्ज कीजिए महीने का आखिरी हफ्ता है। आपकी सैलरी आनी है। ईएमआई भी जानी होगी। किसी को चेक जमा करना है। किसी को बैंक से कैश निकालना है। और इसी बीच खबर आती है कि 28, 29 और 30 सितंबर को देश भर में बैंक स्ट्राइक होने वाली है। और कैलेंडर देखिए आप 26 सितंबर को फोर्थ सैटरडे है। बैंक की छुट्टी। 27 सितंबर संडे है बैंक की छुट्टी। और 28, 29 और  30 सितंबर को स्ट्राइक का कॉल है। यानी बैंक ब्रांच से काम करने वाले लोगों के लिए दिक्कत 3 दिन की नहीं लगातार 5 दिन तक खींच सकती है। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने भी कहा है कि वीकेंड के साथ मिलकर यह स्ट्राइक बैंकिंग सर्विज पर 5 दिन जैसा असर डाल सकती है। तो सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बैंक कर्मचारी स्ट्राइक क्यों कर रहे हैं? आपके लिए सवाल है क्या 30 तारीख की सैलरी आएगी? यूपीआई चलेगा या नहीं चलेगा? एटीएम में पैसा मिलेगा या नहीं? चेक क्लियर होगा, ईएमआई कटेगी और आपका कोई जरूरी काम बैंक ब्रांच में अटका हुआ है तो क्या अभी निपटा लेना चाहिए? आखिर ऐसा क्या हो गया है कि लाखों बैंक कर्मचारी काम-काज चोड़कर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर चुके हैं। सरकार इस मुद्दे पर क्या कर रही है? तमाम मामलों का एमआरआई स्कैन करेंगे।

किसने बुलाई हड़ताल और क्यों


बैंक कर्मचारियों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस UFBU ने इस हरताल को बुलाया है। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि बैंक्स में हफ्ते में पांच दिन के काम की व्यवस्था होनी चाहिए और हर शनिवार छुट्टी होनी चाहिए। बैंक यूनियन की मुख्य मांग है कि हफ्ते में सिर्फ पांच दिन बैंक खोलने की व्यवस्ता लागू हो। अभी बैंक हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं लेकिन बाकी दो शनिवार काम होता है। यूनियंस चाहती हैं कि सभी शनिवार को छुट्टी हो और सोमवार से शुक्रवार तक बैंक काम करें। दूसरी बड़ी मांग पीएलआई यानि परफॉर्मेंश लिंक्ड इंसेंटिव की है। इस योजना को वापस लेने की मांग है। सरकार ने फिलहाल इस योजना को स्थगित कर दिया है। नए बैंक कर्मचारियों के लिए न्यू पेंशन स्कीम की जगह ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा पेंशन अपडेट करना, पेंशन पर युनिफॉर्म, डीए पेंशनर्स के लिए मेडिकल इंशोरेंस, प्रीमियम में राहत जैसी कई और मांगे भी है, जिन पर बैंक यूनियन सरकार से एक्शन की डिमांड कर रही है। इससे पहले 11 सितंबर को भी बैंक कर्मियों ने इनी मांगों को लेकर एक दिन की हड़ताल की थी। सरकार से बाचीत भी हुई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलने की वजह से अब वो तीन दिन की हड़ताल पर जा रहा है।

म्युच्युअल फंड,इंशोरेंस प्रोडक्ट भी बेच रहे बैंक कर्मचारी


बैंक कर्मचारियों की जितनी भी मांगे हैं उन में से सबसे बड़ी मांग जिस पर वो टस से मस नहीं होना चाहते वो 5-day वर्किंग है। बैंक कर्मियों के मुताबिक उन पर काम का बहुत जादा बोझ है, जिसके चलते वो ये डिमांड पिछले 10 साल से कर रहे है। बैंक कर्मियों के मुताबिक उनसे सामान्य बैंकिंग ऑपरेशन्स के अलावा भी कई काम कराए जाते सरकार की स्कीम्स लागू करना है। म्युचल फंड्स और इंशोरेंस जैसे प्रोडक्ट को बेचना है। ये भी काम बैंक वाले कर रहे हैं। कर्मचारियों के मुताबिक बैंकों की भर्ती प्रक्रिया बेहद ढीली है। जिसके चलते मैनपावर की कमी हमेशा बनी रहती है। इसी वज़ह से बैंकों में काम करने वाले लोग रोजाना 2-3 घंटे पहले ही ज्यादा  काम करते है। बैंक कर्मचारियों के मताबिक एलआईसी जैसे कई फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स   में 5-day working का नियम है यानी पांच दिन काम होता है तो  बैंक में क्यों पांच दिन नहीं हो सकता। आप दस तरह के काम बैंक कर्मचारियों से करा रहे हैं, तो बैंक कर्मचारी कह रहे हैं कि हम भी तो इंसान हैं, हमारा भी परिवार है। क्या दिनभर सिर्फ नोट ही गिनते रहे। बैंक यूनियन्स के मुताबिक मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स असोसियेशन आईवीए के साथ द्विपक्षीय  समझोता हुआ और इसमें सहमती बनी थी। लेकिन इसे लागू करने के लिए अभी तक सरकार की आधिकारिक मंजूरी और अधिसूचना का इंतजार है। 


