ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र भर रहा विकास की नई उड़ान, ऊर्जा-पर्यटन और कौशल विकास से बदली क्षेत्र की तस्वीर

By नीरज कुमार दुबे | Aug 20, 2025

भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र– असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम न केवल अपनी अद्भुत प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक भौगोलिक दुर्गमता, आधारभूत ढाँचे की कमी और विकास योजनाओं के अभाव के कारण यह क्षेत्र अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया। किंतु हाल के वर्षों में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और चहुंमुखी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।

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देखा जाये तो पूर्वोत्तर के विकास की सबसे बड़ी चुनौती रहा है कनेक्टिविटी। सड़क, रेल और हवाई संपर्क की कमी ने निवेश और उद्योग को रोके रखा। मगर DoNER ने "नॉर्थ ईस्ट स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम" (NESIDS) के अंतर्गत सड़कों, पुलों, स्वास्थ्य और शिक्षा के बुनियादी ढाँचे में निवेश बढ़ाया है। साथ ही क्षेत्रीय संपर्क योजना (UDAN) के तहत अब गुवाहाटी, इम्फाल, डिब्रूगढ़, अगरतला जैसे शहरों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली उड़ानें नियमित हो चुकी हैं। सिंधिया के कार्यकाल में हवाई अड्डों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे पूर्वोत्तर पर्यटन और व्यापार का नया केंद्र बन रहा है।

इसके अलावा, पूर्वोत्तर क्षेत्र नदियों, जंगलों और खनिज संसाधनों से संपन्न है। DoNER इन संसाधनों के सतत उपयोग पर बल दे रहा है। जलविद्युत परियोजनाओं को गति दी गई है ताकि न केवल क्षेत्र की बिजली जरूरतें पूरी हों बल्कि अधिशेष बिजली देश के अन्य हिस्सों को भी उपलब्ध कराई जा सके। इसके अलावा, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, विशेषकर सौर और बायोमास, पर आधारित योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

साथ ही DoNER ने हुनर और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को IT, पर्यटन, कृषि-प्रसंस्करण और हस्तशिल्प उद्योगों से जोड़ने का काम किया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुँचाने के लिए ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ जैसी पहलें की गई हैं। इसके अतिरिक्त, सांस्कृतिक मेलों और खेल आयोजनों के जरिये पूर्वोत्तर की पहचान को व्यापक मंच पर प्रदर्शित किया जा रहा है।

देखा जाये तो प्राकृतिक सौंदर्य से संपन्न यह क्षेत्र पर्यटन का स्वर्ग बन सकता है। इसलिए DoNER ने इको-टूरिज़्म, साहसिक पर्यटन और धार्मिक पर्यटन की परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया है। विदेशी निवेशकों और देश के प्रमुख उद्योग समूहों को आकर्षित करने के लिए नॉर्थ ईस्ट ग्रीडेयशन प्रोग्राम और निवेश सम्मेलन भी आयोजित किए गए हैं।

इसमें कोई दो राय नहीं कि विकास तभी संभव है जब शांति और स्थिरता बनी रहे। DoNER, गृह मंत्रालय के साथ समन्वय कर, क्षेत्रीय अशांति को कम करने और स्थानीय युवाओं को मुख्यधारा के विकास से जोड़ने के प्रयास कर रहा है। इसके अलावा, सीमावर्ती गाँवों में आधारभूत ढाँचा सुधारकर और रोजगार के अवसर बढ़ाकर पलायन की समस्या को रोकने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में DoNER ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को नई प्राथमिकता और गति दी है। बेहतर कनेक्टिविटी, ऊर्जा परियोजनाएँ, कौशल विकास, पर्यटन और निवेश, तथा सांस्कृतिक-सामाजिक सशक्तिकरण– इन सबने मिलकर पूर्वोत्तर को भारत की प्रगति की धारा में मजबूती से जोड़ा है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में भी निर्णायक योगदान देगा।

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