मास्क आखिर कौन से चेहरे पर लगाएं! (व्यंग्य)

By रामविलास जांगिड़ | May 01, 2020

मास्क को मुखौटा, आवरण, नकाब, परदा, मुखच्छेद, मुखावरण आदि कहते हैं। इन दिनों दिमाग में घचाघची मची हुई है कि आखिर में कौन सा मास्क पहनें। मुंह के आगे कौनसा परदा टांगें। रुख पर कैसा नकाब लगाएं। गाड़ी पर कैसा कवर लगाएं। मास्क के कितने अधिक नाम हैं! आपको कौन-कौन से नाम गिनाएं। अब आपकी भी तो जिम्मेदारी बनती है कि कुछ नाम आप भी बताएं। सारी जिम्मेदारी केवल मेरी ही नहीं है कि सब कुछ मैं ही बताऊं। न्यूजों में टीवी माता पर जब अलग-अलग पार्टीबाजों के अलग-अलग व्यक्तियों को देखता हूँ और उनके मुंह पर लगे मास्क नजर आते हैं तो दिल दहल जाता है। जिस चीज के लिए उन्हें बोलना चाहिए वे बोलते नहीं, क्योंकि उन्होंने विशेष मास्क लगा रखा है। हे भगवान! उठा ले रे! इन व्यक्तियों के ऊपर लगे बहुरूपीय मास्कों को उठा ले। टीवी पर जो एक विशेष नकाब लगाकर कोविडिएट भरी बातें करता, कोरोनाविद बना लेप चेप रहा है उसे ये गीत समर्पित है। हे हुजूर! रुख से जरा नकाब उठालो, मेरे हुजूर। ये बलवा फिर ना कराओ, मेरे हुजूूर। तुम लॉकडाउन में पड़े हो इस कोरोना काल में। टल जाए ये खतरा इस तूफानी रात में। जाकर तुम ये बता दो, मेरे हुजूर। रुख से फर्जी नकाब हटा दो, मेरे हुजूर! पर ये हुजूर आंखों के आगे जाने कौनसा परदा ताने ढीठ हुए जमे अड़े हैं।

 

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दुनिया में कई तरह के मास्क मंडरा रहे हैं। कई-कई रंगों में कई-कई डिजाइनों के मास्क बाजार में दिखाई पड़ रहे हैं। कौनसा मास्क किस समय लगाएं? यही चिंता मन ही मन खाए जा रही है। लॉक डाउन की इस घड़ी में खाट पर बिखरा-पसरा सा, भरपूर मात्रा में डरा-मरा, पर्याप्त रूप से खिंचा-भिंचा सा पड़ा हूँ। चेहरे पर मास्क लगाए पड़े-पड़े फोनियाता हुआ फेसबुकिया रहा हूँ। भरपूर रंग में मोबाइला रहा हूँ। जब-जब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के दरवाजे खोलता हूँ, तो मुझे कई तरह के मास्क दिखाई देते हैं। मैचिंग के मास्क, तो कैचिंग के मास्क। विचारों के मास्क, तो बिचारों के मास्क। आखिर कौन सा मास्क पहनें? इधर एक और टेंशन हुई जा रही है कि मास्क आखिर कौन से चेहरे पर लगाएं। चेहरे के बाहर चेहरे हैं और चेहरे के भीतर भी कई-कई चेहरे। यह चेहरा जो आपको सामने से एक दिखाई दे रहा है, वह अंदर से कई-कई चेहरे लिए घूम रहा है। हमने चेहरों के मामले में रावण को भी पीछे छोड़ रखा है। इतने-इतने चेहरे की अब किस-किस चेहरे पर कौन-कौन से मास्क लगाएं। किस-किस चेहरे ने कौन-कौन से नकाब टांग रखे हैं कहना असम्भव! कई लोग तो ऐसे हैं जो पल-पल मास्क बदल भी रहे हैं। हे भगवान! अब तो इस कोरोना को उठा ले रे! टीवी पर लोग वीभत्स लहजे में बदजुबानी हुए, चेहरे पर नकाब टांगे चर्चा ए जंग किए जा रहे हैं। जिनके खुद जीवन का सुर बिगड़ा है, वो ही मुझे सुर-ताल सिखा रहे हैं। वे नंगे मुंह, बिना मास्क पहने गरीबों को मास्क पहना रहे हैं। टीवी न्यूज पर लोग पहचानेंगे कैसे इसका पूरा गणित लगा रहे हैं। परदे में रहने दो, परदा न उठाओ। परदा जो उठ गया तो कोरोना चिपट जाएगा। लॉकडाउनीय कोरोना काल अपने में खाली और शून्य लिए पसरा है। प्याज की पर्तों से चेहरे लिए गिरगिटपंथी वाले मास्क टांगे लोग!


- रामविलास जांगिड़

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