क्या है यूपी का मदरसा कानून, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कैसे मिली लगभग 17 लाख छात्रों को राहत, HC ने क्यों माना था असंवैधानिक?

By अंकित सिंह | Apr 08, 2024

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004 को रद्द करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। उच्च न्यायालय ने इसे "असंवैधानिक" माना था। पिछले महीने, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यूपी सरकार से मदरसा बोर्ड के वर्तमान छात्रों को औपचारिक स्कूली शिक्षा प्रणाली में समायोजित करने के लिए कहा था। हालांकि शीर्ष अदालत ने रोक लगाते हुए इस स्थानांतरण पर रोक लगा दी। 

इलाहाबाद HC ने क्यों रद्द कर दिया था?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004 को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि यह "असंवैधानिक" और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन है। हाई कोर्ट यूपी मदरसा बोर्ड की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था, साथ ही मदरसों का प्रबंधन शिक्षा विभाग के बजाय अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी। याचिकाकर्ता और उनके वकील ने प्रस्तुत किया कि मदरसा अधिनियम धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, जो संविधान की मूल संरचना है। दावा किया गया कि अनुच्छेद 21-ए के तहत अनिवार्य रूप से 14 वर्ष की आयु/कक्षा-आठवीं तक गुणवत्तापूर्ण अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने में विफल है। और मदरसों में पढ़ने वाले सभी बच्चों को सार्वभौमिक और गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा प्रदान करने में विफल है। उन्होंने दावा किया, ''इस प्रकार, यह मदरसों के छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।''

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिकाओं पर केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया। पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। पीठ ने कहा,‘‘ मदरसा बोर्ड का उद्देश्य नियामक सरीखा है और प्रथम दृष्टया इलाहाबाद उच्च न्यायालय की यह बात सही नहीं प्रतीत होती कि बोर्ड का गठन धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन होगा।’’ शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 2004 के अधिनियम के प्रावधानों के गलत अर्थ निकाले। सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मदरसे 120 साल से चल रहे हैं और अचानक रोक लगाने से 17 लाख छात्र और 10 हजार शिक्षक प्रभावित होंगे। 

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