By अभिनय आकाश | Jan 13, 2026
पाकिस्तानी सेना ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर में मिली हार के बाद लंबी दूरी की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए एक नई रॉकेट फोर्स कमांड की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीएनएन-न्यूज़18 को खुफिया सूत्रों ने बताया कि असीम मुनीर के नेतृत्व में हुए कोर कमांडर्स सम्मेलन ने पिछले महीने इस नई फोर्स की संरचना को मंजूरी दे दी थी और इसके जल्द ही औपचारिक रूप से गठित होने की उम्मीद है। पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व ने दिसंबर में रॉकेट फोर्स कमांड पर चर्चा की थी और ऑपरेशन सिंदूर में हुए नुकसान के बाद इसे एक उच्च तकनीक से लैस बल के रूप में पेश किया था। इसी में एक रॉकेट फोर्स का भी गठन है। ऑपरेशन सिंदूर और उससे पहले से ही दुनिया भर में में अलग-अलग जगह चल रहे संघर्षों ने दिखाया कि लॉन्ग रेंज वेपन की अहमियत बढ़ रही है। ऑपरेशन सिंदूर में भी आमने-सामने की लड़ाई नहीं हुई थी बल्कि लॉन्ग रेंज वेपन का ही इस्तेमाल हुआ था। खुफिया सूत्रों ने कहा, पाकिस्तान अब अपनी लॉन्ग रेंज स्ट्राइक की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पिछले साल ही नई ऑर्मी रॉकेट फोर्स कमांड के गठन का ऐलान किया था। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी आर्मी ने अब इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। भारत में अभी न्यूक्लियर वेपन वाली स्ट्रैटजिक कमांड है। भारतीय सेना के पास रॉकेट तो हैं, लेकिन कोई कमांड जैसा स्ट्रक्चर नहीं है।
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इसके जवाब में, पाकिस्तान ने अपने तथाकथित 'ऑपरेशन बुनियान-उन-मारसूस' के तहत ड्रोन, लोइटरिंग मुनिशन्स, लड़ाकू विमानों और मिसाइलों का प्रक्षेपण किया। हालांकि, भारत की सतर्क सेनाओं और अभेद्य वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी हमलों में से अधिकांश को नाकाम कर दिया, जिनमें नई दिल्ली को निशाना बनाकर दागी गई एक मिसाइल भी शामिल थी। भारत ने चार दिनों तक चले संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी वायु सेना के ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए और कई लड़ाकू विमानों को मार गिराया।
इस बीच, खुफिया सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज़18 को बताया कि भारत भी एक अलग रॉकेट फोर्स स्थापित करने पर विचार कर रहा है, हालांकि इसे अभी तक औपचारिक रूप नहीं दिया गया है। वर्तमान में भारत की सामरिक बल कमान परमाणु हथियारों को नियंत्रित करती है, जबकि अन्य सैन्य बल पारंपरिक हथियारों का प्रबंधन करते हैं। विश्व भर में हाल के युद्धों और संघर्षों के बीच लंबी दूरी की क्षमताओं पर केंद्रित एक नए बल के गठन की आवश्यकता महसूस की गई है, जहां लंबी दूरी की मिसाइलों और रॉकेटों ने युद्धक्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाई है।