By अजय कुमार | Jun 14, 2022
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कांग्रेस मुक्त भारत का सपना भले अभी नहीं पूरा हुआ हो, लेकिन उत्तर प्रदेश विधान परिषद जल्द ही कांग्रेस मुक्त होने जा रही है। जुलाई में उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कांग्रेस की स्थिति शून्य पर आकर रुक जाएगी। क्योंकि इससे नीचे गिराव संभव ही नहीं है। इससे उत्साहित बीजेपी वाले कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री के कांग्रेस मुक्त भारत वाले सपने का यह पहला कदम है। बीजेपी और विपक्ष भले ही कांग्रेस की दुर्गति से खुशी महसूस कर रहे हो, लेकिन कांग्रेस के लिए यह काफी शर्मनाक स्थिति है। कांग्रेस उसी उत्तर प्रदेश में रसातल की ओर चली गई है, जिसके बल पर उसने दशकों तक केंद्र और प्रदेश में राज किया था। कांग्रेस के पुराने दिक्कत नेता भी इस स्थिति से काफी असहज महसूस कर रहे हैं, यह और बात है कि गाँधी परिवार की चाटुकारिता के चलते मुंह खोलने से बच रहे हैं। वैसे स्थिति सपा-बसपा के लिए भी अच्छी नहीं है। इसके उलट भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपना बहुमत पूरा करने का स्वर्णिम इतिहास बनाने जा रही है।
यहां यह समझ लेना भी जरूरी है कि विधान परिषद में मनोनीत कोटे की भी छह सीटें रिक्त हैं। सरकार आने वाले दिनों में इन छह सीटों पर भी अपने सदस्यों को मनोनीत करेगी। उनमें सभी सदस्य भाजपा संघ परिवार से जुड़े संगठनों से होंगे। वहीं नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन के निधन और पूर्व एमएलसी जयवीर सिंह के विधायक निर्वाचित होने से खाली हुई दो सीटों पर उप चुनाव होना है। उप चुनाव में भी दोनों सीटें भाजपा को मिलना तय है। मनोनीत कोटे की छह और उप चुनाव की दो सीटें मिलने के बाद परिषद में भाजपा की सदस्य संख्या 81 पहुंच जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विधान परिषद में भाजपा को करीब दो तिहाई बहुमत मिलने का रिकॉर्ड भी दर्ज होगा। वहीं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और परिषद में नेता सदन स्वतंत्र देव सिंह के नाम भी यह रिकॉर्ड दर्ज होगा। उनके नेता सदन के कार्यकाल में पार्टी को पहली बार 81 सीटों तक पहुंचने का मौका मिलेगा। इससे भाजपा गदगद है। आने वाले समय में भाजपा अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है।
- अजय कुमार