3 गैर मुस्लिम...5 साल वाली शर्त खारिज, वक्फ एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसला में क्या-क्या? 5 लाइन में जानें

By अभिनय आकाश | Sep 15, 2025

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतरिम सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की कुछ धाराओं पर रोक लगाने का आदेश दिया। अदालत ने वक्फ बनाने वाले और अतिक्रमण के विवादों का निपटारा करने वाले से संबंधित प्रावधानों पर रोक लगा दी, साथ ही वक्फ बोर्डों के गठन पर भी सिफारिशें जारी कीं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया कि नए कानून को संवैधानिक चुनौतियों के बड़े मामले की सुनवाई के दौरान वक्फ अधिनियम को पूरी तरह से स्थगित करने का कोई मामला नहीं बनाया गया है।  भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हमने पाया है कि पूरे अधिनियम को चुनौती दी गई है, लेकिन मूल चुनौती धारा 3(आर), 3सी, 14 थी। हमने 1923 के अधिनियम के विधायी इतिहास का अध्ययन किया है और प्रत्येक धारा के लिए प्रथम दृष्टया चुनौती पर विचार किया है और पूरे कानून के लिए पक्षों को सुनने का कोई प्रावधान नहीं था। लेकिन जिन धाराओं को चुनौती दी गई है, उन पर हमने स्थगन आदेश दिया है। 

वक्फ संपत्ति सत्यापन संबंधी प्रावधानों पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 3सी(2) के प्रावधान पर भी रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि किसी संपत्ति को तब तक वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा जब तक कि कोई सरकारी अधिकारी संभावित अतिक्रमण की सूचना न दे। धारा 3सी(3), जिसके तहत अधिकारी को राजस्व रिकॉर्ड को अद्यतन करना और संपत्ति सरकारी होने पर राज्य सरकार को रिपोर्ट करना आवश्यक था, को भी निलंबित कर दिया गया है।

ज़िला कलेक्टर की शक्तियाँ प्रतिबंधित

अदालत ने धारा 3सी(4) पर रोक लगा दी, जो ज़िला कलेक्टर को यह निर्धारित करने का अधिकार देती थी कि कोई संपत्ति सरकारी है या नहीं और आदेश पारित कर सकती थी। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा, "कलेक्टर को अधिकार निर्धारित करने की अनुमति देना शक्तियों के पृथक्करण के विरुद्ध है। किसी कार्यपालिका को नागरिकों के अधिकार निर्धारित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। 

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शक्तियों के पृथक्करण पर बल

जिला कलेक्टर को दी गई व्यापक शक्तियों पर प्रकाश डालते हुए, न्यायालय ने कहा कि कलेक्टर को नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों का न्यायनिर्णयन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और यह शक्तियों के पृथक्करण का उल्लंघन होगा। जब तक न्यायाधिकरण द्वारा न्यायनिर्णयन नहीं हो जाता, तब तक किसी भी पक्ष के विरुद्ध कोई तृतीय-पक्ष अधिकार नहीं बनाया जा सकता। कलेक्टर को ऐसी शक्तियों से संबंधित प्रावधान पर रोक रहेगी। इस अधिनियम का विरोध कर रहे मुस्लिम संगठनों ने कहा था कि इस प्रावधान से वक्फ संपत्तियों पर अवैध दावे हो सकते हैं।

हस्तक्षेप पर न्यायालय की चेतावनी

मुख्य न्यायाधीश गवई ने यह भी दोहराया कि पाँच साल की प्रैक्टिस के नियम को स्थगित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना किसी तंत्र के, इससे मनमानी शक्ति का प्रयोग होगा। न्यायालय ने ज़ोर देकर कहा कि वह आमतौर पर क़ानूनों को संवैधानिक मानता है और केवल "दुर्लभतम मामलों" में ही हस्तक्षेप करता है।

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