क्या है दुनिया के सात विकसित देशों का समूह 'ग्रुप ऑफ सेवन' और भारत का इसमें क्या है रोल?

By अभिनय आकाश | Jun 12, 2021

आप लोगों ने जी-6, जी-7, जी-8, जी-10, जी-20 जैसे टेक्निकल टर्म कई बार सुने होंगे और ये भी सुने होंगे की मोदी जी डी-20 की बैठक में भाग ले रहे हैं या जी-7 की बैठक को डिजीटल माध्यम से संबोधति कर रहे हैं। ऐसे में आज के इस विश्लेषण में आपको बताएंगे की क्या है दुनिया के सात विकासशील देशों का समूह, इसे जी 7 क्यों कहते हैं और भारत का इसमें क्या रोल है?

 सबसे पहले बताते हैं कि जी-7 में जी का मतलब क्या है? 

जी का मतलब है ग्रुप और अगर इसमें सात देश हैं तो ये जी-7 हो गया यानी ग्रुप ऑफ सेवन। दुनिया के 7 सबसे बड़े इंडस्ट्रियल देशों का समूह। यह देश हैं अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान और कनाडा। पहले इसमें रूस भी था तब यह ग्रुप ऑफ 8 था। फिर जब रूस ने क्रीमिया को यूक्रेन से छीन कर खुद में मिला लिया, जिससे बाकी देश नाराज हो गए। उन्होंने 2014 में रूस को इस ग्रुप से बाहर कर दिया। उस साल रूस में ही यह सालाना सम्मेलन होने वाला था। 11 से 13 जून ये 2021 के जी-7 सम्मेलन का कैलेंडर है। जी-7 एक तरह का क्लब है, एकदम पॉश, एलीट, जिसमें दुनिया के सबसे ताकतवर देश इसके मेंबर हैं। ये लोग साल में एक बार मिलकर बैठते है, जो जरूरी लगता है उसपर बात करते हैं। इसी को जी-7 समिट कहते हैं। इस साल ये कार्बिस बे में हो रहा है। भारत के प्रधानमंत्री डिजीटली माध्यम से 12 और 13 जून को इस समिट में हिस्सा ले रहे हैं। 

इसे भी पढ़ें: ओलंपिक में भी चीन का बहिष्कार, भारतीय खिलाड़ियों की किट पर ‘INDIA’ लिखा होगा

जी-7 में किन देशों के किया जाता है शामिल

  • जी-7 में जो देश शामिल हैं, वे कई मामलों में दुनिया में शीर्ष स्थान पर कायम हैं। ऐसी कुछ चीदों के बारे में हम यहां बता रहे हैं- 
  • जी-7 देश दुनिया में सबसे बड़े निर्यातक है।
  • इन देशों के पास सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व है।
  • ये सभी सात देश दुनिया में सबसे बड़े स्तर पर परमाणु ऊर्जा का उत्पादन करते हैं।
  • वर्ष 2018 तक जी7 में शामिल देशों की कुल संपत्ति 317 ट्रिलियन डॉलर (31,700,000 करोड़ डॉलर) थी। जो विश्व की कुल संपत्ति का 58 फीसदी हिस्सा है। 
  • ग्लोबल जीडीपी में जी7 देशों का 46 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा है। 

भारत इसका हिस्‍सा नहीं

वक्त वक्त पर बाहरी देशों को उचित समय में हिस्सा लेने के लिए न्योता दिया जाता है। कई सारे संगठन को भी बुलाया जाता है। भारत बड़ी अर्थव्यवस्था है आबादी में दूसरे नंबर पर है इतना बड़ा व्यापार है यहां इसके अलावा पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं में भी भारत का सहयोग चाहिए। जी-7 देशों के मुखिया से पहले मंत्री और डिप्लोमैट्स की एक मीटिंग होती है। हर सदस्य देश अपने क्रम से इसकी अध्यक्षता करता है और ये सम्मेलन दो दिनों तक चलता है। जी7 समिट में अब तक एनर्जी पॉलिसी, क्लाइमेट चेंज, एचआईवी-एड्स और ग्लोबल सिक्योरिटी जैसे मसलों पर चर्चा हो चुकी है। समिट के अंत में एक मेमोरेंडम जारी किया जाता है, जिसमें उन मुद्दों का जिक्र होता है जिस पर सहमति बनी होती है। भारत इस संगठन का हिस्सा नहीं है। इस बार भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को मेहमान के तौर पर आमंत्रित किया गया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने प्रधानमंत्री मोदी को इस समिट में शामिल होने के लिए विशेष तौर पर आमंत्रित किया था।

