By दिव्यांशी भदौरिया | Jun 27, 2026
ज्योतिष शास्त्र से किसी भी जातक की जन्म तिथि से बहुत कुछ जान सकते हैं। हर एक व्यक्ति जिस तिथि को जन्मा होता है, उसका फल ज्योतिषीय ग्रंथों में वर्णित है। जैसे कि प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णमासी और अमावस्या, इन तिथियों को नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा की श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
जानें नन्दा आदि तिथियों का फलादेश
जिन व्यक्ति का जन्म नन्दा यानी प्रतिपदा, षष्ठी या एकादशी, इन तिथियों में से किसी भी एक तिथि पर होता है, तो ज्योतिष के अनुसार वह जातक ज्ञानी, पण्डित, देवताओं का भक्त और अपने परिवार के लोगों से प्रेम रखने वाला होता है।
भद्रा तिथि
किसी भी व्यक्ति का जन्म भद्रा यानी द्वितीया, सप्तमी, द्वादशी तिथियों में से किसी भी तिथि को होता है, वह धनवान, संसार चक्र और बंधन से डरने वाला, परोपकार आदि कार्यों में चित्त लगाने वाला होता है।
जया तिथि
जिन लोगों का जन्म जया तिथि यानी तृतीया, अष्टमी या त्रयोदशी को होता है, उन्हें जीवन में मान-सम्मान मिलने की संभावना रहती है। ऐसे लोग साहसी, शांत स्वभाव के और लंबी उम्र वाले माने जाते हैं। उन्हें संतान सुख मिलता है और वे अपनी बड़ी इच्छाओं और लक्ष्यों को पूरा करने में सफल हो सकते हैं।
रिक्ता तिथि
किसी भी जातक का जन्म रिक्ता यानी चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी तिथियों में से किसी भी तिथि को होता है, वह जातक तर्क करने वाला, लापरवाह, गुरु की निंदा करने वाला और दूसरे के घमंड को नष्ट करने वाला, अत्यधिक वासना वाला होता है।
पूर्णा तिथि
जिस व्यक्ति का जन्म पूर्णा तिथि यानी के पंचमी, दशमी, और पूर्णिमा व अमावस्या में से किसी एक तिथि को होता है, उसे धन-धान्य का अभाव नहीं रहता, वह वेद और शास्त्रों का ज्ञाता होता है, ये सत्य वाणी बोलने वाला होता है, चित्त का शुद्ध और अनेक विषयों का जानने वाला होता है।