By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 26, 2026
(योषिता सिंह) न्यूयार्क, 26 सितंबर भारी ऊर्जा जरूरतों से जूझ रहा भारत लंबे समय से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के तरीकों की खोज कर रहा है और अमेरिका उन मांगों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही। पिछले हफ्ते, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को मंज़ूरी दी।
अधिकारी ने कहा, ‘‘भारत लंबे समय से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। उन्हें बहुत ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत है।’’ उन्होंने कहा, “कांग्रेस के सदस्यों ने खास तौर पर भारत की आलोचना की, इसलिए जाहिर है कि भारत को जवाब देना ही था। हम यह बात समझते हैं।
उनके भी अपने घरेलू समर्थक हैं, जैसे हमारे हैं। इसलिए, इस तरह की गतिविधियों को लेकर कोई मनमुटाव नहीं है।” विधेयक और उस पर भारत की चिंताओं के बारे में ‘पीटीआई-भाषा’ के एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस ने एक विधेयक पारित किया, जिससे राष्ट्रपति ट्रंप को एक नया हथियार मिला। उन्होंने कहा, ‘‘इसका मतलब यह नहीं है कि वह कल ही इसका इस्तेमाल करेंगे, लेकिन उनके पास ऐसा करने का मौका है।
उनका ध्यान इस युद्ध को खत्म करने पर है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर उन्होंने चुनाव प्रचार किया था और शुरू से ही वह इसके लिए समर्पित रहे हैं।’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘हम अपने दोस्तों, खासकर भारत जैसे देशों से इस कोशिश में मदद की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि आपको यह देखना होगा कि यह अधिनियम कैसे लागू होता है।
हालांकि, इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर छूट का व्यापक प्रावधान है, इसलिए आप यह भी सोच सकते हैं कि ऐसी स्थिति आ सकती है जब राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल करें।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘दुर्भाग्य से’’ लंबे समय तक वेनेजुएला और ईरान से आपूर्ति बंद थी, इसलिए ‘‘विकल्प बहुत सीमित थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब, वेनेज़ुएला में राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद सफल अभियान की वजह से हम बेहतर स्थिति में आ रहे हैं, जिससे भारत जैसे देशों को उस बाजार तक पहुंच मिल सकेगी।’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘हम भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक बड़ा ज़रिया भी बनना चाहते हैं। हम अपने हाइड्रोकार्बन निर्यात को बढ़ा रहे हैं।’’ उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका अब एलपीजी का सबसे बड़ा और एलएनजी का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। अधिकारी ने कहा, ‘‘मांग बहुत ज़्यादा है और तेल की जरूरत भी है।
हम विकल्प तलाश रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच वार्ता समेत इस तरह की बातचीत अक्सर होती रहती है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। अधिकारी ने कहा, ‘‘लेकिन मैं कहूंगा कि युद्ध से पहले ही भारत लंबे समय से ऊर्जा के मामले में विविधता लाने की कोशिश कर रहा था। यह कोई नई बात नहीं है।
हमें बस इस प्रक्रिया को और तेज़ करने की ज़रूरत है।