Iran के पड़ोस से अमेरिका ने समेटा बोरिया-बिस्तर, क्यों भागी ट्रंप की सेना?

By अभिनय आकाश | Jul 16, 2026

मिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है। इजराइल ईरान तनाव लाल सागर में बढ़ते हमले। सीरिया में अस्थिर था और खाली देशों में अमेरिकी सैनिक गतिविधियों के बीच अब अमेरिका ने इराक से अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान कर दिया। 30 सितंबर 2026 तक इराक से अमेरिकी सेना की वापसी पूरी हो जाएगी। 2021 में अफगानिस्तान से वापसी के बाद अब इराक से भी अमेरिकी सैनिकों का जाना दुनिया की राजनीति में एक बड़ा मोड़ जाना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इराक के प्रधानमंत्री अली अल जहदी की संयुक्त घोषणा के बाद यह साफ हो गया कि वाशिंगटन अब अपनी रणनीति बदल रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इराक के रिश्ते अब सैन्य नहीं बल्कि व्यापार और अर्थव्यवस्था पर आधारित होंगे। हालांकि जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां करती है। 

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अफगानिस्तान और इराक में दो दशक तक चले अभियानों ने अमेरिका को हजारों सैनिकों और खरबों डॉलर का नुकसान पहुंचाया है। अब वाशिंगटन कम सैनिकों, ज्यादा तकनीक और तेज सैन्य प्रतिक्रिया वाली रणनीति पर काम कर रहा है। इस नई नीति के तहत अमेरिका स्थाई रूप से बड़ी संख्या में सैनिक रखने के बजाय क़तर, कुवैत और बहरीन जैसे सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल करेगा। एयरक्राफ्ट कैरियर, ड्रोन, लंबी दूरी की मिसाइलें और खुफिया नेटवर्क के जरिए पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जाएगी। यानी सैनिक कम होंगे लेकिन मारक क्षमता पहले से कहीं ज्यादा होगी। इराक से वापसी के पीछे कई कारण है। इराकी संसद और जनता लंबे समय से विदेशी नौसैनिकों की वापसी की मांग कर रहे हैं। वहीं ईरान समर्थित शिया मिलीशिया लगातार अमेरिकी ठिकानों  पर ड्रोन और रॉकेट हमले कर रहे थे। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इराक को एक तरह से प्रॉक्सी वॉर का मैदान बना दिया था। इराक के प्रधानमंत्री अली अल जैदी ने यह भरोसा भी दिलाया है कि अमेरिकी सेना के जाने के बाद देश में मौजूद हत्यारबंद मिलिशिया को कंट्रोल किया जाएगा और सिर्फ सरकारी सुरक्षा बलों के पास ही हथियार रहेंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या इराक वास्तव में इन शक्तिशाली गुटों को काबू कर पाएगा? 

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इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे अहम बात यह है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ है बल्कि कई मोर्चों पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इजराइल के साथ उसका टकराव सीरिया की अस्थिरता और खाली क्षेत्र की समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा आज भी अमेरिका की प्राथमिकता बने हुए है। दूसरी तरफ चीन भी इस क्षेत्र में अपनी आर्थिक पकड़ मजबूत कर रहा है। ऐसे में अमेरिका किसी भी कीमत पर पश्चिम एशिया को पूरी तरह छोड़ने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। 

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