Chai Par Sameeksha: Haryana, Jammu-Kashmir में हार के बाद Congress का Maharashtra, Jharkhand में क्या होगा

By अंकित सिंह | Oct 14, 2024

प्रभासाक्षी के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने हरियाणा और जम्मू कश्मीर चुनाव नतीजों का विश्लेषण किया। साथ ही साथ कांग्रेस की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा की। इस दौरान हमने यह समझने की भी कोशिश की कि हरियाणा और जम्मू कश्मीर चुनाव के प्रदर्शन के बाद भाजपा की आत्मविश्वास में किस तरीके की वृद्धि हुई होगी। नीरज दुबे ने हमारे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इसमें कोई दोराय नहीं है कि जम्मू कश्मीर और हरियाणा में जिस तरीके से नतीजे सामने आए हैं, उसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद है और महाराष्ट्र और झारखंड में भी उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हुई होगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जो बार-बार यह दावा करते थे कि हमने नरेंद्र मोदी को झुका दिया, ऐसे में यह चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। नरेंद्र मोदी का जलवा अभी भी कायम है। 

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नीरज दुबे ने कहा कि भाजपा की जो रणनीति थी वह सबको साथ लेकर चलने की थी और भाजपा ने इस बार लोकसभा चुनाव की तरह दुष्प्रचार को हावी नहीं होने दिया। राहुल गांधी ने जलेबी वाला मुद्दा उठाया तो भाजपा ने उसको भुनाने की कोशिश की। नीरज दुबे ने कहा कि इस बार भाजपा ने राष्ट्रीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि हरियाणा में स्थानीय मुद्दों पर चुनाव लड़ा है। साथ ही साथ जातीय समीकरणों को साधा है। वहीं, कांग्रेस में बिखराव था। कांग्रेस के नेता आपस में ही लड़ रहे थे। हरियाणा में कांग्रेस की कमान संभाल रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा चाहते थे कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हरियाणा में चुनाव प्रचार करने ना आए। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। भाजपा ने रणनीति के तहत दोनों चुनाव लड़ा है और भाजपा को इसमें फायदा भी हुआ है।

महाराष्ट्र और झारखंड को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। राजनीति लोकसभा चुनाव के बाद बदली थी। वह एक बार फिर से यू टर्न ले चुकी है। हरियाणा में प्रेशर भाजपा पर था। लेकिन इस प्रेशर को भाजपा ने हैंडल किया और जबरदस्त जीत हासिल की जिसके बाद अब विपक्ष के ऊपर महाराष्ट्र और झारखंड में प्रेशर आ गया है। कांग्रेस के लिए स्थिति इसलिए खराब हो गई है क्योंकि उसके सहयोगी दल अब आंख दिखाने लगे हैं। कांग्रेस अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही है और उसके बैसाखी लगातार उसके आंख दिखा रहे हैं। कांग्रेस अकेले चलने की कोशिश कर रही है। यही कारण है कि सहयोगी दल उनसे नाराज चल रहे हैं।

- अंकित सिंह

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