चीनी समान पर भारत से भिड़ा अमेरिका, ट्रंप के सलाहकार अब कौन सी रिपोर्ट लेकर आ गए?

By अभिनय आकाश | Aug 14, 2026

अमेरिका ने भारत को लेकर एक बड़ा आरोप लगाया है। व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट में भारत को शैडो ट्रांसिपमेंट नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है। जिसके जरिए कथित तौर पर चीन के ऊंचे अमेरिकी टैरिफ वाले सामान को तीसरे देशों के रस्ते अमेरिकी बाजार तक पहुंचाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन देशों में कम टेरिफ का फायदा उठाकर चीनी सामान को इस तरह दोबारा रूट किया गया कि उसकी असली उत्पत्ति छिपी रहे और अमेरिकी शुल्क से बचाया जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो की तैयार रिपोर्ट द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम में संभावित अवैध ट्रांसशिप का अनुमान करीब 60 अरब डॉलर लगाया गया है। इस रिपोर्ट का दावा है कि इस व्यवस्था के कारण अमेरिकी सरकार को टेरिफ से मिलने वाले राजस्व में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ और रिपोर्ट में कहा गया कि जिन देशों पर चीनी सामान की री-रूटिंग के जरिए अमेरिकी कानून से बचने में मदद करने का आरोप है उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। इनमें तत्काल माल रोकना, दंडनात्मक टेरिफ लगाना, प्रतिबंध और जरूरत पड़ने पर अमेरिकी बाजार तक पहुंच खत्म करने जैसे कदम शामिल है। 

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उस समय ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ बढ़ते अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने के लिए चुनिंदा चीनी उत्पादों पर सेक्शन 301 के तहत टेरिफ लगाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद चीनी निर्यातकों ने सामान को सीधे चीन से अमेरिका भेजने के बजाय तीसरे देशों के रास्ते भेजना शुरू किया। इन जगहों पर सीमित असेंबली, फिनिशिंग, रिककैपिंग, रीलेबलिंग या दस्तावेजों में बदलाव के जरिए सामान का मूल देश अलग दिखने की स्थिति बनाई जा सकती थी। इस रिपोर्ट में भारत के पुणे, गुजरात चेन्नई कॉरिडोर का जिक्र किया गया। इसमें दावा किया गया कि इलेक्ट्रिक पंप और कंप्रेसर जैसी चीनी सामान की ट्रांसिपमेंट से इस कॉरिडोर को आर्थिक फायदा हुआ। जबकि अमेरिका के ओहायो राज्य के डेटन और कोलंबस जैसे शहर में मौजूद निर्माताओं को नुकसान हुआ। इस रिपोर्ट का सामने आना ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार को लेकर तनाव बना हुआ है। 

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रिपोर्ट जारी होने से छ दिन पहले अमेरिकी सेनेट ने एक ऐसा बिल को 8611 वोटों से मंजूरी दी थी जिसमें रूस से तेल, गैस और अन्य निर्यात खरीदने वाले देशों पर 100% टेरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। इस बिल में भी चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़र-बैजान को संभावित निशाने के तौर पर शामिल किया गया। इसके प्रायोजकों ने कहा कि इसकी दर इतनी ऊंची होनी चाहिए कि चीन और भारत रूसी तेल खरीद ना पाएं। हालांकि भारत अमेरिका का तनाव और भी वजहों से बढ़ा हुआ है। 

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