वैश्विक संकट के बीच सबसे बड़े कूटनीतिक मिशन पर निकल रहे हैं मोदी, विश्व राजनीति में होगा बड़ा उलटफेर

By नीरज कुमार दुबे | May 12, 2026

वैश्विक चुनौतियों, बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों, ऊर्जा संकट, आपूर्ति शृंखला की अनिश्चितताओं और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर बड़े कूटनीतिक मिशन पर निकल रहे हैं। 15 मई से 20 मई तक प्रस्तावित उनकी बहुराष्ट्रीय विदेश यात्रा के दौरान वह संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। यह यात्रा भारत की वैश्विक रणनीति, आर्थिक हितों और सामरिक साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इस दौरान ऊर्जा सहयोग, व्यापार, हरित प्रौद्योगिकी, रक्षा, निवेश, नवाचार और वैश्विक सुरक्षा जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका और अधिक मजबूत होने की संभावना है।

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हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात से करेंगे, जहां वह राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग, निवेश, डिजिटल भुगतान, रक्षा और भारतीय समुदाय के कल्याण जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। संयुक्त अरब अमीरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है तथा बीते पच्चीस वर्षों में भारत में निवेश करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते ने व्यापार को नई गति दी है। ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी संयुक्त अरब अमीरात भारत का महत्वपूर्ण सहयोगी है। इसके अलावा भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा दोनों देशों की सामरिक निकटता को और अधिक मजबूत बना रहा है। वहां रह रहे लाखों भारतीय दोनों देशों के सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों की मजबूत कड़ी हैं।

संयुक्त अरब अमीरात के बाद प्रधानमंत्री नीदरलैंड जाएंगे। यह यात्रा भारत और नीदरलैंड के बीच बढ़ते आर्थिक तथा प्रौद्योगिकी सहयोग को नई दिशा देगी। प्रधानमंत्री वहां के राजा विलेम अलेक्जेंडर, महारानी माक्सिमा और प्रधानमंत्री रोब येटन से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, हरित हाइड्रोजन, जल प्रबंधन, सेमीकंडक्टर और नवाचार जैसे क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ रहा है। नीदरलैंड यूरोप में भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और भारत में बड़े निवेशकों में शामिल है। जल प्रबंधन और कृषि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नीदरलैंड की विशेषज्ञता भारत के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। दोनों देश मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समर्थन में भी एक समान दृष्टिकोण रखते हैं।

मोदी की स्वीडन की यात्रा भारत और नॉर्डिक देशों के साथ बढ़ते सहयोग को और मजबूत बनाएगी। प्रधानमंत्री गोथेनबर्ग में स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन से वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, हरित परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उभरती प्रौद्योगिकी, रक्षा, अंतरिक्ष और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग की संभावनाएं हैं। हम आपको बता दें कि स्वीडन की अनेक प्रमुख कंपनियां भारत में सक्रिय हैं और दोनों देशों के बीच नवाचार आधारित साझेदारी तेजी से विकसित हो रही है। भारत और स्वीडन लोकतांत्रिक मूल्यों, सतत विकास और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में समान सोच रखते हैं। हरित औद्योगिक परिवर्तन और जलवायु संरक्षण के लिए दोनों देशों का सहयोग वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी इसके बाद नॉर्वे जाएंगे, जहां वह तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी और पिछले तैंतालीस वर्षों में भारत से वहां होने वाली पहली प्रधानमंत्री स्तरीय यात्रा भी मानी जा रही है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्तोरे के साथ होने वाली वार्ता में व्यापार, निवेश, हरित प्रौद्योगिकी और समुद्री अर्थव्यवस्था पर विशेष जोर रहेगा। भारत और नार्वे के संबंध समुद्री सहयोग, हरित ऊर्जा और सतत विकास पर आधारित हैं। भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की संभावना है। नॉर्वे का विशाल पेंशन कोष भारतीय पूंजी बाजार में महत्वपूर्ण निवेश कर चुका है। आर्कटिक क्षेत्र, हरित जहाजरानी और समुद्री संसाधनों के प्रबंधन में दोनों देशों का सहयोग भविष्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पक्ष होगा। इसमें नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के शीर्ष नेता शामिल होंगे। यह मंच भारत और नॉर्डिक देशों के बीच प्रौद्योगिकी, नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, सतत विकास और समुद्री अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई रणनीतिक दिशा देगा। वैश्विक आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने और हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में यह सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री इटली जाएंगे। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला के साथ उनकी बैठकें भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगी। दोनों देश 2025 से 2029 तक की संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना पर तेजी से काम कर रहे हैं। व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक सहयोग इसके प्रमुख क्षेत्र हैं। इटली ने चीन की बेल्ट एंड रोड पहल से अलग होकर भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे को समर्थन दिया है, जिससे दोनों देशों की सामरिक निकटता बढ़ी है। रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर जोर दिया जा रहा है। इटली भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के प्रयासों का भी समर्थन करता रहा है। वहां रह रहा भारतीय समुदाय दोनों देशों के संबंधों को सामाजिक और सांस्कृतिक मजबूती प्रदान करता है।

इस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह विदेश यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की बदलती वैश्विक भूमिका का प्रतीक भी है। यह यात्रा भारत को ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी सहयोग, हरित विकास, रक्षा साझेदारी और वैश्विक व्यापार के नए अवसर प्रदान करेगी। साथ ही यह संदेश भी देगी कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख और विश्वसनीय केंद्र बनकर उभर रहा है।

-नीरज कुमार दुबे

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