मोदी सरकार की 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' योजना क्या है? इससे संस्थानों और छात्रों को क्या-क्या फायदा मिलेगा?

By कमलेश पांडे | Dec 20, 2024

किसी भी राष्ट्र के निर्माण में शिक्षा का योगदान महत्वपूर्ण होता है। इसलिए केंद्र सरकार ने विकसित भारत 2047, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के लक्ष्यों के अनुरूप वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ओएनओएस) योजना को लागू किया है, जिसके तहत टियर 2 और टियर 3 के शहरों सहित सभी विषयों के छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को फायदा मिलेगा। 


बताया गया है कि यह योजना जनवरी 2025 से लागू होगी। यह सब्सक्रिप्शन इन्फॉर्मेशन एंड लाइब्रेरी नेटवर्क (INFLIBNET) की तरफ से लागू किया जाएगा। इस योजना में प्रमुख प्रकाशकों के तहत एल्सेवियर साइंसडायरेक्ट, स्प्रिंगर नेचर, विले ब्लैकवेल पब्लिशिंग, टेलर एंड फ्रांसिस, सेज पब्लिशिंग, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस और बीएमजे जर्नल्स शामिल हैं।

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दरअसल, यह योजना एक राष्ट्रीय सदस्यता योजना है, जिसके तहत सभी केंद्रीय और राज्य संचालित उच्च शिक्षा संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित पत्रिकाओं का एक्सेस एक ही मंच पर प्रदान किया जाएगा। क्योंकि इस योजना का मकसद सभी सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों को एकीकृत रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिका प्रकाशनों तक पहुंच प्रदान करना है। यह योजना पूरी तरह से नि:शुल्क है और इसका पूरा बजट सरकार वहन करेगी।


इस योजना में उच्च शिक्षा संस्थानों के अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट भी शामिल किए जाएंगे। इस योजना का लाभ उन संस्थानों को मिलेगा, जिनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इस योजना के अंतर्गत 30 अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक शामिल हैं। लगभग 6300 संस्थानों को इस योजना से लाभ मिलेगा। यह योजना सभी शैक्षणिक विषयों को कवर करती है। 


प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह योजना केवल सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों और रिसर्च डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट्स के लिए है। इस योजना के तहत पात्र संस्थानों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा और INFLIBNET के माध्यम से आवश्यक प्रक्रिया का पालन करना होगा। बता दें कि पहले भी अलग-अलग मंत्रालयों के तहत 10 पुस्तकालय संघ थे। इस योजना में शामिल पत्रिकाएं ज्यादातर अंग्रेजी में होंगी, लेकिन कुछ हिंदी में भी हो सकती हैं।


सवाल है कि क्या व्यक्तिगत संस्थान अपनी अलग से सदस्यता ले सकते हैं? तो जवाब होगा कि हां, संस्थान अपनी बजट का इस्तेमाल करके उन प्रकाशकों की सदस्यता ले सकते हैं, जो इस योजना के अंतर्गत नहीं हैं। बता दें कि मोदी सरकार ने छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के विशाल प्रवासी समुदाय को विद्वानों की पत्रिकाओं तक पहुंच का विस्तार करने का निर्णय लिया है। 


इसी पुनीत मकसद से देशवासियों को उन्नत और आधुनिक शिक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र में तीसरी बार सत्तारूढ़ हुई नरेंद्र मोदी सरकार ने आगामी 3 वर्षों (2025-27) के लिए 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना' लागू की है, जिससे लगभग 1.8 करोड़ छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को हाई क्वालिटी वाले पत्र-पत्रिकाएं पढ़ने का लाभ मिल सकेगा। 


उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गत 25 नवम्बर 2024 को वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना को मंजूरी दी है, जिससे सरकारी और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों द्वारा शासित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के शोध-पत्र, लेखों और पत्रिका प्रकाशनों के अध्ययन का लाभ मिल सकेगा। 


केंद्र सरकार की इस योजना के तहत विश्व प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाएं और शोध के अध्ययन के लिए सब्सक्रिप्शन लिया जाएगा, जिसको देश के सभी प्रमुख शिक्षण संस्थानों को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि छात्र और शिक्षक इसका फायदा उठा सकें। सरकार के इस सकारात्मक और दूरदर्शी पहल से लगभग 1.8 करोड़ छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और सभी विषयों के वैज्ञानिकों के लिए विद्वानों की पत्रिकाओं को पढ़ने का मौका मिलेगा। क्योंकि वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना में कुल 30 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय जर्नल प्रकाशकों को शामिल किया गया है, जिनके द्वारा प्रकाशित लगभग 13,000 ई-जर्नल अब 6,300 से अधिक सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों और केंद्र सरकार के अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के लिए सुलभ होंगे। 


इस योजना के तहत पत्रिकाओं के अध्ययन के लिए एक सब्सक्रिप्शन लिया जाएगा, जिसका समन्वय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से किया जाएगा। ये पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से होगा। इसी उद्देश्य से एक नई केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में आगामी 3 कैलेंडर वर्षों, 2025, 2026 और 2027 के लिए वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन के लिए कुल लगभग 6,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 


सच कहा जाए तो वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन, सरकारी संस्थानों में सभी छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए शोध करना आसान बनाकर वैश्विक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में भारत को स्थापित करने की दिशा में एक समय पर उठाया गया अहम कदम है, जिससे हमारे शोध व अनुसंधान क्षेत्र को आशातीत गति मिलेगी।


बता दें कि इस सूची में 6,300 से अधिक संस्थान शामिल हैं, जिनमें लगभग 1.8 करोड़ छात्र, संकाय और शोधकर्ता शामिल हैं। ये संभावित रूप से वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन का लाभ उठा सकेंगे। वहीं, एएनआरएफ समय-समय पर वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन के उपयोग और इन संस्थानों के भारतीय लेखकों के प्रकाशनों की समीक्षा करेगा।


- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

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