बैंक खुद किस तरह की दिक्कत की तैयारी कर रहे हैं 


एसबीआई ने कस्टमर्स के लिए एडवाइज़री जारी की है। बैंक ने कहा कि जो जरूरी बैंकिंग ट्रांजैक्शंस हैं उन्हें स्ट्राइक की तारीखों से पहले पूरा कर लें। कैश चाहिए तो एटीएम का इस्तेमाल करें। ADWM  यानी ऐसी मशीन जहां से कई जगह कैश निकालने के साथ जमा भी किया जा सकता है। बैंक ने कस्टमर सर्विस पॉइंट्स इस्तेमाल करने के लिए भी कहा है और सबसे जरूरी इंटरनेट बैंकिंग, यo, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और दूसरे डिजिटल चैनल्स को प्रेफर करने को कहा है। साथ में यह भी कि स्ट्राइक के दौरान जरूरी बैंकिंग सर्विज चालू रखने की पूरी कोशिश की जाएगी। ऐसे ही कुछ नोटिसेस बैंक ऑफ बौदा, Canरा बैंक, PNB सारे बैंक्स ने निकाले हैं। अगर आपका काम ब्रांच पर डिपेंड करता है बैंक की तो उसे आखिरी दिन के भरोसे मत छोड़िए। इस वक्त यूपीआई बिना किसी दिक्कत के चलेगा। यह स्ट्राइक बैंक कर्मचारियों की है। यूपीआई जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बंद करने का कोई ऐलान नहीं है। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और बैंक एप्स भी नॉर्मल रहेंगे। इसी तरह ऑनलाइन एनईएफटी और आरटीजीएस भी चलते रहने चाहिए। आरबीआई के मुताबिक एनईएफटी पूरे साल 24ों घंटे उपलब्ध है। आरटीजीएस भी 24 घंटे साल के चलता रहता है।

हम 10 दिन का वेतन गंवा सकते हैं, क्या देश 10 दिन बैंक बंदी झेल सकता है?


कर्मचारी यूनियनें हड़ताल के दौरान वेतन कटने के डर को अपनी सबसे बड़ी ताकत में तब्दील करने की अपील कर रही हैं। बैंककर्मियों का स्पष्ट तर्क है कि दो-तीन दिन या दस दिन का वेतन कटने से कर्मचारियों के घरों पर असर जरूर पड़ेगा, लेकिन वे झेल लेंगे। सवाल यह है कि क्या सरकार और देश की अर्थव्यवस्था बैंकों की राष्ट्रव्यापी पूर्ण बंदी को इतने दिन बर्दाश्त कर सकती है? कर्मचारियों का मानना है कि वेतन बचाने के लिए अगर वे आज पीछे हटे, तो उनकी बारगेनिंग पावर खत्म हो जाएगी, इसलिए वे अपनी सामूहिक ताकत दिखाने के मूड में हैं।


