Two Front War: एक ही झटके में चित होंगे चीन-पाकिस्तान, भारतीय सेना बनेगी सर्वशक्तिमान, जानें अगले 25 सालों का रोडमैप

By अभिनय आकाश | Dec 14, 2022

"करे ही विनय राम सहि संग लक्ष्मण करत विलंब, सिन्धु प्रण प्रति क्षण, बीते समय न होत प्रतीक्षा, देंगे राम अब सिन्धु को शिक्षा।"

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आज की दुनिया में किसी देश की ताकत का अंदाजा उसकी सैन्य ताकत से लगाया जाता है। इस लिहाज जिस देश की सेना जितनी बड़ी, अत्याधुनिक और संख्याबल में बड़ी होती है, उसे दुनिया में उतना ही ताकतवर माना जाता। अपने इतिहास में हिंदुस्तान ने कई लड़ाइयां लड़ी और लगभग हर बार देश को जीत का गौरव मिला। लेकिन कुछ युद्ध ऐसा भी था जो दरअसल युद्ध नहीं छल की दास्तां थी।  कभी इन युद्ध में भारत को बेहिसाब कामयाबी मिली तो कभी धोखाबाजी की आड़ में पीठ में खंजर भी मिला। 1962 का जंग हो या 1971 में पाकिस्तान की सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर देना। भारतीय योद्धाओं को 1962 में अपनी कमजोरी का अहसास हुआ तो फिर वक्त के साथ उसने अपने आप को और मजबूत करना भी शुरू किया। लेकिन बात चाहे 1962 के जंग की हो, 1971 की या फिर 1999 के कारगिल युद्ध की। भारत ने अलग-अलग मोर्चों पर युद्ध लड़ी है। क्या हो अगर भारत के दो पड़ोसी मुल्क जो आपस में अच्छे दोस्त भी है और विश्व में हिंद के बढ़ते प्रभाव से घबराते भी हैं, यही डर लिए एक साथ आ जाए तो?  भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान संबंधों में हाल के सुधारों के बावजूद, दो मोर्चों पर सैन्य खतरा एक विकट चुनौती रही है। 

क्या होता है टू फ्रंट वॉर?

टू फ्रंट वॉर का मतलब है कि आपकी सीमाओं में दो तरफ से दुश्मन घुस आए हो। यानी आपके जो दुश्मन हैं वो दोनों ही तरफ से घेर कर आपके लिए मुश्किलें पैदा करना शुरू कर दें। ये युद्ध के लिए लिहाज से बहुत कठिन होता है। जब आपको दो दुश्मनों के साथ एक साथ लड़ना पड़े। उनकी कमजोरियां, क्षमता, उनके अटैक के बारे में पहले से जानना होता है। कुल मिलाकर कहें तो टू फ्रंट व़ॉर के अटैक को झेलना और उसे डिफेंस किसी भी देश के लिए बहुत ही मुश्किल भरा होता है। हमें सबसे ज्यादा खतरा चीन और पाकिस्तान से है और उनकी मिलीभगत से ही ऐसा कुछ संभव हो सकता है। विश्व युद्ध के वक्त में दो बार मल्टीफ्रंट वॉर हुए थे। 

मिलिट्री पर GDP का खर्च 

 साल प्रतिशत
 1956 2%
 1963 4%
 1965 3.9%
 1975 3.5%
 2000 2.9%
 2007 2.5%
 2021 2.7%

टू फ्रंट वॉर की कितनी संभावना है? 

वर्तमान की देश-दुनिया की हालात के मद्देनजर टू फ्रंट वॉर की स्थिति को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता है। टू फ्रंट वॉर का कॉन्सेप्ट कोई अभी का नहीं है। ये पिछले कई दशकों से भारत लगातार झेल भी रहा है। हालांकि टू फ्रंट वॉर में चीन सामने आकर कभी भी पाकिस्तान के साथ नहीं लड़ा। लेकिन माना ये ही जाता है कि हर युद्ध के पीछे चीन और पाकिस्तान मिलकर ही लड़ते हैं। 1962 के बाद 1971 के युद्ध में चीन की तरफ से पाकिस्तान को सपोर्ट करने की पूरी कोशिश की गई थी। इसके अलावा जब कारगिल युद्ध के दौरान भारत और पाकिस्तान की जंग हो रही थी तो ईस्टर्न लद्दाख के पैंगोंग इलाकों में चीन ने घुसपैठ की कोशिश की थी और ईस्टर्न लद्दाख के फ्रंट को खोलने की कोशिश की थी। ऐसे में टू फ्रंटवॉर की थ्योरी कोई हवा-हवाई नहीं है। ऐसे में आने वाले वक्त में इस बात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

किन प्वाइंट्स पर इसका खतरा?