क्‍या है भारत का रोल

G7 दुनिया के सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसके अंदर दुनिया के शक्तिशाली देश हैं। आज भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था को भी इसके अंदर आउटरीच सेशन के अंतर्गत इनवाइट किया गया है। इस वर्ष स‍म्‍मेलन की थीम ‘Build Back Better’ है। इस बार के सम्‍मेलन में थीम के आधार पर कोरोना वायरस महामारी के बाद अगली महामारी के लिए खुद को तैयार रखने जैसे मुद्दों पर ध्‍यान दिया जाएगा। साल 2019 में जब फ्रांस ने इस समिट की मेजबानी की थी तो उस समय पहली बार औपचारिक न्‍यौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें शिरकत की थी। पिछले वर्ष यानी साल 2020 में पूर्व अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भारत को इसमें शामिल करने का प्रस्‍ताव दिया था। ट्रंप ने भारत के अलावा ऑस्‍ट्रेलिया, साउथ कोरिया और रूस को भी शामिल करने की बात कही थी। उन्‍होंने कहा था कि इस संगठन को जी10 या फिर जी11 कर देना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: तालिबान से बातचीत करने वाला है भारत! विदेश नीति में इतने बड़े बदलाव की क्या है वजह?

कार्बिस बे में एकत्रित हुए जी-7 के नेता

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने शुक्रवार को कार्बिस बे में जी7 शिखर सम्मेलन में इस समूह के नेताओं का स्वागत किया। कोविड​​​​-19 महामारी की शुरुआत के बाद पहली बार ये नेता एक स्थान पर एकत्रित हुए हैं। इन नेताओं की चर्चा में कोरोना वायरस का मुद्दे के प्रमुखता से छाये रखने की उम्मीद थी। साथ ही धनी देशों के इस समूह के नेताओं द्वारा संघर्षरत देशों के लिए टीके की कम से कम एक अरब खुराक साझा करने के लिए प्रतिबद्धता जताये जाने की उम्मीद थी। दक्षिण-पश्चिम ब्रिटेन में जी-7 शिखर सम्मेलन की शुरुआत होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने 50 करोड़ खुराक और जॉनसन ने कोविड-19 रोधी टीके की 10 करोड़ खुराक साझा करने की प्रतिबद्धता जतायी। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य जोर कोविड-19 से उबरने पर होगा। बाइडन ने कहा, ‘‘हम अपने वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर दुनिया को इस महामारी से बाहर निकालने में मदद करने जा रहे हैं।’’जी-7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अपने वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर हम इस वैश्विक महामारी से दुनिया को छुटकारा दिलाने के लिए काम करेंगे।’’ नेताओं की यह बैठक कारबिस बे के एक रिजॉर्ट में हो रही है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी नई जान आने की उम्मीद है। शुक्रवार को निगमों पर कम से कम 15 फीसदी न्यूनतम वैश्विक कर को औपचारिक रूप से अपनाया जाएगा। इसके लिए इन देशों के वित्त मंत्रियों के बीच एक सप्ताह पहले एक समझौता हुआ था। यह बाइडन प्रशासन के लिए एक संभावित जीत है, जिसने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के भुगतान के तरीके के रूप में वैश्विक न्यूनतम कर का प्रस्ताव किया है। हालांकि जी-7 से अनुमोदन प्रक्रिया में यह सिर्फ एक कदम दूर है तथा उम्मीद है कि कई और देशों द्वारा इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। जॉनसन के लिए दो वर्षों में पहला जी -7 शिखर सम्मेलन ब्रेक्जिट के बाद के ‘‘वैश्विक ब्रिटेन’’ के उनके दृष्टिकोण को सामने रखने का एक मौका है। यह ब्रिटेन-अमेरिका संबंध को रेखांकित करने का एक अवसर भी है। यह एक ऐसा गठबंधन है जिसे अक्सर ‘‘विशेष संबंध’’ कहा जाता है लेकिन जॉनसन ने कहा कि वह इसे ‘‘अविनाशी संबंध’’ कहना पसंद करते हैं। जलवायु परिवर्तन भी एजेंडे में एक शीर्ष मुद्दा है और सैकड़ों प्रदर्शनकारी कॉर्नवाल में एकत्र हुए और नेताओं से कार्रवाई करने का आग्रह किया। औपचारिक शिखर सम्मेलन शुक्रवार को शुरू हुआ जिस दौरान औपचारिक अभिवादन किया गया और एक दूसरे से दूरी रखते हुए समूह तस्वीर खिंचवाई गई। बाद में ये नेता ईडन प्रोजेक्ट में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और राजघराने के अन्य सदस्यों से मुलाकात करेंगे। दुनिया भर में टीकों की आपूर्ति में असमानता के मद्देनजर जी7 नेताओं पर वैश्विक टीका साझा कार्यक्रम की रूपरेखा बताने का दबाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने 50 करोड़ खुराकें दान देने का संकल्प लिया है और व्यापक एवं तीव्र गति से टीकाकरण करने की खातिर सम्पन्न देशों से समन्वित प्रयास करने को कहा। जॉनसन के कार्यालय की ओर से बताया गया कि पहली पांच करोड़ खुराकें आगामी हफ्तों में दी जाएंगी जबकि बाकी की खेप अगले वर्ष देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि जी7 शिखर सम्मेलन में मेरे साथी नेता इसी तरह के संकल्प लेंगे और हम मिलकर अगले वर्ष के अंत तक पूरे विश्व का टीकाकरण कर सकेंगे।’’ उन्होंने उम्मीद जताई कि जी7 समूह में एक अरब खुराकें उपलब्ध करवाने का संकल्प लिया जाएगा। जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शिखर सम्मेलन दुनिया को दिखाएगा ‘‘हम सिर्फ अपने बारे में नहीं सोच रहे हैं।’’ वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों ने अमेरिका के संकल्प का स्वागत करते हुए कहा था कि यूरोप को भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि साल के अंत तक फ्रांस कम से कम तीन करोड़ खुराकें दान देगा। अमेरिका की प्रतिबद्धता वैश्विक कोवैक्स गठबंधन के माध्यम से 92 निम्न-आय वाले देशों और अफ्रीकी यूनियन को वितरण के लिए 50 करोड़ फाइजर खुराक खरीदने और दान करने की है। वहीं जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले यूरोपीय संघ के देशों के नेता शिखर सम्मेलन कार्यक्रम की आधिकारिक शुरुआत से पहले यूरोपीय संघ के शीर्ष अधिकारियों के साथ एकत्रित हुए। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल, इतालवी प्रधानमंत्री मारियो द्राघी, यूरोपीय संघ परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल और यूरोपीय संघ आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चीन के साथ संबंधों के बारे में बात की। वे इस विषय पर बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के साथ चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। बाइडन भी इस शिखर सम्मेलन में हैं। मैक्रों के कार्यालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यूरोपीय स्थिति स्पष्ट है: चीन एक प्रणालीगत प्रतिद्वंद्वी, वैश्विक मुद्दों पर एक भागीदार और एक प्रतियोगी है।

