भारत में बना ऐसा चुंबक चीन भी हैरान, ऐसा क्या करेगा कि देश के लिए पैसा खींचकर लाएगा?

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अभिनय आकाश । Jul 20 2026 12:41PM

इंटर्नल एसेस्मेंट से पता चला कि इसमें से करीब 35 लाख करोड़ का सामान भारत में बनाया जा सकता था। जैसे पिछले साल भारत ने 4600 करोड रुपए के जूते के सोल का मोल्ड इंपोर्ट किया। इस तरह की चीज़ें आसानी से भारत में ही 14 दिन में बनाई जा सकती है।

भारत के पोटेंशल को पूरी तरह से इस्तमाल करने के लिए। अब नरेंद्र मोदी ऐसा मेगा प्लान भी बना रहे हैं जिससे भारत के लाखों-करोड़ रुपए बच सकते हैं। भारत ने पिछले वित्तीय वर्ष में करीब सत्तर लाख करोड़ रुपए का सामान इंपोर्ट किया है। इंटर्नल एसेस्मेंट से पता चला कि इसमें से करीब 35 लाख करोड़ का सामान भारत में बनाया जा सकता था। जैसे पिछले साल भारत ने 4600 करोड रुपए के जूते के सोल का मोल्ड इंपोर्ट किया। इस तरह की चीज़ें आसानी से भारत में ही 14 दिन में बनाई जा सकती है। इसके बाद सरकार ने करीब 4 ,90 ,000 करोड़ रुपए के 100 प्रोजेक्ट उनको चिन्हित किया। जो हम अपने यहां बना सकते हैं। ये प्रोड़क्स, फूटवेर, टेक्स्टाइल, ईवी और सोलर पैनल जैसे सेक्टर्स में से खोजे गए। अब इन सारे प्रोड़क्स को बाहर से मंगाने की बजाए, भारत में बनाने पर जोड़ दिया जाएगा। इससे दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी और ग्लोबल क्राइसिस से दिक्कत भी नहीं आएगा। इससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी बचा रहेगा, रूपया मजबूत होगा, देश में रोजगार के नए मौके बनेंगे और महंगाई पर भी कंट्रोल रहेगा। 

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एक तरफ यह सब चल रहा है, रेलवे की तस्वीर बदल रहे है, प्रधानमंत्री मोदी फ्यूचर रेडी भारत की तस्वीर खीच रहे हैं और इधर भारत में फ्यूचर के लिए ऐसी तकनीक भी बन रही है कि दुनिया हैरान है। भारत में ऐसा चुम्बक बना है, जिससे चीन सबसे ज़्यादा हैरान परिशान है। यह चुम्बक देश के लिए पैसा खींच कर लाने वाला चुम्बक है। पैसा मतलब नोत नहीं। दरअसल बैंगलुरू की एक डीप टेक स्टार्टप है, इसने इलेक्टरिक व्हीकल्स के लिए खास तकनीक विकसित करने का दावा किया है, जिससे न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि दुनिया भर के ईवी मार्केट के लिए, इसे गेम चेंजर माना जा रहा है। ईवी मोटर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इस तकनीक को वर्चुअल मैग्नेट मोटर कहा जा रहा है, ये तकनीक इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्यूंकि ईवी मोटर बनाने के लिए, ये चीन से आने वाले रेयर अर्थ मिनिरल्स पर निर्भरता को कम कर सकती है। ई-वी की लागत को स्थिर रख सकती है, ईवी की लागत को स्थिर रख सकती है। आम तौर पर  ईवी में परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर होता है। इसका इस्तमाल किया जाता है, जिससे गाड़ी चलती है, पीएमएस मोटर में नियोडिमियम, लोहा और बोरान के रेयर अर्थ मैग्नेट लगे होते है, इन रेयर अर्थ मैग्नेट की मदद से ही यह मोटर चलती है, जिससे गाड़ी चल पाती है, एक इलेक्ट्रिक व्हीकल में 1-3 किलो का रेयर रेयर अर्थ मैंगनेट लगता है।

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हालिया दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में  कहां कहां से रेयर अर्थ मिनिरल्स मिल सकता है उसके लिए दौरा कर रहे हैं, जिससे चीन पर निर्भरता कम हो। अब बैंगलोर की  कम्पनी वाइमाग इसके मुताबिक उनकी नई तकनीक बिना किसी रेयर अर्थ मैंगनेट के इस्तेमाल को किये मोटर चलाने की क्षमता रखती बल्कि इस कम्पनी ने वर्चुअल मैंग्नेट से चलने वाली मोटर बना दी है इस नई मोटर में कम्पनी ने फिजिकल मैंग्नेट की बजाए इलेक्ट्रॉनिकली जनरेटेड मैंग्नेट का इस्तेमाल किया है जिसकी वजह से इसे वर्चुअल मैंग्नेट कहा जा रहा है यानि इस मोटर में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल होगा जो मैंग्नेट के बगैर मैंग्नेट वाला काम कर रही है। कम्पनी के इंजिनियर्स ने इसे सॉफ्टवेयर कंट्रोल भी बना दिया यानि अपनी सुविधा के अनुसार इसके मैंग्नेटिक फिल्ड को कम और ज्यादा कर सकेंगे वो भी सिर्फ सॉफ्टवेयर से कंट्रोल होना बड़ी बात इसलिए है क्योंकि मोटर चलाना एक बात है लेकिन उसे कंट्रोल्ड तरीके से चलाना अलग बात है तो यानि यहां रेयर अर्थ पर  निर्भरता भी कम होगी, सस्ते में काम होगा, बेहतर काम होगा, पैसा बचेगा।

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