महाराष्ट्र के मंत्री विजय वडेट्टीवार की बेलगाम हुई जुबान, गुस्से में कंगना रनौत को कह दिया नाचनेवाली

By रेनू तिवारी | Nov 17, 2021

विजय नामदेवराव वडेट्टीवार एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारत में महाराष्ट्र सरकार में अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण, आपदा प्रबंधन, राहत और पुनर्वास के कैबिनेट मंत्री हैं। उन्होंने कंगना रनौत को लेकर विवादित बयान दिया बै। महात्मा गांधी को लेकर दिए गये कंगना रनौत के बयान से नेता जी इस कदर नाराज दिखाई पड़े कि उन्होंने अपने बयान में कंगना रनौत को नाचने वाली कह दिया। विजय वडेट्टीवार बयान में कहा कि 'एक नाचने वाली महात्मा गांधी जी के बारे में जो कह रही है वह विवादास्पद है। वह महात्मा गांधी पर बोलने के लायक नहीं हैं। ऐसा कहना सूरज पर थूकना है, प्रबंधन, राहत और पुनर्वास मंत्री विजय वड्डेटीवार ने कहा कि वह किसी नाचनेवाली के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते।

बॉलीवुड क्वीन कंगना रनौत इस समय महात्मा गांधी पर दिए अपने  बयान को लेकर चर्चा में हैं। माना जा रहा है कि कंगना को लेकर दिए गये इस बयान को लेकर अब राजनीतिक हलचल तेज हो सकती हैं। एक महिला को लेकर इस तरह की टिप्पणी करने पर मंत्री सवालों में घिर सकते हैं। कंगना रनौत ने अपने बयान में जो कुछ कहा है उसमें किसी भी तरह का कोई अपमान जनक शब्द नहीं प्रयोग हुआ। उन्होंने एक पुराने अखबार की कटिंग को शेयर करते हुए अपना तर्क दिया था। 

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अभिनेत्री कंगना रनौत ने मंगलवार को एक नए विवाद को जन्म देते हुए दावा किया कि सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह को महात्मा गांधी से कोई समर्थन नहीं मिला। उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसा के मंत्र का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि दूसरा गाल आगे करने से ‘भीख’ मिलती है न कि आज़ादी। रनौत ने पिछले हफ्ते कहा था कि 1947 में भारत को आज़ादी नहीं, बल्कि ‘भीख’ मिली थी, असली स्वतंत्रता 2014 में मिली जब नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में आई। रनौत ने ‘इंस्ट्राग्राम’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर महात्मा गांधी को निशाना बनाया और कहा कि ‘अपने नायकों को समझदारी से चुनो।”

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अभिनेत्री ने एक अखबार की पुरानी कतरन साझा की है जिसकी सुर्खी है, “गांधी, अन्य नेताजी को सौंपने के लिए सहमत हुए थे।” खबर में दावा किया गया है कि गांधी, जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना की एक ब्रिटिश न्यायाधीश के साथ सहमति बनी थी कि यदि बोस देश में प्रवेश करते हैं तो वे उन्हें सौंप देंगे। रनौत ने अखबार की कतरन के साथ लिखा है, “ या तो आप गांधी के प्रशंसक हैं या नेताजी के समर्थक हैं। आप दोनों एक साथ नहीं हो सकते हैं… चुनो और फैसला करो।” एक अन्य पोस्ट में रनौत ने दावा किया है, “जिन लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी उन्हें ऐसे लोगों ने अपने आकाओं को सौंप दिया जिनके पास अपने उत्पीड़कों से लड़ने का साहस नहीं था या जिनका खून नहीं खौलता था बल्कि वे चालाक और सत्ता लोलुप थे।”

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