By अभिनय आकाश | Jul 23, 2025
दुनियाभर में साइबर अटैक के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब एक बड़े साइबर स्पानेज ऑपरेशन का खुलासा किया गया है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट के शेयरपॉइंट सर्वर को टारगेट किया गया। इस ऑपरेशन में लगभग 100 अलग-अलग संस्थाएं अब तक शिकार हो चुकी हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि इस साइबर अटैक के शिकार होने वालों की सूची में अमेरिकी राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन (एनएनएसए) भी शामिल है। एनएनएसए देश के परमाणु शस्त्रागार का प्रबंधन करती है। माइक्रोसॉफ्ट ने पुष्टि की है कि शेयरपॉइंट सर्वर पर हुए साइबर हमले के पीछे चीनी हैकर्स का हाथ था। कंपनी के मुताबिक, इन हैकर्स ने उन सर्वरों को निशाना बनाया जो ऑन-प्रिमाइसेस सिस्टम पर चलते हैं, यानी कंपनियों द्वारा खुद के डाटा सेंटर में इस्तेमाल किए जाते हैं। हैकर्स ने कमजोरियों का फायदा उठाकर व्यापारिक डाटा चुराने की कोशिश की। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड सेवा इस हमले से सुरक्षित रही है।
जाँचकर्ताओं ने पुष्टि की है कि इस उल्लंघन से कम से कम दो अमेरिकी संघीय एजेंसियाँ प्रभावित हुई हैं। घटना की प्रतिक्रिया में शामिल एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि स्थिति के और बिगड़ने पर यह संख्या चार से पाँच या उससे भी ज़्यादा हो सकती है। एक दूसरे अधिकारी ने पुष्टि की कि प्रभावित एजेंसियों की संख्या संभवतः अब तक सार्वजनिक रूप से स्वीकार की गई संख्या से कहीं अधिक है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन (एनएनएसए) उन संस्थानों में शामिल था जिनमें घुसपैठ हुई थी। यद्यपि प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि परमाणु-संबंधी किसी भी वर्गीकृत डेटा तक पहुंच नहीं बनाई गई थी, फिर भी यह तथ्य कि परमाणु हथियारों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एजेंसी की गोपनीयता भंग की गई थी।
वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने साइबर अपराध पर अपनी मानक स्थिति दोहराते हुए इस घटना के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि चीन सभी प्रकार के साइबर हमलों और साइबर अपराध का दृढ़ता से विरोध करता है और उनका मुकाबला करता है। उन्होंने कहा कि हम बिना ठोस सबूत के दूसरों को बदनाम करने का भी दृढ़ता से विरोध करते हैं।