DGP posting के नये नियम से किस अधिकारी को होने जा रहा है फायदा!

By अजय कुमार | Nov 05, 2024

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने स्तर से पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के चयन का रास्ता साफ करके एक साथ कई किन्तु-परंतुओं को जीवित कर दिया है। सवाल तो यहां तक उठ रहा है कि क्या एक पुलिस अधिकारी के लिये यह सब किया गया है। बता दें प्रदेश में करीब तीन वर्षों से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति नहीं की जा सकी है। नई नियमावली बनने के बाद अब सरकार को स्थायी तौर पर डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी से मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।

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नये नियमों में यह प्रावधान भी किया गया है कि डीजीपी की नियुक्ति कम से कम दो वर्षों के लिए की जाएगी, लेकिन डीजीपी के कार्यों से असंतुष्ट होने पर राज्य सरकार उन्हें हटा भी सकती है। वहीं, वेतन मैट्रिक्स के स्तर 16 वाले अधिकारियों में से ही डीजीपी का चयन किया जाएगा। मौजूदा डीजीपी प्रशांत कुमार प्रदेश के चौथे कार्यवाहक डीजीपी हैं। वह अगले वर्ष 31 मई को सेवानिवृत्त होंगे। चूंकि प्रशांत कुमार का कार्यकाल अभी छह माह से ज्यादा है, इसलिए नई नियमावली के लागू होने पर समिति द्वारा डीजीपी के चयन में इनके नाम पर भी विचार करना संभव होगा। प्रशांत कुमार से सरकार खुश भी है, उन्होंने अपवाद को छोड़कर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर कायदे से नियंत्रण कर रखा है। उनकी छवि भी साहसिक अधिकारी वाली है। डीजीपी की नियुक्ति के लिए पहले की व्यवस्था के अनुसार सरकार पुलिस सेवा में 30 वर्ष पूरे कर चुके उन अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजती थी, जिनका छह माह का कार्यकाल शेष हो। यूपीएससी राज्य सरकार को तीन अधिकारियों के नामों का पैनल भेजता था, जिसमें से सरकार किसी एक को डीजीपी बनाती थी।

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