Prabhasakshi Exclusive: Xi Jinping-Joe Biden Meeting में ऐसा क्या हुआ जिससे भारत को चिंतित होने की जरूरत है?

By नीरज कुमार दुबे | Nov 16, 2023

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को आप कैसे देखते हैं? क्या दोनों देशों की दूरियां कम हो रही हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि बाइडन ने जिनपिंग के लिए जो सम्मान और गर्मजोशी दिखाई वह अद्भुत थी। उन्होंने कहा कि बाइडन ने सैन फ्रांसिस्को से लगभग 30 मील (48 किमी) दक्षिण में फिलोली एस्टेट में चीनी नेता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि APEC की बैठक अपेक्षाकृत चीनी आर्थिक कमजोरी, पड़ोसियों के साथ बीजिंग के क्षेत्रीय झगड़े और मध्य पूर्व संघर्ष के बीच हो रही है जो अमेरिका को सहयोगियों से विभाजित कर रहा है।

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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि दोपहर के भोजन के बाद, लगभग चार घंटे तक चली बातचीत के बाद नेताओं ने उस हवेली के सुव्यवस्थित बगीचे में एक साथ थोड़ी देर की सैर भी की। यह पूछे जाने पर कि बातचीत कैसी चल रही है, तो बाइडन ने पत्रकारों की ओर हाथ हिलाया और संकेत दिया कि सब "ठीक है"। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने अमेरिका-चीन संबंध को "दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंध" करार दिया। उन्होंने कहा, "चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे दो बड़े देशों के लिए, एक-दूसरे से मुंह मोड़ना कोई विकल्प नहीं है।" उन्होंने कहा कि यह दोनों नेताओं की एक साल के भीतर दूसरी बार आमने-सामने की मुलाकात थी। दोनों पिछले साल 14 नवंबर को इंडोनेशिया के बाली में जी20 शिखर-सम्मेलन से इतर व्यक्तिगत रूप से मिले थे।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि शी की अमेरिका यात्रा के बारे में चीन ने कहा था कि बीजिंग प्रतिस्पर्धा से नहीं डरता, लेकिन हम इस बात से सहमत नहीं हैं कि चीन-अमेरिका संबंध प्रतिस्पर्धा से परिभाषित होने चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि अमेरिका को चीन के हितों को लेकर अपनी चिंताओं पर जोर देने के बजाय उसकी चिंताओं का और विकास के वैध अधिकार का सम्मान करना चाहिए। चीनी प्रवक्ता ने कहा था कि चीन नहीं चाहता कि अमेरिका बदले और ना ही अमेरिका को चीन को बदलने का प्रयास करना चाहिए। चीनी प्रवक्ता ने कहा था कि उसे उम्मीद है कि अमेरिका उसके साथ नया शीत युद्ध नहीं चाहने और स्थिर विकास के लिए द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने के लिए चीन के साथ काम करने की अपनी प्रतिबद्धता पर अमल करेगा।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि चार घंटे की मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने उच्च स्तरीय सैन्य संचार, मादक द्रव्य विरोधी सहयोग और कृत्रिम मेधा पर चर्चा फिर से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एक संवाददाता सम्मेलन में बाइडन ने कहा, ‘‘क्या जरूरी है और क्या नहीं है, क्या हानिकारिक है और क्या संतोषजनक है, यह सब कुछ निर्धारित करने के लिए यह सही दिशा में उठाया गया कदम है। अमेरिका पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ अपनी प्रतिस्पर्धा जारी रखेगा, लेकिन हम इस प्रतिस्पर्धा को जिम्मेदारी के साथ जारी रखेंगे, ताकि यह किसी विवाद में न बदल जाए।’’ बाइडन ने कहा कि जब दोनों पक्षों में बातचीत नहीं होती है तो ‘‘मतभेद बढ़ जाते’’ हैं, ऐसे में अब दोनों राष्ट्रपतियों को ‘‘एक दूसरे का फोन उठाकर सीधे तौर पर एक दूसरे की बात सुननी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि पिछले साल तत्कालीन अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे के बाद चीन ने सैन्य संचार बंद कर दिया था। बीजिंग स्व-शासित ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और जरूरत पड़ने पर बलपूर्वक इस पर अधिकार स्थापित करने की धमकी देता है। उन्होंने कहा कि संवाददाता सम्मेलन में बाइडन ने कहा कि हालांकि, उनके बीच कई मतभेद थे, लेकिन शी ‘‘अपनी बात को लेकर स्पष्ट रहे।’’

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि दोनों पक्षों ने उन क्षेत्रों में कई अन्य समझौतों की भी घोषणा की जो हाल के दिनों में तनाव की वजह बने हुए थे। दोनों देश संयुक्त रूप से कृत्रिम मेधा (एआई) में अपार संभावनाएं तलाशने पर सहमत हुए। उन्होंने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच संवाद शुरू होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह शिखर बैठक न सिर्फ राष्ट्रपति बाइडन के दृष्टिकोण से, बल्कि राष्ट्रपति शी के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। चीन की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। उसकी विकास यात्रा में कुछ मुद्दे हैं, बेरोजगारी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं और दो युद्ध भी जारी हैं- एक पश्चिम एशिया में और एक यू्क्रेन में। इसलिए उसे एक ऐसे चीन की जरूरत है, जो स्थिर हो, उसे एक ऐसे चीन की जरूरत है, जो सहयोगात्मक हो। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से भारत इस पर बहुत गंभीरता से नजर रखे हुए है।

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