By अंकित सिंह | Nov 06, 2026
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार, उद्योग जगत के हितधारकों और आम जनता के बीच बेहतर सहयोग का आह्वान किया है। उन्होंने 6 नवंबर को उत्सरी इको पार्क में 'पश्चिम बंगाल औद्योगिक संवर्धन नीति' (West Bengal Industrial Promotion Policy) की शुरुआत के दौरान यह बात कही। वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए, अधिकारी ने टीम वर्क के महत्व पर जोर दिया और कहा कि बीजेपी कोई पारिवारिक पार्टी नहीं है। बीजेपी कोई क्षेत्रीय पार्टी भी नहीं है। बीजेपी-एनडीए 21 राज्यों में काम कर रही है। यूपी, महाराष्ट्र और गुजरात हमसे आगे हैं, और हम उनसे 1000 किलोमीटर पीछे हैं। मुझे आपका पूरा सहयोग, सलाह, सुझाव और एक अच्छी टीम के रूप में काम करने की जरूरत है। जन प्रतिनिधि, कानून निर्माता, नीति निर्माता, कैबिनेट, नौकरशाही, उद्योगपति, निवेशक, ट्रेड यूनियन के पदाधिकारी और पश्चिम बंगाल की जनता - हम सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
राज्य मंत्री तापस रॉय ने इस नीति को "धनतेरस, काली पूजा और दिवाली से पहले पश्चिम बंगाल के सभी उद्योगों, उद्योगपतियों, व्यापार जगत के नेताओं और उद्यमियों के लिए मुख्यमंत्री की ओर से एक उपहार" बताया। राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने इस नीति को "हमारे निवेश का मूल ढांचा" करार दिया, जो निवेशकों के लिए एक अनुकूल माहौल का संकेत है। उन्होंने कहा कि आज हमने अपने निवेश का मूल ढांचा पेश किया है। इसके पीछे की वजह बहुत सरल है; लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि पश्चिम बंगाल निवेशकों और व्यवसायों के लिए एक अनुकूल जगह नहीं है। आज हम यह संदेश दे रहे हैं कि आपका स्वागत है, और ये वे मुख्य ढांचे हैं जिनके आधार पर आप अपना कामकाज कर सकते हैं। हो सकता है कि ये ढांचे कुछ लोगों को बहुत अच्छे लगें, जबकि कुछ को ये शायद पर्याप्त न लगें... लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे कम से कम एक तरह की निश्चितता (predictability) मिलती है। अब लोगों को पता है कि पश्चिम बंगाल उन्हें क्या पेशकश कर रहा है।
पश्चिम बंगाल की मंत्री मौमिता बिस्वास मिश्रा ने इस नीति को दीवाली और धनतेरस से पहले का सबसे बेहतरीन तोहफा" बताया। उन्होंने कहा कि पिछली व्यवस्था में मौजूद कमियों के कारण इस नीति की बहुत ज़रूरत थी। उन्होंने बताया कि पहले ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। ज़मीन उपलब्ध नहीं थी, कोई ठोस नीति नहीं थी, और जब भी कोई उद्योगपति कोई प्रोजेक्ट शुरू करने की कोशिश करता, तो उसके लिए कोई तय समय-सीमा नहीं होती थी। फाइलें बस एक डेस्क से दूसरी डेस्क पर घूमती रहतीं और कहीं अटक जाती थीं, जिससे उद्योगपति यहाँ काम करने से हतोत्साहित हो जाते थे। आज, जैसा कि आपने देखा है, हमने एक स्पष्ट समय-सीमा तय कर दी है—हमने एक निश्चित समय के भीतर सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने का वादा किया है। हमारा एक मिशन और विज़न है: पश्चिम बंगाल को उसका पुराना गौरव वापस दिलाना। अगर आप इतिहास देखें, तो पाएंगे कि कभी पश्चिम बंगाल में उद्योग और व्यापार बहुत फला-फूला करते थे—हम उसी दौर को वापस लाना चाहते हैं। हम सभी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।