By डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा | Mar 07, 2025
भले ही अमेरिका के सामने यूक्रेन को मजबूरी में कोई समझौता करना पड़े पर इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि व्हाइट हाउस की हालिया घटना से यूक्रेन के राष्ट्रपेति वोलोडिमिर जेलेंस्की रातोंरात हीरो बनकर उभर गए हैं। राजनीतिक विश्लेषक चाहे खुलकर नहीं कहे पर इससे अब नकारा नहीं जा सकता कि जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से वार्ता के दौरान तीखी बहस और तेवर दिखाये हैं दबी जुबान से ही दुनिया के देशों ने इसे सराहा ही है। एक मजे की बात यह कि अब तक अमेरिका का पिछलग्गू माना जाने वाला यूरोप भी अब अमेरिकी तानाशाही के खिलाफ खुलकर सामने आने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के तानाशाही व्यवहार को देखते हुए योरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने तो लेवेंस्की को यहां तक विश्वास दिलाया है कि आप अकेले नहीं है प्रिय राष्ट्रपति। मजबूत बने, निडर बने। हम न्यायपूर्ण स्थाई शांति के लिए आपके साथ काम करना जारी रखेंगे। यूरोप के तो करीब करीब सभी देश यूक्रेन के पक्ष में खुलकर आ गए हैं। चाहे वह फ्रांस हो, पोलण्ड हो, जर्मनी हो, नार्वे हो, स्पेन, इटली हो, एस्टोनिया हो या अन्य देश। सभी ने एक स्वर में यूक्रेन का साथ और सहायता देने का संकल्प दोहराया है। यूरोपीय संघ तो ट्रम्प को छोड़ कोई नया नेता ढूंढ़ने पर विचार आरंभ कर दिया है।
देखा जाए तो ट्रम्प तानाशाही रवैया अपनाते हुए दुनिया के देशों को ड़राने धमकाने में लगे हुए हैं। हांलाकि चाहे टैरिफ नीति हो या उपनिवेशवादी सोच देर सबेर इसका खामियाजा अमेरिका को ही भुगतना पड़ेगा और व्हाईट हाउस में ट्रम्प और जेलेंस्की के बीच तीखी बहस और नोकझोंक से दुनिया के देशों में साहस का संचार हुआ है। व्हाइट हाउस की घटना का तात्कालिक परिणाम ही यह सामने आ गया है कि यूरोप के देश एक स्वर में यूक्रेन के साथ खड़े होने लगे है तो दूसरी और अपना नया नेता चुनने पर विचार करने लगे हैं। हांलाकि जेलेंस्की ने देश हित को पहली वरियता दी है और अमेरिका से अब भी खनिज संपदा के अधिकार देने पर सहमति समझौता करने को लगभग तैयार है। पर अमेरिका दबाव बनाकर और डरा धमकाकर समझौता करना चाहता है यही कारण है कि समझौते के प्रारुप पर चर्चा करने आये जेलेंस्की को ही रुस यूक्रेन युद्ध का जिम्मेदार बताते हुए तीखी नोंकझोंक तक हालात पहुंच गए और जेलेंस्की की हिम्मत की इसलिए सराहना करनी होगी कि अमेरिका के आगे नाक रगड़ने की जगह वार्ता छोड़कर यूरोपीय देशों की यात्रा पर आ गये। भविष्य में क्या होता है यह तो अलग बात हैं और उसके कारण इंटरनेशनल पालिटिक्स और रिलेेशंस तय करेंगे पर ट्रम्प को वार्ता की टेबल पर अपनी और देश की गरिमा बनाये रखकर दुनिया के देशों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि चाहे कोई कितना भी ताकतबर हो हमें उसके गलत दबाव में नहीं आना चाहिए। यही कारण है कि मानों या ना मानों पर आज ट्रम्प से ज्यादा जेलेंस्की के साहस की सराहना हो रही है।
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा