क्या था माओ का 5 फिंगर प्लान, जिसे फॉलो करते हुए जिनपिंग बढ़ा सकते हैं भारत की टेंशन

By अभिनय आकाश | Aug 12, 2026

1958 का वो दौर, जब बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर से माओ त्से-तुंग ने भारत की सीमाओं पर अपने विस्तारवादी मंसूबों की पहली लकीर खींची थी। माओ ने तिब्बत को चीन के दाहिने हाथ की हथेली बताया और लद्दाख, नेपाल, सिक्किम, भूटान व अरुणाचल प्रदेश को उसकी पाँच उंगलियां। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा था कि ये पाँचों इलाके या तो भारत के कब्जे में हैं या उसके सीधे असर मे और इन्हें 'आजाद' कराकर चीन की हथेली से दोबारा जोड़ना बीजिंग का ऐतिहासिक धर्म है। एक ऐसा खतरनाक और अघोषित ब्लूप्रिंट, जिसे चीन ने कभी किसी सरकारी दस्तावेज में दर्ज तो नहीं किया, लेकिन 1962 की जंग से लेकर डोकलाम और गालवान घाटी की हिंसक झड़पों तक भारत को घेरने की हर चीनी चाल के पीछे इसी 'फाइव फिंगर्स ऑफ तिब्बत पॉलिसी' का साया रहा है। आज जब ड्रैगन हमारी सीमाओं पर आँखें दिखा रहा है, तो सवाल उठता है कि क्या चीन आज भी माओ के उसी 68 साल पुराने सपने को पूरा करने की साजिश रच रहा है? आज हम एमआरआई स्कैन करेंगे चीन की उसी सबसे बड़ी और सबसे पुरानी उस गुप्त रणनीति से, जो भारत की संप्रभुता के लिए आज भी सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है।

इसे भी पढ़ें: हो गया खेल! भारत को रोककर खुद रूसी तेल खरीद रहा अमेरिका?

चीन को भारत ने एक बार फिर दो टुक जवाब दिया

अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन को भारत ने एक बार फिर दो टुक जवाब दिया है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि अरुणाचल प्रदेश पर उसका रुख बिल्कुल स्पष्ट और साथ ही चीन के किसी भी दावे या आपत्ति से जमीन पर मौजूद हकीकत नहीं बदलने वाली। तो हुआ यह है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को भारत के नक्शे में आधिकारिक तौर पर दिखाने पर आपत्ति जताई थी। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि चीन की इस आपत्ति से अरुणाचल प्रदेश की स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। मंगलवार 11 अगस्त को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस हकीकत को कोई नहीं बदल सकता। अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और यह एक प्रकार से एक स्वय सिद्ध तथ्य भी है और कोई भी चीज इस निर्वाद निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकता। दरअसल विवाद की शुरुआत तब हुई जब भारत ने अरुणाचल प्रदेश के 27 जगहों और दूसरे ज्योग्राफिकल फीचर्स को उनके आधिकारिक नामों के साथ अपने सरकारी नक्शे में दर्ज किया। इसके एक दिन बाद चीन ने अपनी आपत्ति जताई। चीन अरुणाचल प्रदेश को जांगनान यानी कि साउथ तिब्बत कहता है। बीजिंग का दावा है कि यह इलाका चीन का हिस्सा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गो जियाकुन ने भारत के इस कदम को गैरकानूनी बताया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश को तथाकथित अरुणाचल प्रदेश कहते हुए कहा कि जगहों के नाम बदलने या तय करने से चीन का दावा नहीं बदलेगा। भारत हमेशा से चीन के इस दावे को खारिज करता रहा है। इस बार भी भारत ने साफ-साफ कहा कि चीन की आपत्ति से अरुणाचल प्रदेश के स्टेटस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अब सवाल यह है कि भारत ने आखिर इन 27 जगहों को आधिकारिक नक्शे में दर्ज क्यों किया है? सरकार की तरफ से कहा गया है कि इसका मकसद बॉर्डर को फिर से तय करना नहीं है। बस इन जगहों की सही पहचान और सही नाम सरकारी नक्शे में दर्ज करना है ताकि लोगों को कभी भी इन जगहों के बारे में सही जानकारी मिल सके। तो क्या भारत और चीन के बीच इस मुद्दे पर सिर्फ बयानबाजी ही चल रही है? ऐसा नहीं है। दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए बातचीत भी जारी है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक 6 अगस्त को नई दिल्ली में भारत चीन सीमा मामलों पर काम करने वाले वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन यानी कि डब्ल्यूएमसीसी की 36वीं बैठक हुई। इसमें एलएसी यानी कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल की स्थिति, बॉर्डर मैनेजमेंट, सीमा के बंटवारे से जुड़े मुद्दों और दोनों देशों के बीच बॉर्डर पर सहयोग पर चर्चा हुई। भारत ने इस बैठक में भी साफ कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।

