Trump Administration की कार्रवाई पर US Court की टिप्पणी, Israel-Gaza विवाद पर विरोध करना मौलिक अधिकारों का हिस्सा

By Ankit Jaiswal | Aug 30, 2026

अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर ट्रंप प्रशासन को अदालत से बड़ा झटका लगा है। कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत ने कहा है कि इजरायल और गाजा युद्ध को लेकर सरकार की आलोचना करने वाले गैर-अमेरिकी नागरिकों को निर्वासन की कार्रवाई का निशाना बनाना संविधान में मिले अभिव्यक्ति के अधिकार के गंभीर सवाल खड़े करता है।

नोएल वाइज ने अपने फैसले में कहा कि बोलने और समाचार प्रकाशित करने की स्वतंत्रता अमेरिकी लोकतंत्र की बुनियादी नींव है। उन्होंने सरकार की कार्रवाई को संविधान के प्रथम और पांचवें संशोधन से जुड़े गंभीर सवालों से जोड़ा है।

गौरतलब है कि यह फैसला करीब एक साल पहले बोस्टन की एक संघीय अदालत के दिए फैसले की दिशा से भी मेल खाता है। उस मामले में अदालत ने माना था कि फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल की आलोचना के आधार पर गैर-अमेरिकी नागरिकों को निर्वासन के लिए निशाना बनाना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।

नोएल वाइज ने अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों की उन कार्रवाइयों का भी उल्लेख किया, जिन्हें उन्होंने फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल की नीतियों की आलोचना करने वाले लोगों के खिलाफ प्रतिशोध की तरह माना। उन्होंने चार्ली किर्क के आलोचकों के खिलाफ हुई सरकारी कार्रवाई का भी जिक्र किया। चार्ली किर्क टर्निंग प्वाइंट यूएसए के सह-संस्थापक थे, जिनकी पिछले वर्ष सितंबर में हत्या कर दी गई थी।

न्यायाधीश ने चेतावनी दी कि यदि सरकार को पसंद नहीं आने वाले विचार रखने वालों को इसी तरह निशाना बनाया गया, तो आने वाले समय में यह दायरा और बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, यह स्थिति अमेरिकी संविधान की उस भावना के विपरीत होगी, जो लोगों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने का अधिकार देती है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के विचारों से असहमति और उसके बोलने के अधिकार की रक्षा, दोनों एक साथ संभव हैं। यानी किसी नागरिक को किसी विचार की विषयवस्तु पसंद न हो, फिर भी वह उस व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह फैसला ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच चल रही कानूनी बहस में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि फैसले का आगे कानूनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल कैलिफोर्निया अदालत का यह आदेश इस बात को रेखांकित करता है कि अमेरिका में राजनीतिक विचारों के आधार पर निर्वासन की कार्रवाई पर संवैधानिक सीमाओं को लेकर न्यायपालिका की निगरानी कितनी अहम है।

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