फ्रांस के राष्ट्रपति ने भारत के लिए कही यह बात

फ्रांस के राष्ट्रपति एमेनुअल मैक्रों ने जी7 समूह के महत्वपूर्ण सम्मेलन से पहले भारत और कुछ अन्य देशों के लिये कोरोना वायरस टीकों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की आपूर्ति को आसान बनाने की अपील की और कहा कि ऐसा कोई कदम उनकी जरूरतों के लिये उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अफ्रीकी देशों की मदद के लिये भी बेहद जरूरी है। मैक्रों ने पेरिस में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह कोविड-19 रोधी टीकों पर से अस्थायी रूप से पेटेंट हटाने को लेकर विश्व व्यापार संगठन में भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव का भी समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि फ्रांस जी-7 सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाएगा। उन्होंने कहा कि फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका जी7 शिखर सम्मेलन में प्रस्ताव पेश करेंगे कि राष्ट्रों को बौद्धिक संपदा अधिकारों में छूट पर काम करना चाहिए।

3 सत्र को संबोधित करेंगे पीएम मोदी

पीएम मोदी शनिवार और रविवार के दिन कुल तीन सत्रों को संबोधित करेंगे। इनमें से पहला सत्र आज ही आयोजित होगा। -अभिनय आकाश

प्रमुख खबरें

Iran पर जल्द होगा Big Announcement? अमेरिकी मंत्री Marco Rubio बोले- आखिरी फैसला Donald Trump लेंगे

Health Alert: महिलाओं में Bloating हो सकता है Ovarian Cancer का संकेत, ये लक्षण न करें नजरअंदाज

भारत-अमेरिका दोनों देशों में मौजूद हैं बेवकूफ लोग, USA में Racism पर बोले Marco Rubio

Quetta Train Blast: ईद की खुशियां मातम में बदलीं, Suicide Bomber ने ट्रेन के उड़ाए परखच्चे, 24 जवानों की मौत