By नीरज कुमार दुबे | Jun 10, 2026
पश्चिम बंगाल की धरती पर वह जोरदार अभियान इस समय तेजी से आगे बढ़ता चला जा रहा है जिसका इंतजार देश लंबे समय से कर रहा था। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ जिस कठोर अभियान का बिगुल फूंका है, उसने पूरे घुसपैठ तंत्र को हिला कर रख दिया है। सीमा पार से अवैध तरीके से भारत में घुसकर यहां की जमीन, रोजगार, संसाधनों और सुरक्षा पर बोझ बनने वालों के खिलाफ अब साफ संदेश दे दिया गया है कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और पश्चिम बंगाल अब घुसपैठियों की सुरक्षित शरणस्थली नहीं रहने वाला।
हाकिमपुर सीमा चौकी पर रोजाना दो सौ से तीन सौ तक संदिग्ध घुसपैठियों के पहुंचने की खबरें इस बात का प्रमाण हैं कि वर्षों से सीमा पार से अवैध घुसपैठ का संगठित खेल चलता रहा। गरीबी, रोजगार या इलाज के नाम पर भारत में दाखिल होकर हजारों लोग फर्जी पहचान बनाकर यहां बस गए। कई लोग निर्माण मजदूर बने, कई ने किराये के मकानों में रहकर स्थानीय व्यवस्था में घुसपैठ कर ली। लेकिन अब प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बिना वैध दस्तावेज भारत में रहने का अधिकार किसी को नहीं दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के हर जिले में हिरासत केंद्र स्थापित करने का आदेश दिया है। अब तक पांच हजार से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा जा चुका है जबकि सैकड़ों लोग अभी भी हिरासत केंद्रों में रखे गए हैं। सरकार का कहना है कि यह अभियान पूरी तरह राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है।
दरअसल भारत और बांग्लादेश के बीच चार हजार किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा लंबे समय से अवैध घुसपैठ, तस्करी और सीमा अपराधों की चुनौती झेलती रही है। पश्चिम बंगाल और असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में जनसंख्या संतुलन तेजी से बदलने की चिंता वर्षों से उठती रही है। भारतीय जनता पार्टी लगातार इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ती रही है और अब सत्ता में आने के बाद पश्चिम बंगाल में निर्णायक कार्रवाई दिखाई दे रही है।
उधर, बांग्लादेश की ओर से इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई जा रही है। ढाका का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को तय कूटनीतिक प्रक्रिया के बिना वापस नहीं भेजा जाना चाहिए। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश ने दावा किया है कि उसने कई बार भारतीय सीमा सुरक्षा बल की कथित पुशबैक कोशिशों को रोका है। सीमा के कई इलाकों में तनाव भी देखा गया है। लेकिन भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा है कि भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी और बांग्लादेश को अपने नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस लेना ही होगा।
हम आपको यह भी बता दें कि नई दिल्ली में इस समय सीमा सुरक्षा बल और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के बीच उच्चस्तरीय बैठक चल रही है। चार दिन तक चलने वाली इस समन्वय वार्ता में सीमा प्रबंधन, घुसपैठ, पुशबैक, सीमा सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर चर्चा हो रही है। भारत ने बांग्लादेश को हजारों संदिग्ध नागरिकों की सूची सौंपी है, लेकिन उनकी पहचान की प्रक्रिया धीमी बनी हुई है। इसी कारण सीमा पर तनाव और बढ़ा है।
दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों और कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने इस अभियान का विरोध शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि कार्रवाई एक विशेष समुदाय के खिलाफ की जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी भी संप्रभु राष्ट्र को अपनी सीमाओं की रक्षा करने का अधिकार नहीं है? क्या भारत अपनी सुरक्षा, रोजगार और संसाधनों को अवैध घुसपैठियों के हवाले कर दे? वर्षों से देश के कई हिस्सों में अवैध घुसपैठ के कारण सामाजिक तनाव, अपराध और राजनीतिक असंतुलन की शिकायतें उठती रही हैं। ऐसे में अब कठोर कार्रवाई को राष्ट्रीय हित में आवश्यक माना जा रहा है।
देखा जाये तो मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी की इस मुहिम ने स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल अब तुष्टीकरण की राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देगा। यह सीमाओं की रक्षा का अभियान है। बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए अब सीधा संदेश है कि भारत की धरती पर अवैध तरीके से रहने का दौर खत्म हो चुका है। जो लोग फर्जी पहचान और गैरकानूनी दस्तावेजों के सहारे यहां टिके हुए हैं, उन्हें कानून के सामने जवाब देना ही होगा।
बहरहाल, देश की जनता अब यही उम्मीद कर रही है कि यह अभियान केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित न रहे बल्कि पूरे देश में अवैध घुसपैठ के खिलाफ व्यापक राष्ट्रीय अभियान चलाया जाए ताकि भारत की सीमाएं सुरक्षित रहें और देश की आंतरिक व्यवस्था पर कोई बाहरी खतरा हावी न हो सके।