माओ का फाइव फ‍िंगर प्‍लान क्‍या है?

1949 के बाद कम्युनिस्ट पार्टी दुनिया को अलग नजरिए से देखती है। कम्युनिस्ट पार्टी चाइना के जितने भी प्रेसिडेंट बने हैं सब महत्वाकांक्षी रहे हैं। ये महत्वाकांक्षी लोग ये चाहते हैं कि हमारा कब्जा बना रहे। पूरी दुनिया में अलग-अलग क्षेत्रों पर कब्जा करना चाहते हैं तो ठीक उसी वजह से क्या होता है कि संबंध बिगड़ने लग जाते हैं। 1949 में चीनी गणराज्य के फाउंडर नेता माओ से तुंग ने कहा कि हथेली और पांच उंगलियों को चीन को कब्जे में कर लेना चाहिए यहीं से चीन की पड़ोसियों के प्रति नीति बदल गई। दरअसल माओ से तुंग ने कहा था कि हथेली और पांच उंगलियों पर कब्जा कर लेना चाहिए तो इसमें शामिल क्या-क्या है इस पे भी नजर डालनी जरूरी हो जाता है। दरअसल तिब्बत जिसको इसने शुरुआत में ही अपने कब्जे में ले लिया था तो उसे ये कहता है कि ये हमारी हथेली है वहीं इसके आसपास की अलग-अलग ट्रीटज को ये कहता है कि ये हमारी पांच उंगलियां हैं। तो तिब्बत इसकी हथेली हुई इसके अलावा पांच उंगलियों में लद्दाख, नेपाल, सिक्किम, भूटान और अरुणाचल प्रदेश शामिल है। अगर इन पांचों उंगलियों को समझे तो हमें यह भी पता लगता है कि तीन हिस्से भारत की मुख्य भूमि में शामिल है जिनके ऊपर चाइना की सीधी नजर है। लद्दाख में पहले अक्साई चीन बसा हुआ है अब अक्साई चीन के वजह से हम देखते हैं कि पहले ही दिक्कतें हैं और अभी भी वो लद्दाख को लेकर के अपनी मंशा छोड़ता नहीं है। अरुणाचल प्रदेश को पहले ही कहता है कि वो अरुणाचल प्रदेश नहीं है बल्कि जांग नान है और ये चीन का हिस्सा है। तो ये स्थिति है तो इस प्रकार से ये इसकी हथेली और पांच उंगलियां बन जाती है। इन इलाकों को 'आजाद' कराना या उन पर अपना प्रभाव जमाना चीन का रणनीतिक कर्तव्य माना जाता है। 

प्रमुख खबरें

Kerala Drug Row: कासरगोड ड्रग्स मामले में VD Satheesan पर CPI(M) का बड़ा हमला, बताया गंभीर Drug Connection

Health Tips: Digital Age में ब्रेन स्ट्रोक का नया लक्षण Dystextia, मोबाइल पर गलत मैसेज भेजना हो सकता है Stroke का संकेत

Meta Copyright Management Tool: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्सेस पॉलिसी पर मांगा जवाब, सिस्टम में दिखीं खामियां

Parliament में विपक्ष का हंगामा चर्चा से भागने की साजिश, Nitin Nabin बोले- जनता जानती है कौन दोषी