अडाणी समूह के एनडीटीवी के अधिग्रहण में वॉरंट की शर्तें महत्वपूर्ण: विधि विशेषज्ञ

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 25, 2022

नयी दिल्ली। अडाणी समूह के एनडीटीवी के ‘जबरन’ अधिग्रहण के कदम पर विधि विशेषज्ञों ने बुधवार को कहा कि 2009-10 में परिवर्तनीय वॉरंट जारी करने की शर्तें महत्वपूर्ण होंगी और किसी भी विवाद को लेकर निर्णय अनुबंध की शर्तों के तहत ही होगा। उल्लेखनीय है कि कंपनियां पूंजी जुटाने के लिये वॉरंट जारी करती हैं। यह प्रतिभूतियों की तरह होता है जो निवेशकों को भविष्य में निर्धारित तारीख को एक निश्चित कीमत पर कंपनी में शेयर खरीदने का अधिकार देता है। अडाणी समूह ने घोषणा की है कि उसके पास एनडीटीवी में 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वह अतिरिक्त 26 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिये खुली पेशकश लाएगा।

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इंडस लॉ के भागीदार रवि कुमार ने कहा कि आमतौर पर वॉरंट को इक्विटी शेयर में बदलने के लिये उसे जारी करने वाली कंपनी से किसी पूर्व सहमति की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर ऐसी चीजें वाणिज्यिक समझ का हिस्सा है, तो उन्हें वॉरंट बदलने की शर्तों के हिस्से के तहत स्पष्ट करने की आवश्यकता है।’’ कुमार ने कहा, ‘ यह मामला वास्तव में अनुबंध पर निर्भर करता है और किसी भी विवाद का फैसला निर्धारित शर्तों के आधार पर किया जाएगा।’’ स्पाइस रूट लीगल में भागीदार प्रवीण राजू ने कहा कि यह 2014 में रिलायंस के नेटवर्क-18 के ‘जबरन’ अधिग्रहण की याद दिलाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने वीसीपीएल को जो वॉरंट जारी किया था, उसमें इक्विटी शेयर में बदलने का प्रावधान है, तो मौजूदा सार्वजनिक घोषणा और खुली पेशकश कानून के दायरे में है।’’ पॉयनियर लीगल के भागीदार शौभिक दासगुप्ता ने कहा कि अडाणी समूह के अधिग्रहण का रास्ता पूरी तरह से सोची गयी रूपरेखा पर आधारित है। इस तरह के वॉरंट की शर्तें तय करेंगी कि क्या उसे इक्विटी शेयर में बदलने की अनुमति है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि अगर चुनौती दी गई तो लंबी कानूनी लड़ाई हो सकती है उच्चतम न्यायालय में वकील और विधि कंपनी आर्क लीगल की भागीदार खुशबू जैन ने कहा कि इस मामले में सहमति का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि यह पहले से मौजूद अनुबंध की शर्तों के तहत उठाया गया कदम है।

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