Middle East Conflict | अमेरिका ने ईरान पर लगातार 12वीं रात किए हमले, तेहरान ने दी 'जैसे को तैसा' जवाब देने की चेतावनी

By रेनू तिवारी | Jul 23, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अब और अधिक भयावह रूप लेता जा रहा है। गुरुवार तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार 12वीं रात भारी गोलाबारी और हवाई हमले किए। दोनों देशों के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुँच गया जब सैन्य ठिकानों के साथ-साथ नागरिक और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकियाँ दी जाने लगीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को पूरी तरह से नष्ट करना है, जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री मार्गों से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों तथा नाविकों के लिए खतरा पैदा कर रहा है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, "अब से, जब भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर गोलीबारी करेगा - चाहे वह मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य उपकरण या हथियार से हो - तो अमेरिका एक पुल या पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे नष्ट कर देगा।"

'जैसे को तैसा': ईरान ने निर्णायक जवाब देने की कसम खाई

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ किसी भी हमले - जिसमें देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला भी शामिल है - का "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा और इसमें शामिल लोगों को भी "वैध लक्ष्य" माना जाएगा।

X पर एक पोस्ट में अरागची ने कहा, "हमारी रक्षा नीति स्पष्ट है: जैसे को तैसा। ईरान के खिलाफ किसी भी हमले - जिसमें हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला भी शामिल है - का जोरदार और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। जो लोग ऐसे हमले में मदद करेंगे, चाहे वह किसी भी तरह की मदद हो, उन्हें भी वैध लक्ष्य माना जाएगा।"

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने कहा कि अगर ईरान की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति युद्ध से पहले जैसी नहीं रहेगी। "इस युद्ध का समीकरण साफ़ है: या तो सब या कोई नहीं! जिस इलाके में हम तेल नहीं बेचते, वहां कोई और भी तेल नहीं बेचेगा। अगर हमारी सुरक्षा पक्की नहीं हुई, तो कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित नहीं रहेगा, और जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) की सुरक्षा अमेरिकी सेनाओं की गैर-मौजूदगी में ही है। हमने बार-बार कहा है कि जलडमरूमध्य के हालात युद्ध से पहले जैसी स्थिति में वापस नहीं आएंगे," उन्होंने कहा।

होर्मुज में तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका

इस जलडमरूमध्य के बंद होने से - जिससे शांति के समय दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और गैस का व्यापार होता था - वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका लगा है और इसका असर मध्य पूर्व से कहीं आगे तक फैला है। यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी जहाजों को निशाना बनाने की नई धमकी ने व्यापार के एक और अहम रास्ते (चोकपॉइंट) को खतरे में डाल दिया है।

ट्रेडिंग में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। यह इस महीने की शुरुआत में 72 डॉलर प्रति बैरल से कम थी, जो लगभग युद्ध से पहले की कीमत थी। गैसोलीन की कीमतें भी बढ़ रही हैं।

ईरान का कहना है कि उसे जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को मैनेज करने और संभवतः फीस वसूलने का अधिकार है, जो युद्ध से पहले सभी के लिए खुला और टोल-फ्री था। उसने उन जहाजों पर हमला किया है जो जलडमरूमध्य के उस रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे जिसकी निगरानी अमेरिकी सेना करती है और जिसे तेहरान के नियंत्रण से बाहर रखा गया था।

प्रमुख खबरें

TV Industry Dark Secret: जब Karan Kundrra ने Saanvie Tallwar को बिना सहमति Kiss कर मारा था थप्पड़

टीवी प्रसारण की भूमिका राष्ट्र निर्माण में अहम

Brent Crude में उबाल और Middle East Crisis का असर, Sensex और Nifty धड़ाम, HPCL-Dr Reddys के शेयर भी टूटे

पिछले कुछ दिनों ने मेरा दिल तोड़ दिया... जंतर-मंतर पर डटे छात्रों के समर्थन में आई Alia Bhatt, लिखा भावुक नोट!