भारत दौरे पर आएंगे अमेरिकी रक्षा मंत्री ऑस्टिन, एस-400 से संबधित मुद्दे पर हो सकती है बातचीत

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 18, 2021

वाशिंगटन।अमेरिका के एक सांसद ने रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन से इस सप्ताह होने वाली भारत यात्रा के दौरान रूसी एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीद तथा मानवाधिकारों के मुद्दे पर बातचीत का अनुरोध किया। सीनेट की विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष सीनेटर रॉबर्ट मेनेंडेज ने ऑस्टिन को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए अमेरिका-भारत के बीच सही साझेदारी महत्वपूर्ण है और इसमें भारत सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों को बरकरार रखने का अनुरोध करना भी शामिल है।’’ इस पत्र की प्रति बुधवार को मीडिया को जारी की गई। ऑस्टिन का 19 से 21 मार्च के दौरान अपनी भारत यात्रा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात का कार्यक्रम है।

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ऑस्टिन पहले ऐसे अमेरिकी विदेश मंत्री हैं जिन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को शामिल किया है। मेनेंडेज ने कहा, ‘‘आपकी आगामी यात्रा के दौरान भारतीय समकक्षों से मुलाकात के दौरान मैं आपसे सुरक्षा सहयोग समेत सभी मुद्दों पर स्पष्ट रुख रखने का अनुरोध करता हूं। अमेरिका-भारत संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित होने चाहिए।’’ ऐसी खबरें हैं कि भारत की रूसी एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीदने की योजना है। इस पर मेनेंडेज ने कहा कि अगर भारत यह मिसाइल प्रणाली खरीदने की राह पर बढ़ता है तो यह स्पष्ट तौर पर रूस के साथ रक्षा क्षेत्र में खरीदारी संबंधी प्रतिबंधों के दायरे में आता है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि भारत अमेरिकी व्यापार संधि का हिस्सा नहीं है और उसके सोवियत एवं रूसी सेनाओं के साथ ऐतिहासिक संबंध हैं। हालांकि अगर भारत एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीदता है तो यह सीएएटीएसए के अनुच्छेद 231 के तहत रूस के साथ रक्षा क्षेत्र में खरीदारी संबंधी प्रतिबंधों के दायरे में आता है।’’

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अमेरिकी सांसद ने कहा, ‘‘ नए कृषि कानूनों का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे किसानों और पत्रकारों तथा सरकारी आलोचकों पर कार्रवाई भारत में लोकतंत्र की बिगड़ती स्थिति को दर्शाती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हाल के वर्षों में मुस्लिम विरोधी भावनाएं उग्र होने और नागरिकता संशोधन कानून जैसी सरकार की कार्रवाई, राजनीतिक संवाद खत्म होने और कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी तथा राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ राजद्रोह कानूनों के इस्तेमाल से मानवाधिकारों के लिहाज से भारत की स्थिति को नुकसान पहुंचा है।

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