क्या है भारत का व्हाइट रैबिट? अमेरिका के GPS की कर देगा पूरी तरह से छुट्टी!

By अभिनय आकाश | Jul 20, 2026

आज अगर अमेरिका अपने जीपीएस सिस्टम को बंद कर दे तो भारत के बैंक रुक सकते हैं। हमारा स्टॉक मार्केट क्रैश हो सकता है और यहां तक कि हमारा पावर ग्रिड भी ठप हो सकता है। सिर्फ एक छोटे से टाइम सिग्नल की वजह से। लेकिन अब भारत ने पश्चिम की इस गुलामी को जड़ से उखाड़ फेंकने का फैसला कर लिया है। आजादी के बाद भारत के टाइम इंफ्रास्ट्रक्चर में अब सबसे बड़ा और सबसे क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी को तैनात कर दिया है। यह कोई मामूली अपडेट नहीं है। यह भारत की डिजिटल संप्रभुता की घोषणा है। दरअसल हम सबको लगता है कि समय देखने के लिए सिर्फ एक घड़ी काफी है। लेकिन एक देश के लिए समय सिर्फ घंटे और मिनट नहीं होता है। यह डाटा होता है। अब तक भारत समेत दुनिया के अधिकांश देश सटीक समय के लिए अमेरिका के जीपीएस, रूस के ग्लोनस या यूरोप के गैलीलियो सेटेलाइट पर निर्भर थे। हमारे बैंक, टेलीकॉम सेक्टर्स और डिफेंस सिस्टम इन्हीं विदेशी सेटेलाइट से टाइम सिंक करते थे। लेकिन यहां पर एक बड़ा खतरा है द किल स्विच। सोचिए अगर किसी युद्ध की स्थिति में रणनीतिक तनाव के दौरान कोई देश इन सिग्नलों को जाम कर दे या हमें गलत समय भेजना शुरू कर दे जिसे टेक्निकल भाषा में स्पूफिंग कहते हैं तो इसके कई सारे असर होंगे। 

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अब तक चुनौती यह थी कि इस सटीक समय को पूरे देश में बिना किसी देरी के कैसे पहुंचाया जाए। यही काम अब वाइट रैबिट टेक और BSNL का फाइबर नेटवर्क करेगा। और यह काम कैसे करेगा?  फाइबर ऑप्टिक्स की मदद से अब सेटेलाइट से नहीं बल्कि जमीन के नीचे बिछे हुए सुरक्षित फाइबर केबल्स के जरिए यह ट्रैवल करेगा। इन्हीं फाइबर केबल्स के जरिए इंटरनेट भी ट्रैवल करता है। यानी कि नो जैमिंग क्योंकि जब फिजिकल केबल पर है तो इसमें किसी भी विदेशी ताकत या स्पेस से जैम करने का हैक करने का सवाल नहीं है। हालांकि इसके डैमेज का खतरा हो सकता है लेकिन अगर उसे भी फुल प्रूफ कर दिया जाए तो कोई खतरा नहीं। इसके बाद सिंक्रोनाइजेशन, बेंगलुरु, चेन्नई और अन्य शहरों की लैब अब सीधे दिल्ली से जुड़ जाएंगे। इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने भी जब बेंगलुरु में इसका उद्घाटन किया तो यही संदेश था कि भारत अब डिजिटल गुलाम नहीं रहेगा। इस प्रोजेक्ट में इसरो, BSNL, सेबी, एनएससी और कई बड़ी संस्थाएं शामिल है। जब हमारा अपना नेशनल स्टॉक एक्सचेंज इस स्वदेशी टाइमिंग सिस्टम पर चलेगा तो हम ग्लोबल साइबर हमलों से सुरक्षित रहेंगे। यह मेक इन इंडिया का सबसे बड़ा उदाहरण है। 

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