संडे को भी खुलेंगे बैंक


देशभर में सभी बैंक इस हफ्ते रविवार को भी खुले रहेंगे। वित्त मंत्रालय ने जानकारी दी है कि RBI ने 27 सितंबर को देश की सभी बैंक शाखाओं, दफ्तरों और एटीएम-लिंक ब्रांचों समेत सभी सर्विसेज को पूरी तरह चालू रखने की मंजूरी दी है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि जनता की जरूरी बैंकिंग जरूरतों पर लंबे समय तक असर न पड़े, इसे सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार, 27 सितंबर को सामान्य रूप से काम करेंगे। रिजर्व बैंक ने सभी शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम-लिंक ब्रांचों और करेंसी चेस्ट्स को इस दिन पूरी तरह चालू रखने की मंजूरी दी है। कर्मचारियों के भीतर सरकार और मैनेजमेंट के उस कदम को लेकर भी तीखा गुस्सा है, जिसके तहत रविवार (27 सितंबर) को शाखाएं या करेंसी चेस्ट खुलवाने की अनुमति ली गई थी। कर्मचारियों का कहना है कि एक रविवार को बैंक खोल देने से हड़ताल का असर कम नहीं होगा। अगर कर्मचारी सड़कों पर डटे रहे, तो हर गुजरते दिन के साथ ग्राहकों, कारोबारियों और पूरी अर्थव्यवस्था का दबाव सरकार पर बढ़ेगा। उनका संदेश साफ है कि जंग सिर्फ एक दिन की छुट्टी या काम की नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और अधिकारों की पहचान कराने की है।  

सरकार का क्या कहना है?

21 सितंबर को सरकार ने कहा कि यूनियंस के साथ कई दौर की बातचीत और कंसिलिएशंस हुई हैं। बाकी मुद्दे बातचीत से हल किए जा सकते हैं और कर्मचारियों को स्ट्राइक से बचना चाहिए ताकि बैंकिंग सर्विज ना रुके। सरकार का दूसरा तर्क है कि शनिवार सिर्फ बैंक कर्मचारी के लिए वर्किंग डे नहीं है। कई कस्टमर्स, कई ग्राहक, आम लोग उसी दिन बैंक जाते हैं। 2015 में दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक हॉलिडे मनाया गया था। लेकिन सरकार का कहना है कि बाकी शनिवार उन लोगों के लिए काम आते हैं जो सोमवार से शुक्रवार नौकरी या किसी दूसरे काम की वजह से ब्रांच नहीं जा पाते। तीसरा और इस बार सरकार का सबसे बड़ा कंसर्न है टाइमिंग। 30 सितंबर को हाफ ईयरली क्लोजिंग है। इस दिन बैंक सिर्फ सामान्य कस्टमर ट्रांजैक्शंस नहीं करते। बैंक अपने रिकॉर्ड्स भी मिलाते हैं। इसलिए फाइनेंस मिनिस्ट्री का कहना है कि इस वक्त स्ट्राइक का असर सिर्फ बैंक काउंटर तक नहीं रहेगा। बिजनेस, सरकारी ट्रांजैक्शन, इंटरनेशनल बैंकिंग तक असर पड़ सकता है। और सरकार सिर्फ अपील भी नहीं कर रही है, तैयारी भी कर रही है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंसियल सर्विज के 21 सितंबर के मेमो के मुताबिक 18 सितंबर को क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की एक मीटिंग हुई। इसके बाद 21 सितंबर को पब्लिक सेक्टर बैंक्स, रीजनल रूरल बैंक्स और आईबीए के अधिकारियों के साथ स्ट्राइक की तैयारी पर चर्चा हुई। फिर होम मिनिस्ट्री से राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइज़री जारी करने में मदद मांगी गई। 

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किस चीज की सुरक्षा के लिए? 


करेंसी चेस्ट यानी वो जगह जहां बैंकों के लिए बड़ी मात्रा में कैश रखा जाता है। चेक क्लियरिंग प्रोसेसिंग सेंटर्स, डाटा सेंटर्स, डाटा रिकवरी सेंटर्स, ट्रेजरी ऑपरेशन, आईटी सेंटर्स, साइबर सिक्योरिटी सेल, एटीएम साथ ही बैंक ब्रांच के आसपास लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने और जो कर्मचारी स्ट्राइक में शामिल नहीं है, उनकी सुरक्षा की बात भी कही गई है। राज्यों से स्ट्राइक से जुड़ी जानकारी और इंटेलिजेंस इनपुट भी मांगे गए हैं। तो सरकार की तैयारी सिर्फ इतनी नहीं है कि किसी तरह बैंक का शटर खुला रहे। कोशिश यह है कि बैंकिंग के पीछे चलने वाली पूरी मशीनरी, कैश, चेक, डाटा, आईटी, ट्रेजरी जितना हो सके वह चलता रहे। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने बैंकों से यह भी कहा है कि एटीएम में इनफ कैश रखा जाए। जरूरी सर्विसेस के लिए बैकअप प्लान रहे और डिजिटल चैनल्स चलते रहें। 

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