By अभिनय आकाश | Sep 29, 2026
अगर आप भी अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं, छुट्टियाँ बिताने का इरादा है या फिर किसी जरूरी बिजनेस डील के सिलसिले में अमेरिका की उड़ान भरने वाले हैं, तो यह खबर आपको बड़ा झटका दे सकती है। भारतीय यात्रियों के लिए अमेरिकी वीजा हासिल करना अब किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गया है। अमेरिकी सरकार के अपने ही आधिकारिक आंकड़ों ने अब इस बात पर मुहर लगा दी है कि भारतीयों के लिए यूएस वीजा इंटरव्यू का इंतजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। अमेरिकी सरकार की शीर्ष निगरानी संस्था'गवर्नमेंट एकाउंटेबिलिटी ऑफिस' यानी GAO की एक ताजा ऑडिट रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में नॉन-इमिग्रेंट वीजा यानी खासकर टूरिस्ट और बिजनेस वीजा के लिए भारतीय आवेदकों को इंटरव्यू की तारीख पाने के लिए औसतन 346 दिन यानी लगभग पूरे एक साल का इंतजार करना पड़ा है।
वित्त वर्ष 2025 में भारत में लगभग 14.5 लाख नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा आवेदन आए। इन आवेदनों को ऐसे वीज़ा के लिए नियुक्त सिर्फ़ 68 कॉन्सुलर अधिकारियों ने संभाला। इसका मतलब है कि हर कॉन्सुलर अधिकारी पर लगभग 21,401 आवेदन थे, जिससे GAO ऑडिट में सबसे ज़्यादा काम के बोझ वाले देशों में भारत का नाम भी शामिल हो गया। रिपोर्ट में लंबी लाइनों के मुख्य कारणों के तौर पर स्टाफ़ की कमी के दबाव और वीज़ा की मांग में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी को बताया गया है।
यह समस्या सिर्फ़ भारत तक ही सीमित नहीं है। पूरे US कॉन्सुलर सिस्टम में, विज़िटर-वीज़ा आवेदनों पर फ़ैसले लेने की संख्या FY2019 में 92 लाख से बढ़कर FY2025 में 1.17 करोड़ हो गई, जो महामारी से पहले के स्तर से भी ज़्यादा है। वहीं दूसरी ओर, नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा का काम संभालने वाले कॉन्सुलर अधिकारियों की संख्या FY2024 में 1,342 से घटकर FY2025 में 904 रह गई। यह कमी नई भर्तियां रोकने और स्टाफ़ के नौकरी छोड़ने की वजह से आई। जैसे-जैसे मांग बढ़ी और स्टाफ़ की संख्या कम हुई, पूरे अमेरिका में विज़िटर-वीज़ा इंटरव्यू के लिए औसत इंतज़ार का समय FY2019 में 26 दिनों से बढ़कर FY2025 में 201 दिन हो गया। भारत पर इसका असर ज़्यादा पड़ा क्योंकि उपलब्ध कॉन्सुलर स्टाफ़ की तुलना में यहाँ आवेदन की संख्या बहुत ज़्यादा थी। GAO ने यह भी पाया कि चीन और ब्राज़ील की तुलना में भारत और मेक्सिको में इंटरव्यू के लिए ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ा; आवेदन की मांग के मुकाबले स्टाफ़ की संख्या को इसके लिए एक अहम वजह माना गया।
B1/B2 वीज़ा के लिए अप्लाई करने वालों को सबसे लंबी लाइनों का सामना करना पड़ रहा है। B1/B2 वीज़ा (जो बिज़नेस यात्रा और टूरिज़्म के लिए होते हैं) के लिए अप्लाई करने वाले भारतीयों पर यह दबाव खास तौर पर ज़्यादा है। 17 सितंबर को अपडेट की गई US स्टेट डिपार्टमेंट की अपॉइंटमेंट जानकारी के अनुसार, भारत में अगली उपलब्ध B1/B2 अपॉइंटमेंट के लिए अनुमानित इंतज़ार का समय इस प्रकार था:
हैदराबाद: लगभग 12 महीने
मुंबई: लगभग 11.5 महीने
नई दिल्ली: लगभग 10 महीने
चेन्नई: लगभग 7.5 महीने
कोलकाता: लगभग 6.5 महीने
इन तारीखों को पक्की समय-सीमा नहीं माना जाना चाहिए। स्टेट डिपार्टमेंट समय-समय पर अपॉइंटमेंट के लिए नए स्लॉट जारी करता है, जिसका मतलब है कि आवेदकों को कभी-कभी पहले की तारीख मिल सकती है। जिन आवेदकों ने पहले ही अपॉइंटमेंट ले लिया है, वे भी समय-समय पर सिस्टम चेक कर सकते हैं और अगर कोई पहले का स्लॉट खाली हो जाता है, तो अपना अपॉइंटमेंट उस समय के लिए बदल सकते हैं। स्टूडेंट और वर्क वीज़ा के लिए अप्लाई करने वालों को कम इंतज़ार करना पड़ रहा है। लंबी लाइनों का असर सभी तरह के US वीज़ा पर एक जैसा नहीं होता है। F, M और J वीज़ा (जो स्टूडेंट और एक्सचेंज विज़िटर के लिए होते हैं) के लिए अप्लाई करने वालों को भारतीय कॉन्सुलर पोस्ट पर आम तौर पर कम इंतज़ार करना पड़ता है। हाल के अपॉइंटमेंट डेटा से पता चला है कि इंतज़ार का समय चेन्नई में आधे महीने से भी कम से लेकर मुंबई में लगभग 2.5 महीने तक है। H, L, O, P और Q वीज़ा जैसी नौकरी से जुड़ी कैटेगरी के लिए भी B1/B2 एप्लीकेशन के मुकाबले आम तौर पर कम इंतज़ार करना पड़ता है, हालांकि अलग-अलग जगहों पर अपॉइंटमेंट में देरी अलग-अलग हो सकती है।
US जाने की योजना बना रहे भारतीयों के लिए लंबा इंतज़ार ही एकमात्र चिंता की बात नहीं है। वीज़ा आवेदकों को ज़्यादा लागत का भी सामना करना पड़ रहा है। B1/B2 विज़िटर वीज़ा के लिए स्टैंडर्ड एप्लीकेशन प्रोसेसिंग फ़ीस $185 है। यही फ़ीस F, M और J वीज़ा सहित कई अन्य नॉन-पिटीशन-बेस्ड कैटेगरी पर भी लागू होती है। H, L, O और P वीज़ा जैसी पिटीशन-बेस्ड कैटेगरी के लिए एप्लीकेशन फ़ीस $205 है। इसके अलावा, US कांग्रेस ने 2025 के इमिग्रेशन कानून के तहत नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा आवेदकों के लिए $250 की नई 'वीज़ा इंटीग्रिटी फ़ीस' का कानून बनाया है। इस कानून में प्रावधान है कि यह फ़ीस अन्य अधिकृत वीज़ा फ़ीस के अलावा ली जाएगी, और FY2026 से इसमें सालाना महंगाई के अनुसार बदलाव किया जाएगा।