कहा जाता है कि युद्ध के मैदान में सरप्राइज इज द बेस्ट एलीमेंट यानी जब आप दुश्मन को चौंका ये सबसे बड़ा हथियार है। ऐसे में आप अगर सोचें की ये इस प्वाइंट से घुसेगा और कहां से अटैक करेगा तो इसकी संभावना ना के बराबर है। दुश्मन उसके विपरीत हमला करेगा। इसके लिए फोर्सेज का इंटीग्रेट होना जरूरी है। इसके अलावा आप कितनी जल्दी ऑफेंसिव या डिफेंसिव हो सकते हैं। यही सबसे बड़ी चुनौती है। कागरिल युद्ध के बाद से ऐसी किसी  भी स्थिति से निपटने पर काम किया जा रहा है। 

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डिफेंस बजट पर कितना असर?

एक मशहूर लाइन है कि जो अपने देश के सीमाओं की हिफाजत नहीं कर सकता, वो देश आगे नहीं बड़ सकता। सुरक्षा सबसे बड़ा फैक्टर होता है। अगर हम टू फ्रंट वॉर की बात करते हैं तो उसकी तैयारियों में पैसा भी लगेगा। यही वजह है कि तीनों सेनाओं को इंटीग्रेट करके काम करना ही सबसे महत्वपूर्ण है। भारतीय सीडीएस यानी चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत साल 2018 से ही साफ करते रहे हैं कि भारत हमेशा शांति चाहता है लेकिन अगर ज़रुरत पड़ी तो वह 2 फ्रंट वॉर के लिए भी तैयार है।

चीन-पाक के खिलाफ भारत का 'पुल'प्लान 

 राज्य पुल
 लद्दाख 7
 हिमाचल 2
 उत्तराखंड 8
 सिक्किम 4
 अरुणाचल प्रदेश 8
 पंजाब 4

आत्मनिर्भरता से ही बनेगी बात

इंडियन एयरफोर्स एलसीए (लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट) वेरिएंट, एमआरएफए (मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट ) और एएमसीए (अडवांस मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट) भी जल्द शामिल करेगा। पांचवीं पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने के लिए भी भारत काम कर रहा है। डीआरडीओ ने एक स्वदेशी अडवांस मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) का डिवेलपमेंट शुरू कर दिया है। अनमैन्ड एयरक्राफ्ट विकसित करने की दिशा में भी काम हो रहा है। हिंद महासागर में जिस तरह चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं, उनसे निपटने कि लिए इंडियन नेवी भी तैयारी कर रही है। जल्द ही नेवी को अपना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर मिल जाएगा जो कि स्वदेशी है। यह पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर होगा। इसके साथ ही नेवी जल्दी ही इस एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए फाइटर जेट भी फाइनल कर लेगी। भारत का जोर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने पर है और इस दिशा में काफी काम हो रहा है।

हर जंग में दिखाया दम

- 1962 के युद्ध में 722 चीनी सैनिक मारे गए, 1700 घायल हुए।

- 1965 के युद्ध में 5988 पाक सैनिक मारे गए।

- 1971 के युद्ध में 93000 पाकिस्तानी सैनिकों ने सरेंडर किया।

- 1999 के युद्ध मं 453 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।  

आधुनिकीकरण पर फोकस

इंडियन आर्मी भी आधुनिकीकरण के दौर में है। सैनिकों के लिए नई असॉल्ट राइफल ली जा रही हैं। एयर डिफेंस से लेकर तोपखाने तक सब मजबूत किया जा रहा है। युद्ध के तरीके जिस तरह बदल रहे हैं, उसे देखते हुए भारतीय सेना का पुनर्गठन किए जाने की दिशा में भी काम हो रहा है।

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 एयरफोर्स के पास फाइटर स्कवॉड्रन 

 1962 22
 1992 39
 2022 32

ज्यादा घातक बनेगी सेना

अभी आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की 17 कमांड हैं। इन सबको मिलाकर चार थिएटर कमांड बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें आर्मी की दो कमांड होंगी। एक वेस्टर्न थिएटर कमांड और दूसरी ईस्टर्न थिएटर कमांड नेवी की एक थिएटर कमांड बनेगी और एक एयर डिफेंस कमांड बनेगी। आर्मी के नॉर्दर्न कमांड को (जो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का इलाका देखती है) और एयरफोर्स के एओसी (एयर ऑफिसर कमांडिंग), जम्मू-कश्मीर को इससे अलग रखा जाएगा और वह अपने मौजूदा स्वरूप में ही रहेंगी। देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने इस दिशा में तेजी से काम करना शुरू भी किया था। थिएटर कमांड का गठन उनके मेंडेट में शामिल था। लेकिन दिसंबर में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत के बाद  (रिटायर्ड) लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान की इस पद पर नियुक्ति हो चुकी है।

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