जब लाल किले के भीतर आतंकियों ने बरसाई थी गोलियां, 1996 से कितनी बार दहली दिल्ली?

By अभिनय आकाश | Nov 11, 2025

दिल्ली में लाल किले के पास 10 नवंबर की शाम धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई। धमाका मेट्रो गेट नंबर 1 के पास चलती गाड़ी में हुआ, ये धमाका आतंकी घटना है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई थी। मगर ये ऐसे समय हुआ, जब फरीदाबाद से लेकर श्रीनगर और लखनऊ तक फैले आतंकी नेटवर्क के तीन डॉक्टरों समेत आठ लोग पकड़े जाने का दावा पुलिस ने किया है और फरीदाबाद से करीब 2,900 किलो विस्फोटक भी बरामद किया गया है।  इसके तार कश्मीर, हरियाणा और यूपे तक फैले हुए है। इससे साफ होता है कि देश भर में कई आतंकी मॉड्यूल सक्रिय है, जो टेरर फैलाने की कोशिश में लगे हुए है। ब्लास्ट में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल होने की आशंका जताई गई है। राजधानी दिल्ली कई बार देश के सबसे भयावह आतंकी हमलों की गवाह रही है, एक बार फिर दहशत के उसी पुराने साये में लौट आई है। दिल्ली के ऐतिहासिक बाजार, स्मारक और सार्वजनिक स्थल समय-समय पर हिंसा की आग में झुलसते रहे हैं, जिनकी यादें आज भी शहर की सामूहिक स्मृति में गहरी दर्ज हैं।

दिल्ली मे 1996 से अब तक के विस्फोट

21 मई 1996: लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में तेज - विस्फोट की चपेट में आकर 16 लोगों की मौत और 39 घायल हुए थे ।

9 जनवरी 1997: ITO स्थित ओल्ड दिल्ली पुलिस हेडक्वॉर्टर के सामने विस्फोट हुआ, जिसमें 50 लोग जख्मी हुए थे।

1 अक्टूबर 1997: सदर बाजार के भीड़-भाड़ वाले एरिया में दो विस्फोट हुए, जिसकी चपेट में आकर 30 घायल हुए।

10 अक्टूबर 1997: शांति वन, कौड़िया पुल और किंग्सवे कैंप में तीन ब्लास्ट हुए। एक की मौत और 16 जख्मी।

18 अक्टूबर 1997: रानी बाग मार्केट में दो बम विस्फोट हुए। एक शख्स की जान गई और 23 घायल हुए थे।

26 अक्टूबर 1997: करोल बाग एरिया में दो ब्लास्ट हुए, जिनमें एक की जान गई, जबकि 34 घायल हो गए थे।

30 नवंबर 1997: लाल किला इलाके में दोहरे विस्फोट में तीन की मौत हुई, जबकि 70 से ज्यादा घायल हुए थे।

30 दिसंबर 1997: पंजाबी बाग के करीब एक बस में हुए ब्लास्ट में चार सवारियों की मौत और 30 जख्मी थे।

26 जुलाई 1998: कश्मीरी गेट ISBT में खड़ी बस में हुए ब्लास्ट में दो की मौत और तीन घायल हुए थे।

18 जून 2000: लाल किला के करीब हुए विस्फोट मे एक आठ साल की बच्ची समेत दो की मौत और कई जख्मी।

22 मई 2005: दिल्ली के सत्यम और लिबर्टी हॉल में हुए धमाके में दो की मौत और 60 से ज्यादा घायल हुए थे।

29 अक्टूबर 2005: सरोजिनी नगर मार्केट, गोविंदपुरी बस अड्डा और पहाड़गंज ब्लास्ट में 60 की मौत और 100 से ज्यादा घायल।

14 अप्रैल 2006: पुरानी दिल्ली स्थित जामा मस्जिद के परिसर में दो ब्लास्ट हुए, जिनमे 14 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

13 सितंबर 2008: कनॉट प्लेस, बाराखंबा रोड, गफ्फार मार्केट और जीके-1 में हुए ब्लास्ट में 24 की मौत और 100 से ज्यादा जख्मी।

27 सितंबर 2008: कुतुब मीनार के करीब महरौली फूल मार्केट के पास विस्फोट हुआ, जिसमे - तीन की मौत और 21 जख्मी हुए।

25 मई 2011: दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर खड़ी एक कार में मामूली ब्लास्ट हुआ था, जिसकी चपेट में कोई नहीं आया था।

7 सितंबर 2011: दिल्ली हाई कोर्ट के गेट नंबर-5 के बाहर सूटकेस बम ब्लास्ट हुआ, जिसमें 17 की मौत और 76 जख्मी हुए थे।

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कौन दोषी, कौन बरी

1996 में लाजपत नगर मार्केट में हुए बम विस्फोट में आतकवादी संगठन जम्मू कश्मीर इस्लामिक (लिबरेशन) फ्रंट के छह सदस्यों को देषी ठहराया गया था। अप्रैल 2012 में, अदालत ने मौहम्मद नौशाद मेहम्मद अली भट्ट और मिर्जा निसार हुसैन को मौत की सजा सुनाई। जावेद अहमद खान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

2005 के सत्यम सिनेमा और लिबर्टी सिनेमा बम विस्फोट मामले ने मार्च 2022 में अदालत ने एक व्यक्ति को बरी कर दिया। उसे तब कथित आतंकवादी संगठन 'बब्बर खालसा इंटरनेशन'का सदस्य बलय गया था।

2010 में जामा मस्जिद ब्लास्ट मामले में 2017 में कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के सह-सस्थापक यासीन भटकल और अन्य 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। हालाकि, आतंकी संगठन के तीन कथित सदस्यौ अफ्फाक, अब्दूस सबूर और रियाज अहमद सईदी को सबूते के अभाव में बरी कर दिया गया। धमाके के बाद आईएन के दो संदिग्धों ने एक टूरिस्ट क्स से मस्जिद के गेट के पास उत्तर रहे विदेशी सैलानियों पर गोलियां बरसा दी थी।

2008 में हुए 5 जगहो पर हुए बम धमाको से जुड़े केस में फरवरी 2018 में अदालत ने इंडियन मुजाहिद्दीन के सह-संस्थापक यसीन भटकल और उसके साथी के खिलाफ यहा दिल्ली में सितंबर आरोप तय किए।

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पड़ोस में हलचल 

जब भी इस तरह की कोई वारदात होती है, तो झूठी सूचनाएं और अफवाहें फैलाने वाला तंत्र सक्रिय हो जाता है। इससे सावधान रहने की जरूरत है। दक्षिण एशिया में पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश और नेपाल-श्रीलंका तक हालात जटिल बने हुए हैं। भारत इकलौता देश है, जो सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्थिर है। वह दुनिया में सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में है और यह रफ्तार थमनी नहीं चाहिए।

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