By अभिनय आकाश | Sep 14, 2026
चीन ने अमेरिका को ताइवान के मुद्दे पर यह वार्निंग दी है जिसमें चीन ने कहा कि अगर अमेरिका ने ताइवान को नए हथियारों की बिक्री की मंजूरी दी तो इसी महीने होने वाले संभावित ट्रंप जिंनपिंग समिट को रद्द किया जा सकता है। यानी जिस मुलाकात को दुनिया के दो सबसे ताकतवर नेताओं के बीच तनाव कम करने की कोशिश माना जा रहा था, उसी मुलाकात पर अब ताइवान का ब्रेक लगने का खतरा पैदा हो गया है। और सवाल यह है कि ब्रिक्स के मंच पर जिनपिंग ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने का संदेश दिया। लेकिन दिल्ली से निकलते ही अमेरिका को इतनी बड़ी चेतावनी क्यों? क्या ताइवान चीन की वो लाल रेखा है जिस पर बीजिंग अमेरिका से भी सीधी टक्कर लेने को तैयार है और क्या ट्रंप इस बार भी चीन के दबाव के आगे झुकेंगे?
बीजिंग ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और एकीकरण को अपना दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य बताता है। चीन लगातार अमेरिका से कहता रहा है कि ताइवान के साथ सैन्य सहयोग और हथियारों की बिक्री उसकी संप्रभुता के मामले में बाहरी दखल है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी बार-बार कहा है कि अमेरिका को ताइवान को हथियारों की किसी भी सप्लाई को रोकना चाहिए और वन चाइना प्रिंसिपल का पालन करना चाहिए। यानी बीजिंग की नजर में ताइवान सिर्फ कोई सामान्य हथियार सौदे का मुद्दा नहीं है। यह चीन की सबसे संवेदनशील सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी लाल रेखा है।
मई 2026 में जब ट्रंप और जिमपिंग की बीजिंग में हाई लेवल बैठक हुई थी। तब भी ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल था। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक जिंनपिंग ने ट्रंप को चेतावनी दी थी कि अगर ताइवान के मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव हो सकता है। यानी जिनपिंग का संदेश सिर्फ इतना नहीं था कि हमें हथियारों की बिक्री पसंद नहीं बल्कि संदेश इससे ज्यादा गंभीर था कि ताइवान पर गलत कदम उठाया गया तो चीन अमेरिका संबंध सीधे संघर्ष की तरफ जा सकते हैं।