West Bengal Investment Policy: नई नीति में उद्योगों को 120 प्रतिशत तक वित्तीय मदद

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 05, 2026

कोलकाता, पांच नवंबर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को राज्य की निवेश प्रोत्साहन नीति, 2026 पेश की जिसमें रोजगार सृजन को औद्योगिक प्रोत्साहन का प्रमुख आधार बनाया गया है। नीति के तहत पात्र इकाइयों को संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश के मुकाबले 120 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता देने और मंजूरी एवं भुगतान के लिए समयसीमा तय करने का प्रावधान है। पश्चिम बंगाल निवेश प्रोत्साहन नीति नौ मई से प्रभावी है।

इसका उद्देश्य नए निवेश आकर्षित करना, औद्योगीकरण को गति देना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। इसके तहत सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), बड़ी औद्योगिक इकाइयों, रणनीतिक एवं विशाल परियोजनाओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, वित्त और शिक्षा जैसे सेवा क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस नीति में नियोक्ताओं के कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) अंशदान की प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान किया गया है।

एमएसएमई को महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए 10 साल तक नियोक्ता के ईपीएफ अंशदान की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी, जबकि पुरुष कर्मचारियों के मामले में यह 50 प्रतिशत होगी। वहीं, 200 से अधिक कर्मचारियों वाली सेवा क्षेत्र की इकाइयों को महिला कर्मचारियों के लिए 75 प्रतिशत और पुरुष कर्मचारियों के लिए 50 प्रतिशत अंशदान प्रतिपूर्ति पांच साल तक मिलेगी। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कम-से-कम 200 और अन्य क्षेत्रों में कम-से-कम 400 रोजगार सृजित करने वाली बड़ी इकाइयों एवं विशाल परियोजनाओं को पांच साल तक ईपीएफ अंशदान की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी।

किसी इकाई को मिलने वाली कुल सहायता संयंत्र एवं मशीनरी में पात्र स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक सीमित होगी। विशेष प्रोत्साहन वाले क्षेत्रों या प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में यह सीमा 110 प्रतिशत और दोनों श्रेणियों में आने वाली इकाइयों के लिए 120 प्रतिशत होगी। सहायता निर्धारित सीमा पूरी होने या वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के 10 साल बाद, दोनों में से जो पहले हो, समाप्त हो जाएगी।

राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, दवा, चिकित्सा उपकरण, वाहन विनिर्माण, विशेष इस्पात, पेट्रोरसायन, विमानन और जहाज निर्माण सहित कई क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन के लिए चिह्नित किया है। कम औद्योगिक विकास वाले क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी अतिरिक्त लाभ दिए जाएंगे। विनिर्माण इकाइयों को राज्य माल एवं सेवा कर (एसजीएसटी) से जुड़ी सहायता, बिजली शुल्क की पांच साल तक प्रतिपूर्ति और जमीन पर चुकाए गए स्टाम्प शुल्क की प्रतिपूर्ति मिलेगी।

एमएसएमई को ऋण ब्याज और नई प्रौद्योगिकी अपनाने में भी सहायता दी जाएगी। सेवा क्षेत्र की इकाइयों को किराये के परिसर के लिए पांच साल तक सहायता मिलेगी। नीति में अस्पतालों, चिकित्सा महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों जैसे गैर-लाभकारी संस्थानों को भी शामिल किया गया है।

इसके लिए कम-से-कम 100 करोड़ रुपये का निवेश और 10 साल तक कम-से-कम 25 प्रतिशत क्षमता सरकार द्वारा अधिसूचित वर्गों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य होगा। निवेश प्रक्रिया के तहत एकल खिड़की पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। आशय प्रमाणपत्र 30 दिन और उत्पादन शुरू होने के 45 दिन के भीतर पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने का प्रावधान है।

प्रोत्साहन राशि का भुगतान दावे की मंजूरी के 30 दिन के भीतर सीधे इकाई को किया जाएगा। बड़ी परियोजनाओं के लिए एक प्रतिबद्ध अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जबकि मुख्य सचिव हर महीने उनकी प्रगति की समीक्षा करेंगे। प्रोत्साहन राशि के वितरण के लिए एक अलग कोष बनाया जाएगा।

नीति में भविष्य में होने वाले बदलावों से निवेशकों को पहले से स्वीकृत लाभ में कटौती नहीं की जा सकेगी। आवेदन, मंजूरी और भुगतान की प्रक्रिया जहां तक संभव हो, बिना मानवीय हस्तक्षेप के पूरी की जाएगी।

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