तिहाड़ जेल में ऐसा क्या हुआ कि बदल गए केजरीवाल-सिसोदिया?

By एकता | Aug 30, 2026

बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के मानव सेवा के 45 साल पूरे होने के मौके पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत आप के अन्य नेता शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर, बेंगलुरु में किया गया था।

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अब मैं आर्ट ऑफ लिविंग परिवार का सदस्य हूं

केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने पिछले सप्ताह ही सुदर्शन क्रिया सीखी है और अब वह औपचारिक रूप से आर्ट ऑफ लिविंग परिवार का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि उन पर झूठे आरोप लगाए गए, जिसके चलते उन्हें तिहाड़ जेल जाना पड़ा। हालांकि, उस दौरान एक अच्छी बात यह हुई कि मनीष सिसोदिया ने तिहाड़ जेल में सुदर्शन क्रिया सीखी।

केजरीवाल ने बताया कि जेल से बाहर आने के बाद सिसोदिया ने उन्हें भी सुदर्शन क्रिया करने के लिए प्रेरित किया और बताया कि इसका अनुभव कितना अच्छा था।

सिसोदिया बोले- जेल में सीखी सुदर्शन क्रिया

मनीष सिसोदिया ने कार्यक्रम में कहा कि वह खुद को बेहद भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें अपने जीवन में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जैसे गुरु का मार्गदर्शन और ज्ञान मिला।

उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और वह करीब 2008 से गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि शायद वह खुद उस समय इसके लिए तैयार नहीं थे, इसलिए 2008 के बाद भी लंबे समय तक उन्होंने सुदर्शन क्रिया नहीं सीखी।

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भगवान अपने तरीके से सब कुछ करते हैं

सिसोदिया ने कहा कि जैसा कहा जाता है, भगवान अपने तरीके से सब कुछ करवाते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जेल जाना पड़ा और वहीं उन्होंने सुदर्शन क्रिया सीखी। उन्होंने अपने बारे में कहा, “मैंने कुछ गलत नहीं किया था।” सिसोदिया ने कहा कि शायद उन्हें जेल में जाने का एक कारण उन किताबों और उस ज्ञान से भी जुड़ा था, जिन्हें उन्होंने पढ़ा था।

सुदर्शन क्रिया ने जेल में मानसिक मजबूती दी

सिसोदिया ने बताया कि उन्होंने जेल में सुदर्शन क्रिया सीखी और उसका काफी अभ्यास किया। उनके मुताबिक, इससे उन्हें ‘समाधि’ की गहरी अवस्थाओं का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सुदर्शन क्रिया और गुरुदेव के प्रवचनों के सार वाली कई किताबें नहीं मिली होतीं, तो वह 18 महीने जेल में इतनी मानसिक मजबूती और धैर्य के साथ नहीं बिता पाते।

सिसोदिया ने कहा कि इसका असर सिर्फ जेल के दौरान ही नहीं, बल्कि जेल से बाहर आने के बाद भी रहा और शायद जेल जाने से पहले भी इसका महत्व उनके लिए अलग होता।

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