अपनी सगी बहन की बेटी को दिल दे बैठे थे Vijay Anand, खूब विवादों में रही अभिनेता की शादीशुदा जिंदगी

By Prabhasakshi News Desk | Jan 22, 2025

बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता देव आनंद के छोटे भाई विजय आनंद ने थ्रिलर, रोमांटिक, कॉमेडी से लेकर फैमिली ड्रामा तक हर तरह की फिल्में बनाईं हैं। फिल्मी दुनिया में उन्होंने खुद को बखूबी स्थापित किया। लेकिन अपनी निजी जिंदगी को लेकर वह हमेशा ही विवादों में रहे। दरअसल, विजय आनंद ने सुषमा कोहली से शादी की। खबरों के मुताबिक, सुषमा कोहली रिश्ते में विजय आनंद की भांजी लगती थीं। उन्होंने अपनी ही सगी बहन की बेटी से शादी की थी, जो कि उस समय काफी विवादों में रही थी।


एक्टर का प्रारम्भिक जीवन

पंजाब के गुरदासपुर में विजय आनंद का जन्म 22 जनवरी को में हुआ था। विजय आनंद जब महज सात साल के थे, जब उनकी मां चल बसी थीं। उनका पालन पोषण बड़े भाई और भाभी की देखरेख में हुआ। विजय आनंद अपनी प्राइमरी एजुकेशन पूरी कर रहे थे, तब तक उनके बड़े भाई देव आनंद और चेतन आनंद का बड़ा नाम हो चुका था। पढ़ाई पूरी करने के बाद विजय आनंद भी इंडस्ट्री में चले आए।


उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली थी। जब विजय आनंद कॉलेज में थे, तब उन्होंने अपनी भाभी उमा आनंद के साथ मिलकर एक स्क्रिप्ट लिखी थी। इस स्क्रिप्ट पर आगे चलकर एक फिल्म बनी, जिसे लोग 'टैक्सी ड्राइवर' के नाम से जानते हैं। यह फिल्म साल 1954 में रिलीज हुई थी। जिसका निर्माण चेतन आनंद ने किया था, जबकि देव आनंद फिल्म के निर्माता व एक्टर थे। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया था, जिसके बाद विजय आनंद की समझ फिल्म इंडस्ट्री को लेकर बेहतर होती गई।


फिल्मी सफर

उनको गोल्डी आनंद के नाम से भी जाना जाता था। ‘गाइड’, ‘तीसरी मंजिल’, ‘ज्वेल थीफ’ और ‘जॉनी मेरा नाम’ फिल्म बनाने वाले विजय के बड़े भाई चेतन आनंद डायरेक्टर- प्रोड्यूसर थे और देव आनंद एक्टर-डायरेक्टर थे। इन तीन भाईयों ने मिलकर ‘नवकेतन फिल्म्स’ बनाया था और विजय ने अधिकतर फिल्में इसी बैनर के तले की थीं। अच्छी फैमिली से ताल्लुक रखने वाले बेहद टैलेंटेड विजय जीवन के आखिरी पलों में बुरी तरह टूट गए थे और ओशो की शरण में चले गए थे। फिल्म और अभिनय के अलावा वह अपनी पर्सनल लाइफ की वजह से भी काफी सुर्खियों में रहे।


निजी जीवन

एक इंटरव्यू में विजय आनंद ने अपनी शादी को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा की थीं। उन्होंने कहा था कि गोल्डी और मेरी शादी साल 1978 में हुई थी। जब हमारी शादी हुई थी, तब फिल्म 'राम बलराम' की शूटिंग चल रही थी। उन्हें मेरे सादगी पसंद आई थी। मैं उनका टेम्परामेंट समझ गई थी। मैं समझ गई थी कि उन्हें बहुत जल्दी गुस्सा नहीं आता है। वो मैं थी, जिसे जल्दी गुस्सा आता था। मैं ज्यादा पागल थी। मैं कुछ चीजें जान बूझकर उन्हें तंग करने के लिए किया करती थी। कभी उन्होंने मुझे संभाला, तो कभी मैंने उन्हें संभाला।'


विजय आनंद के करियर की बात करें तो बतौर हीरो उन्होंने ‘हकीकत’, ‘कोरा कागज’, ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ जैसी फिल्मों में कम किया था। एक समय ऐसा भी आया था, जब विजय आनंद तनाव का शिकार हो गए थे, जिसके बाद वे कुछ दिनों के लिए ओशो की शरण में चले गए थे। उन्होंने ओशो से आध्यात्म की शिक्षा हासिल की थी। विजय आनंद का 23 फरवरी 2004 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

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