By नीरज कुमार दुबे | Mar 06, 2025
प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि अमेरिका से चल रही टैरिफ वार के बीच चीन ने सैन्य आधुनिकीकरण के लिये रक्षा बजट बढ़ाकर 249 अरब डॉलर कर दिया है और कहा है कि शांति-संप्रभुता की रक्षा केवल ताकत से संभव है। इसके अलावा जेलेंस्की-ट्रंप में नोकझोंक के बाद चीन का यूरोपीय संघ के साथ संबंध बेहतर करने पर जोर दिख रहा है। इन मुद्दों को कैसे देखते हैं आप? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि चीन ने अपने राष्ट्रीय रक्षा बजट में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है जिससे इस वर्ष इसका कुल रक्षा बजट 249 अरब अमेरिकी डॉलर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि लेकिन यदि इस खर्च की अमेरिका के खर्च से मुकाबला करें तो यह कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के बाद चीन के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित देश का नवीनतम रक्षा बजट 890 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। उन्होंने कहा कि चीन की ओर से रक्षा बजट बढ़ाने की घोषणा युद्धपोतों और नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को तेजी से विकसित करने सहित सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के अपने तीव्र प्रयासों के बीच की गई है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि चीन ने रक्षा बजट में वृद्धि के मुद्दे पर कहा है कि शांति-संप्रभुता की रक्षा केवल ताकत से संभव है। उन्होंने कहा कि नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के प्रवक्ता लू किनजियान ने कहा कि ‘‘शांति की रक्षा के लिए ताकत जरूरी है।’’ उन्होंने कहा कि चीन का कहना है कि मजबूत राष्ट्रीय रक्षा क्षमताओं के साथ वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास से जुड़े हितों की बेहतर ढंग से रक्षा कर सकता है, एक प्रमुख देश के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकता है और विश्व शांति और स्थिरता की रक्षा कर सकता है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जहां तक चीन और यूरोपीय संघ की नजदीकियों की बात है तो इसमें कोई दो राय नहीं कि यूक्रेन युद्ध समाप्त करने को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच गहराते मतभेद, खासकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच बैठक में नोकझोंक के बाद चीन यूरोपीय संघ के साथ अपने संबंधों को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के प्रवक्ता लू किनजियान ने कहा है कि चीन एकतरफा तरीके से लिए गए फैसले के खिलाफ 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ काम करने को तैयार है। उन्होंने बताया कि लोउ ने कहा है कि पिछले 50 वर्ष में तथ्यों ने बार-बार साबित किया है कि चीन और यूरोप के बीच हितों का कोई मौलिक टकराव या भू-राजनीतिक संघर्ष नहीं है; बल्कि, वे साझेदार हैं जो एक-दूसरे की सफलता में योगदान करते हैं।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि चीन यूरोपीय संघ के साथ अपने संबंधों को बढ़ाना चाहता है, जिसे वह चीनी उत्पादों, विशेष रूप से एआई से लैस अपने ई-वाहनों और बैटरियों के लिए एक आकर्षक बाजार मानता है। उन्होंने कहा कि वैसे यूरोपीय संघ ने स्वदेशी मॉडलों की सुरक्षा के लिए चीनी ई-वाहनों पर भारी शुल्क लगाया है। उन्होंने कहा कि चीन हाल में जेलेंस्की और ट्रंप के बीच बैठक में नोकझोंक के बाद रणनीतिक गठबंधनों में आए तेज बदलाव का भी फायदा उठाना चाहता है। उन्होंने कहा कि दरअसल यूक्रेन को लेकर अलग-अलग रुख के कारण अमेरिका-यूरोपीय संघ के घनिष्ठ संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इसके अलावा ट्रंप के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बेहतर हो रहे संबंधों को लेकर भी चीन बेचैन है। उन्होंने कहा कि चीन और रूस के बीच अमेरिका और उसके सहयोगियों से खतरों के मद्देनजर वर्षों से एक करीबी गठबंधन बना हुआ है। उन्होंने कहा कि एक मार्च को पुतिन ने अपने शीर्ष सुरक्षा अधिकारी सर्गेई शोइगु को यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ रूस की वर्तमान वार्ता के बारे में राष्ट्रपति शी जिनपिंग को जानकारी देने के लिए बीजिंग भेजा था। उन्होंने कहा कि लेकिन फिर भी चीन काफी सतर्क है और रूस तथा अमेरिका के ठीक होते संबंधों पर नजर रखे हुए है।