By अभिनय आकाश | Sep 05, 2026
महाराष्ट्र में केवल महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया एफएसएसएआई ने ओल्ड मोंक रम की बिक्री पर रोक लगाई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई में रम की बिक्री पर लगाई गई रोक पर अंतरिम स्टे लगाने से कोर्ट ने इंकार कर दिया। एफएसएसएआई ने ओल्ड मक की बोतल पर मिसलीड करने वाली लेबलिंग और गलत दावों को लेकर महाराष्ट्र में इसकी बिक्री पर रोक लगा दी थी और इस पर इस बिक्री पर अंतरिम स्टे लगाने को लेकर कोर्ट से सुनवाई हुई कोर्ट में लेकिन कोर्ट ने मना कर दिया।
रम बनाने वाली कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंग वाटर की ओर से एडवोकेट नवरोज सिरावाई दलील दे रहे थे। एफएसएसएआई के नियम न्यूट्रल स्पिरिट में तय फ्लेवर मिलाने की इजाजत देते हैं। ऐसा उन्होंने कहा। उन्होंने कहा कि सभी सामग्री जो सभी कंटेंट्स हैं वो पैकेजिंग पर लिखे गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दूसरी कॉम्पिटिटिव ब्रांड्स भी यही प्रोसेस अपनाती हैं। लेकिन सिर्फ ओल्ड मॉक को टारगेट किया जा रहा है। तो इसके जवाब में एडिशनल सॉललीिसिटर जनरल अनिल सिंह ने दलील दी कि रूल्स के तहत रम का असली टेस्ट गन्ने के फर्मेंटेशन से आना चाहिए।
कोर्ट में FSSAI का पक्ष साफ़ है। जांच के दायरे में आए 'ओल्ड मोंक' के वैरिएंट्स मुख्य रूप से न्यूट्रल स्पिरिट (एक बहुत शुद्ध, बिना स्वाद वाला इथेनॉल) से बनाए जाते हैं, जिसमें मैच्योर रम स्पिरिट का हिस्सा बहुत कम होता है। रम का खास स्वाद और खुशबू, गन्ने से बने वॉश के फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और लकड़ी के बैरल में एजिंग (पुराना करने की प्रक्रिया) से नहीं, बल्कि बाहर से रम फ्लेवरिंग मिलाकर लाई जाती है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (अल्कोहलिक बेवरेजेज) रेगुलेशंस, 2018' के तहत, रम के तौर पर बेचे जाने वाले प्रोडक्ट में "रम से जुड़ा खास स्वाद और खुशबू" होनी चाहिए। यह स्वाद और खुशबू स्टैंडर्ड प्रोडक्शन तरीकों से आनी चाहिए, न कि ऐसे फ्लेवरिंग से जो इन खूबियों की नकल करते हों। खबरों के मुताबिक, रेगुलेटर की लैब टेस्टिंग में कई पॉपुलर ब्रांड्स में आर्टिफिशियल या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवरिंग पदार्थ पाए गए। इनमें ओल्ड मोंक रम वैरिएंट्स, मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की, ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम, एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की शामिल हैं। इन नतीजों के आधार पर, FSSAI ने कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के खिलाफ बिक्री पर रोक लगाने के आदेश जारी किए। साथ ही, यह तर्क दिया कि कंज्यूमर्स को गुमराह करने से बचने के लिए ऐसे प्रोडक्ट्स को "रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट" या "व्हिस्की-फ्लेवर्ड स्पिरिट" के तौर पर रीक्लासिफाई किया जाना चाहिए। एक खास विवाद का मुद्दा कुछ ओल्ड मोंक लेबल्स पर "7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड" का दावा है। FSSAI का कहना है कि इसमें बिना एजिंग वाली न्यूट्रल स्पिरिट मुख्य सामग्री है, जबकि मैच्योर रम ब्लेंड का 5% से भी कम हिस्सा है। लेबलिंग नियमों के अनुसार, उम्र का दावा मिक्स में मौजूद सबसे कम उम्र की स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए; इसलिए, उम्र का यह दावा गुमराह करने वाला हो सकता है। कोर्ट ने अभी मामले के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं सुनाया है। कोर्ट ने मोहन मीकिन (और संबंधित मैन्युफैक्चरर्स) द्वारा जमा किए गए संशोधित लेबल मॉकअप की जांच के लिए FSSAI को और समय दिया और अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 के लिए तय की।